Teacher’s Day 2020 Special : A Guru Sishya Story in Hindi

shiksha lokopayogi honi chahiye

गुरुकुल के आचार्य ने तीन शिष्यों से कहा : “तुम्हारी शिक्षा पूरी हो गयी । अब तुम लोग जा सकते हो ।”
बिना परीक्षा लिए ही शिक्षा पूरी होने की बात से शिष्यों को आश्चर्य तो हुआ, फिर भी आचार्य को प्रणाम कर वे तीनों घर के लिए चल दिए । थोड़ी दूर चलने पर मार्ग में उन्हें काँटे बिखरे मिले ।

एक शिष्य ने कहा :”हमें इन काँटों से बचकर चलना चाहिए” और वह धीरे-धीरे बचता हुआ पार हो गया ।

दूसरा शिष्य अच्छा खिलाड़ी था । वह कूदता-फांदता काँटों से पार हो गया ।

तीसरे ने सोचा,”मैं भी इनकी तरह काँटों से पार हो सकता हूँ परन्तु ये कांटें यहाँ पड़े रहे तो आने-जाने वालों को कष्ट होगा, उन्हें परेशानी होगी । इन काँटों को हटाकर मार्ग साफ कर देना अपना कर्तव्य है ।”

उसने अपना सामान एक ओर रखा और काँटों को हटाने लगा । उसके हाथों में भी कुछ काँटें चुभे पर वह लगा रहा ।

उसके दोनों साथी कहने लगे :”क्यों परेशान हो रहे हो ? बचकर निकल आओ ।”

किंतु वह उन दोनों की बात अनसुनी कर कांटें हटाने में लगा रहा और पूरे काँटे हटाकर ही रुका ।

आचार्य झाड़ियों के पीछे से उनकी बातें सुन रहे थे । वे सामने आ गये और बोले :”मैनें ही परीक्षा लेने के लिए ये काँटें रास्ते में बिछाये थे । तुम दोनों परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो, यह उत्तीर्ण है । तुम दोनों की शिक्षा अभी पूरी नहीं हुई है ।”

तीसरे शिष्य को आचार्य ने आशीर्वाद देकर विदा किया । पहले दो शिष्यों को अभी और शिक्षा की आवश्यकता बतायी।

📚लोक कल्याण सेतु/जून-जुलाई २००७/अंक-१२०

परीक्षा है नजदीक आई, जानो कैसे करें पढ़ाई | Exam Tips

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परीक्षा के दिनों में जो विद्यार्थी अधीर, चिंतित और परेशान रहते हैं, वे सालभर मेहनत करने के बाद भी अच्छे अंकों से पास नहीं हो पाते । नीचे दी गयी बातों का ध्यान रखकर पढ़ाई करने से सफलता पाने में मदद मिलेगी :

(१) समय नियोजन करें । कब क्या करना – इसका नियोजन करने से सब व्यवस्थित होता है । इसके लिए विद्यार्थी जप, त्राटक, पढ़ाई, भोजन, नींद आदि का समय निश्चित करके समय सारणी बना लें । रात को देर तक न जाग के सुबह जल्दी उठकर पढ़ें । इसके साथ ही पाठयक्रम के अनुसार प्राथमिकता तय करें जिससे सभी विषयों का अध्ययन हो सके । सुनियोजित कार्य सफलता की कुंजी है।

(२) पढ़ने बैठने से पूर्व अपने सद्गुरुदेव तथा विद्या की देवी माँ सरस्वती की प्रार्थना करें ।

(३) कमर सीधी करके पढ़ें, पढ़ते समय जीभ तालु में लगाकर पढ़ने से जल्दी याद होता है और लम्बे समय तक याद रहता है ।

(४) सूत्रात्मक ढंग से याद करें । महत्त्वपूर्ण एवं जटिल विषयों को बिन्दुओं के रूप में (Point Wise) याद करने से जल्दी याद होता है । इस प्रकार लिखने से शिक्षक भी अच्छे अंक देते हैं ।

(५) विषय को समझकर याद करें, रट्टा लगाकर नहीं । समझकर याद किया हुआ बहुत दिनों तक याद रहता है । विषय के मूल सिद्धांत या सार बात को ध्यान में रखें ।

(६) कठिन विषयों को रिकॉर्ड करके ध्यान से सुनें, यह भी याद करने का एक अच्छा तरीका है ।

(७) जो पाठ याद किया है, उसके बारे में स्वयं अलग-अलग ढंग से कई प्रश्न बनायें, इससे पाठ सहज में याद हो जाता है ।

(८) लेखन की गति तेज व अक्षरों की बनावट अच्छी हो, ऐसा अभ्यास बनाये रखें ।

(९) थकावट महसूस हो तो खुली हवा में घूमें, थोड़ा कूदें-फाँदें अथवा भगवन्नाम का जप करें या कोई शारीरिक कार्य कर लें । इससे थकावट दूर हो जायेगी और फिर नये उत्साह से पढ़ाई में मन लगेगा ।

(१०) घबराहट महसूस हो तो खुली हवा में जाकर देव-मानव हास्य प्रयोग करें । ५- १० मिनट हरि ॐ का गुंजन करें । गुरुकृपा-भगवत्कृपा पर भरोसा रखकर पुरुषार्थ करें । इससे सकारात्मक विचारों का उदय होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और घबराहट चली जाती है ।

(११) नियमित रूप से गुरुदेव के श्रीचित्र पर १०-१५ मिनट त्राटक, भ्रामरी प्राणायाम, सारस्वत्य मंत्र का जप, सूर्य को अर्घ्य देने का नियम न छोड़ें ।

~गुरुकुल दर्पण

बच्चे का मन पढ़ाई में न लगे तो क्या करें ?

यदि आपके बच्चे पढ़ाई में ध्यान न देते हों, आलसी अथवा चंचल हों और आप चाहते हैं कि वे पढ़ाई में ध्यान दें तो क्या करें ???

डाँटने,फटकारने,मारने से काम नहीं चलेगा। बेटे,बेटी को ज्यादा डांटे-फटकारें तो वे सोचते हैं कि ‘ये तो मुझे डाँटते ही रहते हैं!’

इसके लिए एक छोटा-सा प्रयोग है :
अशोक वृक्ष के तीन-तीन पत्तों से चित्रानुसार बंदनवार (तोरण) बनाकर बच्चे के कमरे के दरवाजे की चौखट पर गुरुवार के दिन बाँध दें और संकल्प करें कि “मेरे बच्चे का मन पढ़ाई में लगे।”

अगले गुरुवार को पहले वाले उतार के ताजे पत्तों की नयी बंदनवार लगा दें।

फिर तीसरे गुरुवार भी ऐसा करें। इस प्रकार तीन गुरुवार के बाद एक गुरुवार छोड़ दें। तीन-तीन करके कुल नौ गुरुवार तक यह प्रयोग करें। इससे लाभ होगा।

–श्री सुरेशानन्दजी के सत्संग प्रवचन से

परीक्षा में सफलता कैसे पाये? | Exam Success Tips hindi

Exam Success Tips in Hindi

Exam Success Tips in Hindi

किसीने कहा है:

अगर तुम ठान लो, तारे गगन के तोड़ सकते हो। 
अगर तुम ठान लो, तूफान का मुख मोड़ सकते हो।।

➠ यहाँ कहने का तात्पर्य यही है कि जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं जिसे मानव न कर सके । जीवन में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो।

➠ जीवन में संयम, सदाचार, प्रेम ,सहिष्णुता ,निर्भयता, पवित्रता, दॄढ़ आत्मविश्वास और उत्तम संग हो तो विद्यार्थी के लिए अपना लक्ष्य प्राप्त करना आसान हो जाता है।

यदि विद्यार्थी बौद्धिक-विकास के कुछ प्रयोगों को समझ ले, जैसे कि सूर्य को अर्घ्य देना, भ्रामरी प्राणायाम करना, तुलसी के पत्तों का सेवन, त्राटक करना, सारस्वत्य मंत्र का जाप  करना आदि-तो  परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होना विद्यार्थियों के लिए आसान हो जायेगा ।

➠ विद्यार्थी को चाहिए कि रोज सुबह सूर्योदय से पहले  उठकर सबसे पहले अपने इष्ट का, गुरु का स्मरण करे । फिर स्नानादि करके अपने पूजाकक्ष में बैठकर गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा सारस्वत्य मंत्र का जाप  करे । अपने  गुरु या इष्ट की मूर्ति की ओर एकटक निहारते  हुए त्राटक करे । अपने  श्वासोच्छ्वास की गति  पर ध्यान देते हुए मन को एकाग्र करे । भ्रामरी प्राणायाम करे जो ‘विद्यार्थी तेजस्वी तालीम शिविर’ में सिखाया जाता है ।

प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दे एवं तुलसी के ५-७ पत्तों को चबाकर २-४ घूँट पानी पिये।

➠ रात को देर तक न पढ़े वरन्‌ सुबह जल्दी उठकर उपरोक्त नियमों को करके अध्ययन करे तो इससे पढा हुआ शीघ्र याद हो जाता है । 

➠ जब  परीक्षा देने जाय तो तनाव-चिंता से युक्त होकर नहीं वरन्‌ इष्ट-गुरु का स्मरण करके, प्रसन्न होकर जाये। 
परिक्षा भवन में भी जब तक प्रश्नपत्र हाथ में नहीं आता तब तक शांत एवं स्वस्थ चित्त होकर प्रसन्नता को  बनाए रखे ।

➠ प्रश्नपत्र हाथ में आने पर उसे एक बार पूरा पढ लेना चाहीए एवं जो प्रश्न आता है उसे पहले करे। ऐसा नहीं की जो नहीं आता उसे देखकर घबरा जाये । घबराने से तो जो प्रश्न आता है वह भी भूल जाएगा।

➠ जो प्रश्न आते हैं उन्हें हल करने के बाद जो नहीं आते उनकी ओर ध्यान दे । अंदर दृढ़ विश्वास रखे कि मुझे ये भी आ जायेंगे। अंदर से निर्भय रहे एवं भगवत्स्मरण करके एकाध मिनट शान्त हो जाये, फिर लिखना शुरू करे। धीरे-धीरे उन प्रश्नों के उत्तर भी मिल जायेंगे ।

➠ मुख्य बात यह है कि किसी भी कीमत पर धैर्य न खोये। निर्भयता एवं दृढ़ आत्मविश्वास बनाये रखे ।

➠ विद्यार्थियों को अपने जीवन को सदैव बुरे संग से बचाना चाहिए । न तो वह स्वयं धूम्रपानादि करे न ही ऐसे मित्रों का संग करे । व्यसनों से मनुष्य की स्मरणशक्ति पर बड़ा खराब प्रभाव पड़ता है।

➠ व्यसन की तरह चलचित्र भी विद्यार्थी की जीवन-शक्ति को क्षीण कर देते है। आँखों की रोशनी को कम करने के साथ ही मन एवं दिमाग को भी कुप्रभावित करनेवाले चलचित्रों से विद्यार्थियों को सदैव सावधान रहना चाहिए। आँखों द्वारा बुरे दृश्य अंदर घुस जाते हैं एवं वे मन को भी कुपथ पर ले जाते हैं। इसकी अपेक्षा तो सत्संग में जाना, सत्काशास्त्रों का अध्ययन करना अनंतगुना हितकारी है।

➠ यदि  विद्यार्थी ने अपना विद्यार्थी जीवन सँभाल लिया तो उसका भावी जीवन भी सँभल जाता है क्योँकि विद्यार्थी जीवन ही भावी जीवन की आधारशिला है । विद्यार्थीकाल में वह जितना संयमी, सदाचारी, निर्भय एवं सहिष्णु होगा, बुरे संग एवं व्यसनों का त्याग कर सत्संग का आश्रय लेगा, प्राणायाम-आसनादी को सुचारु रूप से करेगा उतना ही उसका जीवन समुन्नत होगा।

➠  यदि नींव सुदृढ़ होती है तो उस पर बना विशाल भवन भी दृढ़ एवं स्थायी होता है । विद्यार्थीकाल मानव-जीवन की नींव के समान है अत: उसको सुदृढ़  बनाना चाहिए।

➠ इन बातों को समझकर उन पर अमल किया जाय तो केवल लौकिक शिक्षा में ही सफलता प्राप्त होगी ऐसी बात नहीं है वरन्‌ जीवन की हर परीक्षा में विद्यार्थी सफल हो सकता है।

➠ हे  विद्यार्थी उठो.…जागो…कमर कसो। दृढ़ता एवं निर्भयता से जुट पड़ो। बुरे संग एवं व्यसनों  त्यागकर, संतों-सद्‌गुरुओं के मार्गदर्शन के अनुसार चल  पड़ो …सफलता तुम्हारे चरण चूमेगी।

धन्य हैं वे लोग जिनमें ये छ: गुण  हैं ! अंतर्यामी देव सदैव उनकी सहायता करते  हैं :

उद्यम: साहसं धैर्यं बुद्धि शक्ति: पराक्रम:।
षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देव: सहायकृत्‌।।

➠ “उद्योग , साहस , धैर्य , बुद्धि , शक्ति और पराक्रम- ये  छ: गुण जिस व्यक्ति के जीवन में हैं, देव उसकी सहायता करते हैं।”