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Category: Sewa

Ram Krishna Paramhans Story from his Biography in Hindi

Ram Krishna Paramhans Story from his Biography in Hindi

Ram Krishna Paramhans Story from his Biography in Hindi “संसार की फुलवारी में अपने शरीर को खाद बना दो । यही सेवा है, और किस काम आयेगा रे शरीर ?” एक दिन श्री रामकृष्ण परमहंसजी

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A Short Motivational Story of Ramanujan's Son in Hindi

A Short Motivational Story of Ramanujan’s Son in Hindi

Srinivasa Ramanujan Story in Hindi For Kids: चेन्नई निवासी रामानुजम ने अपने पुत्र को पैसे देकर फल लाने के लिए बाजार भेजा । लड़का पैसे लेकर बाजार की ओर चल दिया । रास्ते में वह

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mehnat, parishram ka fal

परिश्रम-का-महत्त्व | Parishram ka fal – Swami Nityananda ji

निरन्तर परिश्रम (Parishram) करते रहने का संदेश देती हुई यह कहानी बच्चों को जरूर सुनाएँ। एक दिन अपने शिष्यों की परीक्षा लेने की इच्छा से महात्मा नित्यानंदजी (Swami Nityananda ji) ने अपने सभी शिष्यों को

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परोपकार का बदला

उसी में इनका ट्यूमर निकल गया है । अब ये बिल्कुल ठीक हैं । ऑपरेशन की जरूरत नहीं है ।
एक सत्य घटना है ।
एक शिक्षक के पेट में ट्यूमर (गाँठ) हो गया । उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया गया । अगले दिन ऑपरेशन होना था । वे जिस वॉर्ड में थे उसमें एक रोगी की मृत्यु हुई । उसकी पत्नी विलाप करने लगी : ‘अब मैं क्या करूँ, इनको कैसे गाँव ले जाऊँ ? मेरे पास पैसे भी नहीं हैं… कैसे इनका क्रियाकर्म होगा ?’

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सेवा की सुवास

उड़ीसा में कटक है। एक बार वहाँ प्लेग फैला। मच्छर और गंदगी के कारण लोग बहुत दुःखी थे। उड़िया बाजार में भी प्लेग फैला था। केवल बापूपाड़ा इससे बचा था। बापूपाड़ा में बहुत सारे वकील लोग, समझदार लोग रहते थे। वे घर के आँगन व आसपास में गंदगी नहीं रहने देते थे। वहाँ के कुछ लड़कों ने सेवा के लिए एक दल बनाया, जिसमें कोई 10 साल का था तो कोई 11 का, कोई 15 का तो कोई 18 साल का था। उस दल का मुखिया था एक 12 साल का किशोर।

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परदुःखकातरता के साक्षात विग्रह

महानिर्वाणी अखाड़ा (मेहसाणा,गुजरात) के महंत श्री रामगिरि महाराज परदुःखकातरता के साक्षात विग्रह पूज्य बापूजी के सान्निध्य में बीते सुनहरे पलों की स्मृतियाँ ताजी करते हुए कहते हैं : “पूज्य बापूजी रात को अक्सर देखते थे कि कहीं किसी को तकलीफ तो नहीं है। जो टॉर्चवाली बात टी वी पर दिखाते हैं न,कि बापूजी के पास में टॉर्च होती है, उनको पता नहीं हैं कि टॉर्च क्यों रखते थे बापूजी। आज मैं बताता हूँ टॉर्च क्यों रखते थे बापूजी।

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