कौन से हैं वे तीन शत्रु…?? – पूज्य बापूजी

जो व्यक्ति अपनी वीर्यरूपी ऊर्जा को संभालने की अक्ल नहीं रखता, वह मुर्गा छाप बच्चों को जन्म देगा अथवा परिवार-नियोजन के साधनों का उपयोग करके अपना और अपनी पत्नी का सत्यानाश करता ही रहेगा। फिर उसमें सहनशक्ति, आरोग्यता, निर्भयता, ध्यान करने की लगन और मुक्ति के मार्ग पर चलकर परमात्मा को पाने की इच्छा नहीं रहेगी क्योंकि वह अंदर से थक चुका होगा।

आज का युवान समझता ही नहीं कि वीर्यनाश करके वह अपनी अमूल्य शक्ति का अपने ही हाथों से नाश कर रहा है। जो व्यक्ति नीति और मर्यादा के बिना अपनी इच्छाओं को पोसने लगता है उसका मन निर्बल हो जाता है, बुद्धि विनाश की तरफ जाने लगती है और शरीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। यदि तुम कामनाओं को व्यर्थ पोसते रहोगे तो तुम्हारे न चाहने पर भी ये तीन शत्रु- काम, क्रोध और लोभ तुम्हें गिरा देंगे।

नियम में निष्ठा -पूज्यपाद संत श्री आशारामजी बापू

केवल मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो उन्नति कर सकता है। मगर सावधान नहीं रहा तो अवनत भी हो सकता है। या तो उसका उत्थान होता है या पतन होता है, वहीं का वहीं नहीं रहता।

अगर मनुष्य उन्नति के कुछ नियम जान ले और निष्ठापूर्वक उसमें लगा रहे तो पतन से बच जायेगा और अपने कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता जायेगा। आध्यात्मिक पतन न हो, इसलिए हर रोज कम-से-कम भगवन्नाम जप की दस माला करनी ही चाहिए। दूसरी बात त्रिबन्ध प्राणायाम करने चाहिए। इससे माला में एकाग्रता बढ़ेगी और जप करने में भी आनंद आयेगा। माला आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए जिससे मंत्रजाप से उत्पन्न होने वाली विद्युतशक्ति जमीन में न चली जाये। अर्थिंग मिलने से तुम्हारी साधना का प्रभाव वहीं क्षीण हो जाता है।

यदि आसन पर बैठकर जप करते हो और अर्थिंग नहीं होने देते हो तो भजन के बल से एक आध्यात्मिक विद्युत के कण पैदा होते हैं जो तुम्हारे शरीर के वात, पित्त और कफ के दोषों को क्षीण करके स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं। यही कारण है कि हमारे ऋषि मुनि प्रायः ज्यादा बीमार नहीं पड़ते थे। नियम में अडिग रहने से अपना बल बढ़ता है जिससे हम अपने जीवन की बुरी आदतों को मिटा सकते हैं। जैसे, कइयों को आदत होती है ज्यादा बोलने की। उस बेचारे को पता ही नहीं होता है कि ज्यादा बोलने से उसकी कितनी शक्ति नष्ट होती है। वाणी का व्यय नहीं करना चाहिए। गुजराती में कहा गया है कि न बोलने में नौ गुण होते हैं।

ʹन बोलवामां नव गुण।ʹ

कम बोलने से या नहीं बोलने से ये लाभ हैं- झूठ बोलने से बचेंगे, निंदा करने से बचेंगे, राग- द्वेष से बचेंगे, ईर्ष्या से बचेंगे, क्रोध और अशांति से बचेंगे, कलह से बचेंगे और वाणीक्षय के दोष से बचेंगे। इस प्रकार छोटे-मोटे नौ लाभ होते हैं।

अधिक बोलने की आदत साधक को बहुत हानि पहुँचाती है। साधक से बड़े-में-बड़ी गलती यह होती है कि यदि कुछ शक्ति आ जाती है या कुछ अनुभव होते हैं तो उसका उपयोग करने लगता है, दूसरों को बता देता है। उससे वह एकदम गिर जाता है। फिर वह अवस्था लाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए साधकों को अपना अनुभव किसी को नहीं कहना चाहिए। अगर साधक किसी को ईश्वर की ओर मोड़ने में सहयोगी होता हो, अपने अनुभव से उसकी श्रद्धा में असर होता हो तो फिर थोड़ा-बहुत ऊपर-ऊपर से बता देना चाहिए किन्तु पूरा नहीं बताना चाहिए। जिस तरह वाणी पर संयम लाया जा सकता है और बुरी आदतें भी मिटायी जा सकती हैं उसी तरह यदि ज्यादा खाने का, काम विकार का या शराब आदि का दोष है तो उसे भी दूर किया जा सकता है।

अनुत्तीर्ण विद्यार्थिनी बनी महाविद्यालय की टॉपर | Anubhav

Aapke apne anubhav, Success tip

 

मेरा गणित विषय बहुत कमजोर था, जिससे महाविद्यालय में पास होना मुझे चुनौती-सा लगता था।

 मेरी जन्मकुंडली में लिखा था कि मेरी पढ़ाई छूट जायेगी और हुआ भी ऐसा ही !! महाविद्यालय के प्रथम वर्ष की परीक्षा में मैं पास नहीं हो सकी और मेरी पढ़ाई छूट गयी । परंतु मेरे सद्गुरुदेव बापूजी ने मेरे लेख पर मेख मार दी और मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

चेटीचंड के अवसर पर अहमदाबाद में मैंने गुरुमंत्र लिया और फिर से पढ़ाई चालू की।

गुरुमंत्र लेने के बाद मेरी किस्मत के सितारे तो ऐसे चमके कि मैं हर सेमेस्टर में आगे बढ़ती चली गयी। आखिर पूज्य बापूजी की कृपा से मैं सरदार पटेल विश्वविद्यालय (गुजरात) में प्रथम आयी । अब मैं एन्वायरमेंट बायोटेक से मास्टर्स कर रही हूँ।

कहाँ तो मैं एक सामान्य विद्यार्थिनी थी जो गणित विषय में अनुत्तीर्ण हो जाती थी और कहाँ मैं पूरी यूनिवर्सिटी में प्रथम आयी। यह सब पूज्य बापूजी की कृपा से हुआ ।

 पूज्यश्री ने हमें हमेशा हर मुश्किल घड़ी से उबारा है। बापूजी के श्रीचरणों में मेरी श्रद्धा-भक्ति हमेशा बढ़ती रहे यही मेरी प्रार्थना है।


जिन्होंने पूरी दुनिया में संयम-शिक्षा, निःस्वार्थ समाज-सेवा, देश-सेवा, गौ-सेवा और भक्ति-ज्ञानयोग की गंगा बहाकर करोड़ों लोगों को पवित्र किया है, ऐसे परम पवित्र पूज्य बापूजी पर षड्यंत्र करके जो आरोप लगाये जा रहे हैं वे सब-के-सब पूरी तरह झूठे और मनगढंत हैं। मैं उनका खंडन करती हूँ।