गाय का दूध, दही, घी आदि तो स्वास्थ्यप्रद हैं ही, किंतु उसका गोबर और झरण भी बहुत लाभदायी हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार देशी गाय का गोबर’ असंक्रामक है। इसमें फॉस्फोरस नामक तत्त्व बहुतायत में पाया जाता है। यह तत्त्व अनेक प्रकार के संक्रामक रोगों के कीटाणुओं का नाश करता है। गोबर से लीपे हुए घरों में परमाणु बम के घातक विकिरण भी निष्क्रिय हो जाते हैं।

गोबर में विद्युत-निरोधक शक्ति निहित है। विद्युत प्रवाह गोबर को पार करके दूसरे द्रव्य में प्रवेश नहीं कर सकता। आकाश से गिरनेवाली बिजली गोबर के ढेर पर गिरते ही वहीं समा जाती है।

मृत शरीर में कई प्रकार संक्रामक रोगों के कीटाणु होते हैं। इसीलिए जमीन पर गाय के गोबर का लीपन करके उस पर शव को लिटाया जाता है, ताकि उपस्थित कुटुंबीजनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हो सकें।

कुष्ठ रोग में गाय का गोबर लाभकारी है। बंदर के काटने से हुए घाव पर गाय का गर्म गोबर लगाने से पीड़ा तत्काल गायब हो जाती है।

गोबर में जीवाणुओं एवं विषाणुओं को नष्ट करने की विशेष क्षमता होती है। इटली के चिकित्सक यहाँ तक सलाह देते हैं कि टी.बी. सेनिटोरियम (क्षयरोग चिकित्सालय) में गोबर रखा जाय क्योंकि टी.बी. के कीटाणु गोबर की गंधमात्र से मर जाते हैं।

सूखी खुजली में प्रभावित अंग पर गोबर लगाने से शीघ्र आराम होता है। खून की खराबी में और फोड़े-फुंसियाँ होने पर शरीर पर गोबर के लेप का प्रयोग शीघ्र प्रभाव दिखाता है। गोबर से बना साबुन चर्मरोगनाशक होता है और अंगकांति बढ़ाता है।

गाय के गोबर से बनी गौचंदन धूपबत्ती विषाणुओं (वायरस) का नाश करती है, वातावरण में सात्त्विकता लाती है। बाजारू अगरबत्तियों में परफ्यूम्स (सुगंधयुक्त रसायन) पड़ते हैं। इससे वे सुगंध तो देती हैं पर हानि भी करती हैं। लेकिन गौचंदन धूपबत्ती लाभ-ही-लाभ करती है।

अतुल औषधि दायिनी, पंचामृत की खानि ।

गाय भवन में पालियो, कबहुँ न होवे हानि ॥

– ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2004