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Today Chandra Grahan Time [26th May 2021]

वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर 26 मई बुधवार को चंद्र ग्रहण लगेगा । जहाँ दिखेगा वहाँ के चन्द्रोदय से ग्रहण-मोक्ष (भारत में शाम 6:23) तक का समय पुण्यकाल है । यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में पूर्ण ग्रहण होगा ।

ग्रहण के समय क्या होता है ?
What happens during Chandra Grahan

  • सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी के मनुष्यों को नहीं मिल पाती हैं तो हमारे जो सूक्ष्म, सूक्ष्मतम, सूक्ष्मतर, सूक्ष्मत अवयव में हिलचाल नहींवत हो जाती है । यही कारण है कि सूर्य ग्रहण के समय कोई भी गंदा भाव और गंदा काम होता है तो वह स्थायी हो जाता हैं क्योंकि प्रसार नहीं हो पाता हैं ।
  • ऐसे ही चंद्र ग्रहण के समय गंदा भाव या गंदा काम या गन्दगी स्थिर हो जाती है । इसलिए कहते हैं कि चंद्र ग्रहण के समय भोजन न करें लेकिन एक प्रहर, दो प्रहर, तीन प्रहार के पहले अन्न-जल का त्याग करके अच्छे कर्म व अच्छे विचार में लग जाएँ ताकि अच्छाई गहरी स्थिर हो जाये ।
  • अच्छाई गहरी स्थिर हो जाएगी तो व्यक्ति के स्वभाव में, व्यक्ति के मति में, व्यक्ति के गति में सुख, शांति, आयु, आरोग्य और पुष्टि मिलेगी । अगर गंदगी स्थिर हो जाएगी, तमोगुण, रजोगुण स्थिर हो जाएगा तो व्यक्ति के जीवन में चिंता, शौक, भय, विकार और व्यग्रता घुस जाएगी ।

ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें ?
Do's and Don'ts During Chandra Grahan 2021

Chandra Grahan me Kya Nahi Karna Chahiye [Dont's on Lunar Eclipse 2021]

  • ग्रहण के समय अगर कोई निद्रा कर लेता है तो तमस बढ़ने से रोग बढ़ जाएगा । ग्रहण के समय कोई संभोग करता है तो उसको सूकर की योनि मिलनी है बिल्कुल पक्की बात है क्योंकि काम-विकार का भाव गहरा हो जाएगा ।
  • ग्रहण के समय भोजन करेगा तो कुष्ठ रोग होने की संभावना बढ़ जाती है । मालिश करेगा तो कुष्ठ रोग होने की संभावना बढ़ जाएगी ।
  • ग्रहण के समय आप जो करोगे, वो गहरा स्थिर हो जाएगा । तो ग्रहण के समय जो सेक्स-संभोग करता है तो उसकी काम वासना गहरी होने के कारण दूसरा जन्म काम-वासना की तृप्ति करने वाला सूकर, बकरे आदि का मिलता है ।
  • अगर ग्रहण के पहले पानी खूब पिया है और ग्रहण के समय पेशाब करेगा तो दरिद्रता का आना सुनिश्चित हो जाता है । ग्रहण के समय शौच जाना कृमि रोग को जन्म देता है ।
  • ग्रहण के समय किसी जीव-जंतुओं या किसी प्राणी की हत्या हो जाये तो नारकीय योनि में जाना पड़ता है । ग्रहण के समय ठगाई हो जाये तो व्यक्ति को सर्प योनी में जाना पड़ता है ।

Chandra Grahan me Kya karna chahiye [Do's on Lunar Eclipse 2021]

  • चंद्रग्रहण के समय रुद्राक्ष-माला धारण करने से पाप नष्ट हो जाते हैं परंतु फैक्ट्रियों में बनने वाले नकली रुद्राक्ष नहीं, असली रुद्राक्ष हों ।
  • पूज्य बापूजी ने कई बार सत्संगों में कहा है कि जो ग्रहणकाल में उसके नियम-पालन कर जप साधना करते हैं, वे न केवल ग्रहण के दुष्प्रभावों से बच जाते हैं बल्कि महान पुण्यलाभ भी प्राप्त करते हैं ।
  • ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है ।
  • ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है । ग्रहण के समय दीक्षा अथवा दीक्षा लिए हुए मंत्र का जप करने से सिद्धि हो जाती है । तो स्वास्थ्य-मंत्र जप लेना, ब्रह्मचर्य का मंत्र भी सिद्ध कर लेना ।
  • भगवान वेदव्यासजी कहते हैं – “सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगा-जल पास में हो तो एक करोड़ गुना फल होता है ।”
  • जब तक ग्रहण आँखों से दिखाई देता है तब तक की अवधि पुण्यकाल कही जाती है ।
  • ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है । ग्रहण को बिल्कुल ना देखें व बाहर ना निकलें ।
  • ग्रहण में अगर सावधानी रही तो थोड़े ही समय में बहुत पुण्यमय, सुखमय जीवन होगा अगर असावधानी हुई तो थोड़ी ही असावधानी से बड़े दंडित हो जायेंगे, दुःखी हो जायेंगे ।

खाद्य पदार्थ दूषित होने से ऐसे बचायें
Chandra Grahan Sutak se Pehle Kya Kare ?

  • ग्रहण के पहले का बनाया हुआ अन्न ग्रहण बाद त्याग देना चाहिए लेकिन ग्रहण से पूर्व रखा हुआ दही या उबाला हुआ दूध तथा दूध, छाछ, घी या तेल इनमें से किसी में सिद्ध किया हुआ अर्थात् ठीक से पकाया हुआ अन्न (पूड़ी आदि) ग्रहण के बाद भी सेवनीय है परंतु ग्रहण के पूर्व इनमें कुशा डालना जरूरी है ।
  • सूतक से पहले पानी में कुशा, तिल या तुलसी-पत्र डाल के रखें ताकि सूतक काल में उसे उपयोग में ला सकें । ग्रहणकाल में रखे गए पानी का उपयोग ग्रहण के बाद नहीं करना चाहिए किंतु जिन्हें यह सम्भव न हो वे उपरोक्तानुसार कुशा आदि डालकर रखे पानी को उपयोग में ला सकते हैं, ऐसा कुछ जानकारों का कहना है ।
  • ग्रहण का कुप्रभाव वस्तुओं पर न पड़े इसलिए मुख्यरूप से कुशा का उपयोग होता है । इससे पदार्थ अपवित्र होने से बचते हैं । कुशा नहीं है तो तिल डालें । इससे भी वस्तुओं पर सूक्ष्म-सूक्ष्मतम आभाओं का प्रभाव कुंठित हो जाता है । तुलसी के पत्ते डालने से भी यह लाभ मिलता है किंतु दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें ।

Chandra Grahan 26 May 2021 Time in India [In All States]

भारत के पूर्व भाग के कुछ प्रमुख स्थानों के चन्द्रोदय के समय

स्थान
ग्रहण प्रारंभ (शाम)
ग्रहण समाप्ति (शाम)
Kolkata
6:15 से
6:23 तक
Guwahati
6:08 से
6:23 तक
Jorhat (Assam)
5:59 से
6:23 तक
Dibrugarh
5:58 से
6:23 तक
Silchar (Assam)
6:00 से
6:23 तक
Shillongg
6:06 से
6:23 तक
Dimapur (Nagaland)
5:59 से
6:23 तक
Tezu (Arunachal Pradesh)
5:53 से
6:23 तक
Itanagar
6:02 से
6:23 तक
Agartala
6:06 से
6:23 तक
Imphal
5:56 से
6:23 तक
स्थान ( विदेशों में )
ग्रहण प्रारंभ
ग्रहण समाप्ति
Hong Kong
7:00 PM से
8:52 PM तक
Jakarta (Indonesia)
5:43 PM से
7:52 PM तक
Taipei (Taiwan)
6:35 PM से
8:52 PM तक
San Jose (California, USA)
2:45 PM से
5:52 PM तक
Singapore
7:08 PM से
8:52 PM तक
Chicago (USA)
4:45 AM से
5:22 AM तक
Washington (USA)
5:45 AM से
6:23 AM तक
Bangkok (Thailand)
6:42 PM से
7:52 PM तक

टिप्पणी : विदेश के स्थानों के समय स्थानीय समयानुसार

Grahan Special 3:30 Hour Non-Stop Kirtan

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3.30 घंटे का Non-Stop वीडियो कीर्तन डाउनलोड करें

Pujya Bapuji Message on Chandra Grahan 2021

  • ग्रहण के समय भगवद चिंतन, भगवद ध्यान और भगवद ज्ञान हो तो वो व्यक्ति सहज में ही भगवद लोक पाता है । भगवद धाम को पाता है, भगवद रस को पाता है । ग्रहण के समय अगर भगवद विरह पैदा होता है तो पक्की बात है कि वो भगवान को पाने में बिल्कुल पक्का है । उसने भगवान को पा लिया समझो । लेकिन ग्रहण के समय चिंता है तो बुद्धि नाश होता है ये पक्का समझ लेना ।

वैसे ही कई बार पक्का करा चुके हैं सत्संग में :-

“चिंता से चतुराई घटे, घटे रूप और ज्ञान ।
चिंता बड़ी अभागिनी, चिंता चिता समान ।”

“तुलसी भरोसे राम के, निश्चित होके सोए,
अनहोनी होनी नहीं, होनी होए सो होए ।”

ग्रहण में रखें विशेष सावधानी
Precautions during Chandra Grahan 2021

  • ग्रहण का प्रभाव हृदय पर पड़ता है । इसलिए ग्रहण के समय ऐसा कोई कर्म न करें, ऐसा कोई खान-पान न करें, ऐसा कोई चिंतन न करें जिससे हमारा हृदय कमजोर रह जाए। सावधान न रहे तो फिर हृदय की समस्या चालू हो जायेगी । अतः ॐकार-संयुक्त गुरुमंत्र का जप करके हृदय मजबूत बनाना चाहिए । दानकर्म, शुभ कर्म आदि करना चाहिए ।
  • राजस्थान के खंडेला का एक नास्तिक पंडित था । वह पंडिताई तो करता था लेकिन पाश्चात्य जगत की पुस्तकें पढ़कर अपने हिन्दू धर्म की बातों को भीतर से कल्पना मानने की भूल करता था । उसके यजमान की पत्नी गर्भवती थी । ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए और गर्भवती को तो ग्रहण के समय खास सावधान रहना चाहिए ।
  • पंडित अंग्रेजी पढ़ा था, उसने कहा कि “हम ये सब बातें नहीं मानते हैं ।” पंडित ने उस यजमान की गर्भवती स्त्री को बोला: “ग्रहण के समय भरपेट खाओ, हलवा-पूड़ी खाओ, साग खाओ, देखें क्या होता है !”
  • यजमान की पत्नी ने ग्रहण के समय ऐसा किया । परिणाम यह आया कि उसको लूला-लँगड़ा और विक्षिप्त बालक पैदा हुआ ।

Chandra Grahan Ke Baad Kya Karna Chahiye

  • ग्रहण काल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी पहने हुए वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए ।
  • आसन, गोमुखी व मंदिर में बिछा हुआ कपड़ा भी धो दें । और दूषित ओरा के शुद्धिकरण हेतु गोमूत्र या गंगाजल का छिड़काव पूरे घर में कर सकें तो अच्छा है ।
  • ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए । ग्रहण के स्नान में गरम की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडा जल में भी दूसरे के हाथ से निकले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकला हुआ, निकले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा समुद्र का जल पवित्र माना जाता है । (नदी का पानी शुद्ध हो जो आजकल शहरों में नदी का पानी प्रदूषित होता है वो नुकसान कारक है, इसमें स्नान न करें। )
  • ग्रहण के बाद स्नान करके खाद्य वस्तुओं में डाले गये कुश एवं तुलसी को निकाल देना चाहिए ।
  • सूर्य या चन्द्र जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए ।

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Some FAQ’s for Lunar Eclipse 2021 [Chandra Grahan] शंका समाधान

ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है ।
चन्द्रग्रहण में 3 प्रहर (9 घंटे) पहले से सूतक माना जाता है । इस समय सशक्त व्यक्तियों को भोजन छोड़ देना चाहिए । इससे आयु, आरोग्य, बुद्धि की विलक्षणता बनी रहेगी । लेकिन जो बालक, बूढ़े, बीमार व गर्भवती स्त्रियाँ हैं वे ग्रहण से 1 से 1.5 प्रहर (3 से 4.5 घंटे) पहले तक चुपचाप कुछ खा-पी लें तो चल सकता है ।
  • ग्रहणकाल में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी पहने हुए वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए ।
  • आसन, गोमुखी व मंदिर में बिछा हुआ कपड़ा भी धो दें । और दूषित औरा के शुद्धिकरण हेतु गोमूत्र या गंगाजल का छिड़काव पूरे घर में कर सकें तो अच्छा है ।
सूतक लगने से पहले भोजन कर लीजिए उसके बाद कोई भी स्वस्थ व्यक्ति (बच्चे,बुढ़े, गर्भिणी स्त्रियों व रोगियों को छोड़कर) भोजन नहीं करें ।
सूर्यग्रहण में खाना नहीं बनाना चाहिए ।

ग्रहण के समय नहीं सोना चाहिए , जो नींद करता है उसको रोग जरूर पकड़ेगा, उसकी रोगप्रतिकारकता का गला घुटेगा ।

सूतक से पहले ही तुलसी पत्र कुशा आदि तोड़कर रख लें (अनाज, खाद्य पदार्थों में रखने हेतु) ,
ध्यान रखें कि दूध में कभी भी तुलसी पत्र नहीं डाला जाता ।

नोट : रविवार को तुलसी न तोड़ सकते हैं न खा सकते हैं ।

नोट : अमावस्या को भी किसी वृक्ष से फल फूल पत्र आदि तोड़े नहीं जाते हैं ।

ग्रहण काल अथवा सूतक काल में जल नहीं चढ़ाना है ।

ग्रहण काल अथवा सूतक काल में जल नहीं चढ़ाना है ।

जानने के लिए देखें : Click Here

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गर्भिणी पर ग्रहण का क्या प्रभाव पड़ता है । विस्तृत में जाने : Click Here

चन्द्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आने पर चंद्रग्रहण होता है ।
चन्द्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आती है तब चन्द्रग्रहण होता है ।
खग्रास एवं खंडग्रास चन्द्रग्रहण (26 मई 2021)
2021 का पहला चन्द्र ग्रहण 26 मई को है ।

देखें इस Video में : Click Here

ग्रहण के समय लघुशंका करने से दरिद्र व मल त्यागने से कीड़ा होता है ।
नहीं, ग्रहण के समय सोने से रोगी हो जाता है ।
चंद्र ग्रहण में 6 घंटे पूर्व से भोजन करना वर्जीत है ।
योगासन नहीं करके हमें ग्रहणकाल में जप करना चाहिए ।
सो सकते हैं लेकिन चूंकि सोकर तुरंत उठने के बाद जल-पान, लघुशंका-शौच आदि की स्वाभाविक प्रवृत्ति की आवश्यकता पड़ती है अतः ग्रहण प्रारम्भ होने के करीब 4 घंटें पहले उठ जाना चाहिए जिससे लघुशंका-शौच आदि की आवश्यकता होने पर इनसे निवृत्त हो सके और ग्रहणकाल में समस्या न आये ।
बिल्कुल नहीं । नारद पुराण के अनुसार – ‘‘चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के दिन, उत्तरायण और दक्षिणायन प्रारम्भ होने के दिन कभी अध्ययन न करे । अनध्याय (न पढ़ने के दिनों में) के इन सब समयों में जो अध्ययन करते हैं, उन मूढ़ पुरुषों की संतति, बुद्धि, यश, लक्ष्मी, आयु, बल तथा आरोग्य का साक्षात् यमराज नाश करते हैं ।’’

सूतक लगने से पहले ही पानी में कुशा आदि डाल दें जिससे सूतक के कारण पानी अशुद्ध न हो ।
सुबह पानी पी लीजिये, क्योंकि 2 घण्टे के अंदर अंदर यह पानी पसीने व लघुशंका आदि के द्वारा शरीर से बाहर चला जायेगा ।

ग्रहण के समय पूजा की जगह पर गंगाजल आदि रख लेने से जप का फल भी कई गुना ज्यादा मिलता है ।
इसमें अलग-अलग विचारकों का अलग-अलग मत है । कुछ जानकार लोगों का कहना है कि चूंकि सूतक का समय-अवधि अधिक होने से 12 घंटें का सूतक एवं लगभग 3.5 घंटें ग्रहण का समय टोटल 15.5 घंटें बिना जल-पान का रहना सामान्य तौर पर सबके लिए सम्भव नहीं है अतः सूतक काल में सूतक लगने के पूर्व जल में तिल या कुशा डालकर रखना चाहिए और सूतक के दौरान प्यास लगने पर वही जल पीना चाहिए । इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जल-पान के बाद 2 से 4 घंटों के अंदर लघुशंका (पेशाब) की प्रवृत्ति होती है अतः ग्रहण प्रारम्भ होने के 4 घंटे पूर्व से जलपान करने से भी बचना चाहिए नहीं तो ग्रहण के दौरान समस्या आती है ।
ग्रहणकाल पूरा होने पर स्नान आदि से शुद्ध होने के बाद 6 से 12 ग्राम घृत का सेवन करके ऊपर से गर्मपानी पी लेना चाहिए । शेष बचा ब्राह्मी घृत प्रतिदिन सुबह खाली पेट इसी विधि से 6 से 12 ग्राम ले सकते हैं ।
ग्रहणकाल पूरा होने पर स्नान आदि से शुद्ध होने के बाद 6 से 12 ग्राम घृत का सेवन करके ऊपर से गर्मपानी पी लेना चाहिए । शेष बचा ब्राह्मी घृत प्रतिदिन सुबह खाली पेट इसी विधि से 6 से 12 ग्राम ले सकते हैं ।
हाँ, जो व्यक्ति ग्रहणकाल में जितने दाने अन्न के खाता है उतने वर्ष ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है ।
ग्रहणकाल में पकाया गया या बचा हुआ भोजन दूषित हो जाता है ।
ग्रहण के समय बाहर न जायें न ही ग्रहण को देखें ।
नहीं, ग्रहण के पश्च्यात करना चाहिए ।
हाँ, वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए ।
नहीं, सूतक काल लगने के बाद से ही कुछ खाना-पीना वर्जीत है ।
ग्रहण में चंद्र या सूर्य की किरणों का प्रभाव कुछ समय के लिए बंद हो जाता है और ग्रहण में चंद्र के दर्शन वर्जीत हैं ।
मांसाहार करना जानलेवा बीमारियों को आमंत्रण देना है ।
जरूरी नहीं, पर ध्यान रहें कि ग्रहण के समय जिसका ग्रहण हो उसे ना देखें ।
लैपटॉप, कंप्यूटर या अन्य पर कोई भी काम करना वर्जीत है ।
ग्रहणकाल के दौरान मोबाइल का उपयोग आंखों के लिए अधिक हानिकारक है ।
हाँ, साथ ही अधिक से अधिक जप करना चाहिए ।
हाँ, धूप अगरबत्ती भी लगा सकते है ।
ग्रहण के समय तेल-मालिश करने या उबटन लगाने से कुष्ठरोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।