➠ एकनाथ जी महाराज श्राद्धकर्म कर रहे थे। उनके यहाँ स्वादिष्ट व्यंजन बन रहे थे। भिखमंगे लोग उनके द्वार से गुजरे। उन्हें बड़ी लिज्जतदार खुश्बू आयी। वे आपस में चर्चा करने लगेः “आज तो श्राद्ध
Sant Eknath Ji Maharaj Aur Bhagwan Sewa me unki; Story in Hindi/ Marathi आज हम जानेंगे ~ ईश्वर भी ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों की सेवा करने के लिए लालायित रहते हैं….. संत एकनाथ जी के पास एक अनजान