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Swami Rama Tirtha Ji Ki Sanyam Nistha (Brahmacharya)
Swami Rama Tirtha Ji Ki Sanyam Nistha (Brahmacharya)
स्वामी रामतीर्थ की ख्याति अमेरिका में दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी। लोग उन्हें ‘जिन्दा मसीहा’ कहते थे और वैसा ही आदर-सम्मान भी देते थे। कई चर्चा, क्लबों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान देने के लिए उन्हें बुलाया जाता था। उनके व्याख्यानों में बहुत भीड़ होती थी। बड़े बड़े प्राध्यापक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, वकील, धार्मिक जनता और पादरी इत्यादि सभी प्रकार के लोग उनके विचार सुनने के लिए आया करते थे। कभी-कभी
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Shivaji Maharaj - Ek Adarsh Rajyakarta, Parakrami, Prajahit Samrat
Shivaji Maharaj: Ek Adarsh Rajyakarta, Parakrami, Prajahit Samrat
Chhatrapati Shivaji Maharaj: Ek Adarsh Rajyakarta, Parakrami, Prajahit Samrat: सत्रहवीं शताब्दी में हिन्दुस्तान में मुगल शासकों का अत्याचार, लूटमार बढ़ती जा रहा था । हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बनाया जा रहा था । मुगलों के अतिरिक्त पुर्तगालियों व अंग्रेजों ने भी भारत भूमि में अपने कदम जमाने शुरू कर दिये थे । परिस्थितियों के आगे घुटने टेक रहा हिन्दू समाज नित्यप्रति राजनैतिक तथा धार्मिक दुरावस्था की ओर अग्रसर हो रहा
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Sant Tulsidas Jayanti 2021: History, Significance, Quotes, Story
Sant Tulsidas Jayanti 2021: History, Significance, Quotes, Story
( क्या आप अपने बच्चों को हर प्राणी में…. हर वस्तु में…. ईश्वर को देखने का नजरिया देना चाहते हैं ???? तो उन्हें तुलसीदासजी की जयंती पर यह प्रसंग जरूर सुनाएं । ) संत तुलसीदासजी की प्रभुनिष्ठा…….. ▪ संत तुलसीदासजी अरण्य में विचरण करने जा रहे थे । एक सुंदर, सुहावना वृक्ष देखकर वे उसकी छाया में बैठ गये और सोचने लगे :- ‘ प्रभु ! क्या आपकी लीला है
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Jaisi Karni Waisi Bharni Meaning with a Story in Hindi
Jaisi Karni Waisi Bharni Meaning with a Story in Hindi
 करम प्रधान बिस्व करि रखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा । (श्रीरामचरित अयो. का. 218.2) कर्म की अपनी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं है क्योंकि वह जड़ है । कर्म को यह पता नहीं है कि ‘मैं कर्म हूँ ।’ फिर भी यह देखा गया है कि कर्म की गति बड़ी गहन होती है । इसलिए मनुष्य अगर सावधान होकर सत्वगुण नहीं बढ़ाता है, अपितु जो मन में आया
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Mahapurusho ke vachan akatya hote hai - An Interesting Story in Hindi
महापुरुषों के वचन अकाट्य होते हैं..: An Interesting Story in Hindi
नाथ सम्प्रदाय में श्री आमनाथजी एक सिद्ध योगी हो गये । एक बार उन्होंने शिष्यों सहित सिरमौर राज्य (वर्तमान सिरमौर जिला) के नाहन शहर के बाहर डेरा डाला । बाबाजी ने अपने शिष्य अँतवारनाथ से कहा : “बेटे ! शहर से भिक्षा ले आओ । हाँ, राजभंडार से आम का अचार जरूर लाना ।” भिक्षा एकत्र करके शिष्य राजभंडारी से अचार लेने गया । उन दिनों नाहन में आम नहीं
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