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surya namaskar
Surya Namaskar: Benefits, Step by Step Poses, Images, Mantra
Surya Namaskar Steps (Poses), Mantra, Benefits, Images, 12 Steps [ सूर्य नमस्कार के फायदे ( लाभ)] Surya Namaskar Benefits [Labh] in Hindi ➠ हमारे ऋषियों ने मंत्र और व्यायाम सहित एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसमें सूर्योपासना का समन्वय हो जाता है। इसे ‘सूर्यनमस्कार’ कहते हैं। इसमें कुल 10 आसनों का समावेश है। हमारी शारीरिक शक्ति की उत्पत्ति, स्थिति एवं वृद्धि सूर्य पर आधारित है। ➠ जो लोग सूर्यस्नान
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Supt vajrasan
सुप्त वज्रासन विधि, लाभ |Supta Vajrasana Steps, Benefit
इस आसन में ध्यान करने से मेरूदण्ड को सीधा करने का श्रम नहीं करना पड़ता और मेरूदण्ड को आराम मिलता है। उसकी कार्य़शक्ति प्रबल बनती है। इस आसन का अभ्यास करने से प्रायः तमाम अंतःस्रावी ग्रन्थियों को, जैसे शीर्षस्थ ग्रन्थि, कण्ठस्थ ग्रन्थि, मूत्रपिण्ड की ग्रन्थि, ऊर्ध्वपिण्ड तथा पुरूषार्थ ग्रन्थि आदि को पुष्टि मिलती है। फलतः व्यक्ति का भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास सरल हो जाता है। तन-मन का स्वास्थ्य प्रभावशाली बनता
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प्राणायाम – टंक विद्या | Pranayam Rahasya Kundalini
प्राणायाम करनेवालों को और सभी साधकों को टंक विद्या का प्रयोग करना चाहिए। बच्चों को भी जो कान में उँगली डाल के ‘ॐकार गुंजन’ की साधना सिखाते हैं,उसके पहले भी ये दो प्राणायाम कराने चाहिए। लाभ : यह लगता तो साधारण प्रयोग है लेकिन शरीर के सात केन्द्रों में से यह पंचम केन्द्रको सक्रिय रखता है। नीचे के चार केन्द्रों की अपेक्षा पाँचवाँ केन्द्र हमें छठे केन्द्र में, जो भूमध्य(भौंहों
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पश्चिमोत्तानासन विधि और लाभ -Paschimottanasana Steps & Benefits
इस आसन के अभ्यास से मन्दाग्नि, मलावरोध, अजीर्ण, उदररोग, कृमिविकार, सर्दी, खाँसी, वातविकार, कमर का दर्द, हिचकी, कोढ, मूत्ररोग, मधुप्रमेह, पैर के रोग, स्वप्नदोष, वीर्यविकार, रक्तविकार, एपेन्डीसाइटिस, अण्डवृद्धि, पाण्डुरोग, अनिद्रा, दमा, खट्टी डकारें आना, ज्ञानतन्तु की दुर्बलता, बवासीर, नल की सूजन, गर्भाशय के रोग, अनियमित तथा कष्टदायक मासिक, ब्नध्यत्व, प्रदर, नपुंसकता, रक्तपित्त, सिरोवेदना, बौनापन आदि अनेक रोग दूर होते हैं |
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धनुरासन विध, लाभ| Dhanurasana (Bow Pose)* Steps
इस आसन में शरीर की आकृति खींचे हुए धनुष जैसी बनती है अतः इसको धनुरासन कहा जाता है । ध्यान मणिपुर चक्र में । श्वास नीचे की स्थिति में रेचक और ऊपर की स्थिति में पूरक ।
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