पूर्वी केन्या में एक स्कूल के छात्रों ने वीडियो फिल्म शो और डिस्को पर प्रतिबंध लगाने सम्बंधी शिक्षकों के आदेश के विरोध में अपने ही स्कूल को आग लगा दी और वहाँ रखे कम्प्यूटरों को लेकर फरार हो गये।

दैनिक समाचार पत्र ‘द ईस्ट अफ्रीकन स्टैंडर्ड डेली’ के अनुसार शिक्षकों ने परीक्षा की दृष्टि से यह प्रतिबंध लगाया था ताकि छात्रों को पढ़ाई का मौका मिल सके। इस आदेश के खिलाफ करीब साढ़े सात सौ स्कूली छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया और स्कूल में तोड़-फोड़ की। पुलिस ने इन छात्रों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े। समाचार पत्र में स्कूल के जले हिस्सों की अनेक तस्वीरें छपी थीं।

बच्चे टी.वी. पर हिंसक फिल्में देखते हैं।
समाजशास्त्रियों एवं मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ये फिल्में जनमानस में जहर घोल रही हैं। फिल्मों में बढ़ती हिंसा और अश्लीलता के प्रदर्शन का जो विष वातावरण में घुल रहा है। उसकी पहुँच टीवी. के माध्यम से घर-घर तक हो रही है और आम लोगों के मन-मस्तिष्क दूषित हो रहे हैं। इससे अनगिनत लोगों का आचरण बिगड़ रहा है और शारीरिक व मानसिक रूप से वे विकृत और बीमार हो रहे है।

फिल्म-निर्माता पैसे के लिए अपनी फिल्मों में अनावश्यक क्रूरता, पाशविकता और परपीड़ा के दृश्य ठूंसते हैं। विशेष प्रभाव पैदा करनेवाली तकनीक की सहायता से इन दृश्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाता है। ऐसे दृश्य एक बार नहीं, विभिन्न कार्यक्रमों में बार-बार दिखाये जाते हैं। जितना अधिक हिंसक और अश्लील दृश्य होगा, उतना हा अधिक बार उसे दिखाया जाता है। इस तरह बच्चों, किशोरों और युवाओं के मन मस्तिष्क पर इसका गहरा असर पड़ता है तथा हिंसा और अश्लीलता का जहर उनको लगातार पंगु बनाता जाता है। फिल्मों, विडियो फिल्मों और टी.वी. चैनलों द्वारा प्रदर्शित ये दृश्य बच्चों के कोमल मन पर इतना खराब प्रभाव छोड़ रहे हैं कि वे उससे बहुत समय तक मुक्त नहीं हो सकेंगे। मासूम पीढ़ी का जीवन अंधकारमय हो रहा है। उनकी सोच नकारात्मक हो रही है और कदम गलत दिशा में बढ़ रहे हैं। नैतिकता और मर्यादा नष्ट करनेवाले फैशन, विलासिता, मारधाड़, अपराध, सेक्स, व्यसन, फिजूलखर्ची व चरित्रहीनता के दृश्य फिल्मों व टी.वी. कार्यक्रमों में भरे पड़े हैं। इनके दूषित और हानिकारक प्रभाव विनाशकारी सिद्ध हो रहे हैं। ये फिल्में मनोरंजन नहीं करती बल्कि बल, बुद्धि व ओज का नाश करके विनाश की तरफ ले जाती हैं।