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A Story of Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi [From Biography]
A Story of Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi [From Biography]
उड़ीसा में कटक है। एक बार वहाँ प्लेग फैला। मच्छर और गंदगी के कारण लोग बहुत दुःखी थे। उड़िया बाजार में भी प्लेग फैला था। केवल बापूपाड़ा इससे बचा था। बापूपाड़ा में बहुत सारे वकील लोग, समझदार लोग रहते थे। वे घर के आँगन व आसपास में गंदगी नहीं रहने देते थे। वहाँ के कुछ लड़कों ने सेवा के लिए एक दल बनाया, जिसमें कोई 10 साल का था तो कोई 11 का, कोई 15 का तो कोई 18 साल का था। उस दल का मुखिया था एक 12 साल का किशोर।
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Mahatma Gandhi Death Anniversary 2022: AtmaSanyam
Mahatma Gandhi Death Anniversary 2022: AtmaSanyam
Mahatma Gandhi Death Anniversary 2022: जिसने जीभ को नहीं जीता वह विषय वासना को नहीं जीत सकता। मन में सदा यह भाव रखें कि हम केवल शरीर के पोषण के लिए ही खाते हैं, स्वाद के लिए नहीं। जैसे पानी प्यास बुझाने के लिए ही पीते हैं, वैसे ही अन्न केवल भूख मिटाने के लिए ही खाना चाहिए। हमारे माँ-बाप बचपन से ही हमें इसकी उल्टी आदत डालते हैं। हमारे
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Importance of Matru Pitru Pujan Divas (Divine Valentine's Day)
Importance of Matru Pitru Pujan Divas (Divine Valentine’s Day)
एक बार भगवान शंकर के यहाँ उनके दोनों पुत्रों में होड़ लगी कि, कौन बड़ा ? निर्णय लेने के लिए दोनों गय़े शिव-पार्वती के पास। शिव-पार्वती ने कहा : जो संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले पहुँचेगा, उसी का बड़प्पन माना जाएगा । कार्तिकेय तुरन्त अपने वाहन मयूर पर निकल गये पृथ्वी की परिक्रमा करने । गणपति जी चुपके-से एकांत में चले गये । थोड़ी देर शांत होकर उपाय खोजा
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Thomas Alva Edison story in hindi
Thomas Alva Edison : A Story from his life Biograhpy in Hindi
Thomas Alva Edison : An Inspiratioal/ Motivational Story from his life Biograhpy in Hindi for Kids [Baccho Ke lie Kahani] एक दिन थॉमस अल्वा एडिसन स्कूल से अपने घर आया और स्कूल से मिले हुए पेपर को अपनी माँ से देते हुए बोला कि : “माँ मेरे शिक्षक ने मुझे यह पत्र दिया है और कहा है कि ‘इसे केवल अपनी माँ को ही देना !!’ बताओ माँ आखिर इसमें
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Pujya Bapuji Ke Prerak Jivan Prasang for Kids
Pujya Bapuji Ke Prerak Jivan Prasang for Kids
पूज्यश्री बचपन से ही अलौकिक योग्यताओं के स्वामी रहे हैं । सरलता, विनम्रता, दृढनिश्चयी व हँसमुख स्वभाव, कुशाग्र बुद्धि, जिज्ञासा वृत्ति, माता-पिता व संत सेवा जैसे सद्गुण बचपन में ही बापूजी के जीवन में खिलने लगे थे । पुत्र में दिखा पिता को ईश्वर नूर अम्माजी कहती थीं कि “साँई (पूज्य बापूजी) के पिताजी ने मुझे साफ कह रखा था कि “किन्हीं संत या गरीब को दान देकर ही भोजन
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