महानिर्वाणी अखाड़ा (मेहसाणा,गुजरात) के महंत श्री रामगिरि महाराज परदुःखकातरता के साक्षात विग्रह पूज्य बापूजी के सान्निध्य में बीते सुनहरे पलों की स्मृतियाँ ताजी करते हुए कहते हैं : “पूज्य बापूजी रात को अक्सर देखते थे कि कहीं किसी को तकलीफ तो नहीं है। जो टॉर्चवाली बात टी वी पर दिखाते हैं न,कि बापूजी के पास में टॉर्च होती है, उनको पता नहीं हैं कि टॉर्च क्यों रखते थे बापूजी। आज मैं बताता हूँ टॉर्च क्यों रखते थे बापूजी।

आज से कई साल पहले मैं अहमदाबाद आश्रम में सोया हुआ था। रात के करीब ढाई बजे बापूजी आये और उन्होंने टॉर्च से लाइट मारी। पता चल गया कि यह रोशनी बापूजी की टॉर्च है। आँखें बंद कर लीं मैने । वहाँ अंदर साधक सो हुए थे। ठंड का मौसम था । एक भाई ने कुछ ओढा नहीं था, उसको ठंड लग रही थी। बापूजी ने उसको देखा और चले गये। ५ मिनट बाद वापस आये। उनके हाथ में कम्बल था और बापूजी ने अपने हाथों से उस साधक को कम्बल ओढ़ाया।

५-६ दिन के बाद मैंने उस लड़के से पूछा ”तुम्हें उस रात को ठंडी लग रही थी तो कम्बल किसने ओढ़ाया था पता है?” बोला ”नहीं। “

मैंने बोला : ”वह कम्बल बापूजी ने ओढाया था।”

”आपको कैसे पता ?”

“जब बापूजी आये थे उस समय मैं लेटा तो था परंतु जग रहा था और मैंने अपनी आँखों से देखी बापूजी की करुणा-कृपा।

ऐसे हैं मेरे गुरुदेव! ऐसे-ऐसे सेवा करते हैं कि एक हाथ से दिया तो दूसरे हाथ को पता नहीं चले।

ऐसे ही बापूजी कभी रास्ते में भीग रहे किसी राही को अपना छाता तो किसी जरूरतमंद अपनी ओढ़ी हुई धोती दे देते हैं। एक बार गरीब मजदूरों को तपती धूप में साइकिल पर डबल सीट जाते देखा तो उन लोगों में साइकिलें और टोपियाँ बँटवा दीं । खेत में सुबह से तपती धूप में काम करने वाले किसानों को ठंडा खाना खाते देख द्रवित हो गर्म भोजन के डिब्बे बँटवा दिये और पिछले

कई सालों से बँटवाते आ रहे हैं।

कभी महसूस ही नहीं हो पाता कि वे जो कर रहे हैं, किसी अन्य व्यक्ति के लिए कर रहे हैं। ऐसे महापुरुष की करुणा-कृपा का कितना-कितना बखान किया

जाय! ऐसे में वाणी भी साथ छोड़ देती है तो कलम कितना साथ देगी!!

परदुःखकातरता के साक्षात् विग्रह आत्मनिष्ठ पूज्य बापूजी बताते हैं : ”लोग प्रायः जिनसे घृणा करते हैं ऐसे निर्धन,रोगी इत्यादि को साक्षात ईश्वर समझकर उनकी सेवा करना यह अनन्य भक्ति एवं आत्मज्ञान का वास्तविक स्वरूप है।”

और इसी सिद्धांत पर पूज्य श्री स्वयं चलते हैं और अपने अनुयायियों को भी चलने की सीख देते हैं।

ऋषि प्रसाद/दिसम्बर २०१४/२६४

3 Comments

  1. हां जी मेरे बापू आसाराम जी को अनंत कोटि कोटि नमन
    मेरे बापू ने मेरे जीवन को सफल बनाया है
    वे करुणवरुणालय हैं वे करुणा के सागर हैं
    वो सबका कल्याण चाहते हैं
    करते हैं

  2. Thanks for your Valuable Comment @Dashrat Lal Ji.
    Hope you liked it also Please Share this article with your friends, Family via Whatsapp, Facebook.

    HariOm

  3. Bapuji Jesa koi v Nahi aseem Sakti ka khjana hai aadhyatmik uchaiyon ko Dene bale Param Dani hai, aese Sant ke baare me na Kabhi suna hoga na Dekha hoga bapuji adbhut hai sakchat Bram hai


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