benefits of eating with hands
Eating Food with Hands Benefits [Hath Se Khana Khane Ke Labh]
Eating Food with Hands Benefits in Hindi [Hath Se Khana Khane Ke Fayde]: आजकल पाश्चात्य रहन-सहन से प्रभावित होकर हाथों से भोजन करने के बजाय चम्मच और काँटों के उपयोग का प्रचलन बढ़ रहा है । हाथों से भोजन करने के लाभों से हम परिचित नहीं हैं । ➨ हमारा शरीर पाँच तत्वों से बना है । मुद्रा विज्ञान के अनुसार हमारे हाथों से ऊर्जा का तीव्र बहाव होता रहता
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Drugs, Tabacco & Alcohol : Nasha Mukt Samaj ki Aur
Drugs, Tabacco, Alcohol, Cigarette Mukt Samaj: नशा क्या है….. ? संत श्री आशारामजी बापू कहते हैं : “जिसमें शांति न हो उसे ‘नशा’ कहते हैं ।” गुटखा, बीड़ी, दारू या कोई भी व्यसन तन-मन को भयंकर हानि पहुंचाते हैं । इनसे इच्छाशक्ति दुर्बल होती है । मनुष्य देवता जैसा बनने के बदले पशु से भी बदत्तर बन जाता है । इनके चंगुल से मुक्त होने में ही सार है |
atmavishwas kaise badhaye self confidence
Happiness(Laughter Yoga) increases Self Confidence/ Atma vishwas
Know Laughter Yoga (Hasya Yog) Importance/ Benefits in Hindi :Laughter Yoga  increases Self Confidence/ Atma vishwas. ‘ऋग्वेद’ में आता है..~ “विश्वाहा वयं सुमनस्यमानाः ।” ‘हम सदा ही अपने को प्रसन्न रखें ।’  ➠  खुशी जैसी खुराक नहीं और चिंता जैसा गम नहीं। भगवन्नाम या ॐकार आदि के उच्चारण के साथ हास्य करने से बहुत सारी बीमारियाँ मिटती हैं और रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है । हास्य आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है ।
purushottam maas mein kya karein kya na karein
Adhik Maas / Purushottam Maas 2020 Date, Kya Kare, Kya Na Kare?
Adhik Maas / Purushottam Maas 2020 Kya Kare, Kya Na Kare? Adhik Maas 2020 Date Or Purushottam Maas 2020 Date अधिक – पुरुषोत्तम मास 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर 2020 ◆ Purushottam Maas Me Kya Kare ? (१) आँवला और तिल के उबटन से स्नान पुण्यदायी और स्वास्थ्य व प्रसन्नतावर्धक है। (२) आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है। (३) भगवन्नाम-जप, कीर्तन, भगवद्स्मरण,
shiksha lokopayogi honi chahiye
Teacher’s Day 2020 Special : A Guru Sishya Story in Hindi
गुरुकुल के आचार्य ने तीन शिष्यों से कहा : “तुम्हारी शिक्षा पूरी हो गयी । अब तुम लोग जा सकते हो ।”बिना परीक्षा लिए ही शिक्षा पूरी होने की बात से शिष्यों को आश्चर्य तो हुआ, फिर भी आचार्य को प्रणाम कर वे तीनों घर के लिए चल दिए । थोड़ी दूर चलने पर मार्ग में उन्हें काँटे बिखरे मिले । एक शिष्य ने कहा :”हमें इन काँटों से बचकर