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मत्स्यासन विधि और लाभ -Matsyasana (Fish Pose) Steps & Benefits

मत्स्य का अर्थ है मछली । इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है अतः मत्स्यासन कहलाता है । प्लाविनी प्राणायाम के साथ इस आसन की स्थिति में लम्बे समय तक पानी में तैर सकते हैं ।ध्यान विशुद्धाख्य चक्र में । श्वास पहले रेचक, बहिर्कुम्भक, फिर पूरक और रेचक ।

मत्स्यासन से पूरा शरीर मजबूत बनता है । गले, छाती व पेट की तमाम बीमारियाँ दूर होती हैं । आँखों की रोशनी बढती है। गला साफ रहता है । श्वसनक्रिया ठीक से चलती है । कन्धों की नसें उलटी मुडती हैं इससे छाती व फेफडों का विकास होता है । पेट साफ रहता है। आँतों का मैल दूर होता है । रक्ताभिसरण की गति बढती है । फलतः चमडी के रोग नहीं होते । दमा और खाँसी दूर होती है । छाती चौडी बनती है । पेट की चरबी कम होती है । इस आसन से अपानवायु की गति नीचे की ओर होने से मलावरोध दूर होता है। थोडा पानी पीकर यह आसन करने से शौच-शुद्धि में सहायता मिलती है । मत्स्यासन से स्त्रियों के मासिकधर्म सम्बन्धी सब रोग दूर होते हैं। मासिकस्राव नियमित बनता है ।
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