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कीमत….. सिकंदर के साम्राज्य और मनुष्य-जीवन की …!!
▪एक बार सिकंदर की मुलाकात एक आत्ममस्त संत से हो गयी। धन-वैभव के नशे से मतवाले बने सिकंदर के हावभाव देखकर उन्होंने कहा : ‘‘सिकंदर ! तूने जो इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है, वह मेरी दृष्टि में कुछ भी नहीं है। मैं उसे दो कौड़ी का समझता हूँ । ▪सिकंदर उन ज्ञानी महापुरुष की बात सुनकर नाराज हो गया । बोला : ‘‘तुमने मेरा अपमान किया है ।
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बचपन से ही वैराग्य-दर्शन..
बालक नानक ने शिक्षक को बताये वर्णमाला के अक्षरों का अर्थ.. बालक नानक की बुद्धि बचपन से ही बड़ी तीक्ष्ण थी, उन्हें जो भी पढ़ाया जाता वे एक ही बार में उसे कंठस्थ कर लेते थे। एक दिन पंडित उन्हें देवनागरी की वर्णमाला सिखा रहे थे। वर्णमाला के कुछ अक्षर उनके पीछे दोहराने के बाद बालक नानक ने कहा: “पंडित जी! आप जो अक्षर सिखा रहे हैं, उनके अर्थ भी
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नियम का महत्त्व…
पूज्य संत श्री आशाराम बापूजी जीवन में कोई-न-कोई व्रत, नियम अवश्य होना चाहिए । छोटा-सा नियम भी जीवन में बड़ी मदद करता है। एक सेठ किसी महात्मा की कथा में गया । महात्मा ने उससे कहा : ‘‘जीवन में कोई-न-कोई नियम ले लो । उस पेटू सेठ ने कहा : ‘‘बाबाजी ! और तो कोई नियम नहीं लेकिन जब तक मेरे घर के सामने रहनेवाला बूढ़ा कुम्हार जिंदा होगा, तब
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saccha heera
सच्चा हीरा
संध्या का समय था । गाँव की चार स्त्रियाँ पानी भरने के लिए अपने-अपने घड़े लेकर कुएँ पर पहुँचीं । पानी भरने के साथ-साथ वे आपस में बातें भी कर रही थीं ।  उनमें से एक ने कहा : ‘‘मैं अपने बेटे से बहुत खुश हूँ ।  भगवान अगर किसीको बेटा दे तो ऐसा ही दे। बेटा क्या, अनमोल हीरा है हीरा ! उसका कंठ इतना मधुर है कि बस
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संत की दयालुता और प्रकृति की न्यायप्रियता
  एक बार अक्कलकोट (महा.) वाले श्री स्वामी समर्थ जंगल में एक वृक्ष के नीचे आत्मानंद की मस्ती में बैठे थे। आसपास हिरण घास चर रहे थे। इतने में कुछ शिकारी आ गये। उन्हें देखते ही हिरण संत की शरण में आ गये। संत ने प्रेम से हिरणों को सहलाया। उनमें हिरण-हिरणी के अलावा उनके दो बच्चे भी थे। स्वामीजी ने हिरण दम्पति को पूर्वजन्म का स्मरण कराते हुए कहा
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