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शत शत प्रणाम ! कोटि कोटि प्रणाम ! माता-पिता और सद्गुरू से उच्च नहीं किसी और का स्थान ।

बच्चे का जब जन्म होता है, पलता है, बड़ा होता है, शिक्षित होता है, परेशानी में फँसता है… सभी में उसको माता-पिता के आश्रय की जरूरत पड़ती है । बच्चों को पालने-पोषने के लिए माता-पिता भी अपने सामर्थ्य अनुसार सब कुछ करते हैं । फिर चाहें उनको अपनी सुख-सुविधा को ही क्यों ना छोड़नी पड़े  ?? वे उसकी भी परवाह नहीं करते । सद्गुरु भी हमें भगवन्नाम मंत्र की दीक्षा देकर हमें आत्मविद्या का प्रसाद देते हैं और हमारे जन्मों-जन्मों के पापों को काट देते हैं । सत्संग द्वारा ईश्वर का ज्ञान देकर परमात्मा प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं और सदा के लिए मुक्त कर देते हैं । तो आप ही बताइये, ऐसे माता-पिता और सद्गुरु की तुलना इस सृष्टि में किसी और से की जा सकती है क्या ? (नहीं की जा सकती है) ।

माता-पिता अपना जीवन संतान के पालन-पोषण में समर्पित कर देते हें ।

कहते हैं कि ईश्वर हर घर में अवतरित नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने माता-पिता की रचना की ।

बच्चों के लिए पिता एक नदी हैं तो माँ उसकी शीतलता है ।

माँ अगर छाँव है तो पिता विशाल वृक्ष है, यदि माँ ममता की धारा है तो पिता जीवन का सहारा है ।

ऐसे देवतुल्य माता-पिता का एहसान चुकाया नहीं जा सकता । अगर हम अपनी खाल के जूते भी बनाकर माता-पिता को पहनायें तो भी उनके ऋण से उऋण नहीं हो सकते हैं ।

फिर क्यों बदलते युग में बदल गयी हैं, आज की संतानें ?? भूल गयी हैं अपना दायित्व, माता-पिता के प्रति । विमुख हो गयी हैं उनसे, और लिप्त हो गयी हैं पाश्चात्य जगत के कुसंस्कारों से । कहीं वैलेंटाईन डे का जोर है, तो कहीं  रैप और पॉप का शोर है ।

अमेरिका में एशियन मूल के विद्यार्थी क्यों पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हैं ?

माता-पिता के पूजन से पढ़ाई में अच्छे परिणाम का क्या संबंध है ? इस पर शोध करते हुए शोधकर्ताओं के सामने एक प्रश्न आया कि अमेरिका में एशियन मूल के विद्यार्थी क्यों पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हैं ? इस पर उन्होंने पाया कि वे अपने बड़ों का आदर करते हैं और माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हैं तथा उज्ज्वल भविष्य-निर्माण के लिए गम्भीरता से श्रेष्ठ परिणाम पाने के लिए अध्ययन करते हैं ।

अतः जो विद्यार्थी माता-पिता का आदर करेंगे वे ‘वेलेन्टाइन डे’ मनाकर अपना चरित्र भ्रष्ट नहीं कर सकते हैं । संयम से उनकी बुद्धिशक्ति का विकास होगा और वे पढ़ाई में अच्छे परिणाम लायेंगे ।

नहीं कोई माँ सा प्यारा है, नहीं कोई पिता सा सहारा है ।

न कोई माँ की ममता जैसा, न कोई पिता के सम जैसा ।।

नहीं माँ जैसा है कोई भाव, नहीं पिता जैसी कहीं छाँव ।

संग माता-पिता निसर्ग है, उनके चरणों में हमारा स्वर्ग है ।।

उनके चरणों में हमारा स्वर्ग है ।।