Labh Panchami 2020: Significance, Date, Puja, Muhurat, Mantras

Labh pancham

Importance of Labh Pancham & Labh Panchami 2020 Puja, Muhurat Timings & Mantras for Wealth & Health.

Labh Pancham 2020 Date

19th November 2020

लाभपंचमी को भगवान को पाने के पाँच उपाय भी समझ लेना :

1. ‘मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं । मुझे इसी जन्म में भगवत्प्राप्ति करनी है ।’- यह भगवत्प्राप्ति का भाव जितनी मदद करता है, उतना तीव्र लाभ उपवास, व्रत, तीर्थ, यज्ञ से भी नहीं होता । और फिर भगवान के नाते सबकी सेवा करो ।

2. भगवान के श्रीविग्रह को देखकर प्रार्थना करते-करते गदगद होने से हृदय में भगवदाकार वृत्ति बनती है ।

3. सुबह नींद से उठो तो एक हाथ तुम्हारा और एक प्रभु का मानकर बोलो : ‘मेरे प्रभु ! मैं तुम्हारा हूँ और तुम मेरे हो… मेरे हो न… हो न…?’ ऐसा करते हुए जरा एक-दूसरे का हाथ दबाओ और भगवान से वार्तालाप करो । पहले दिन नहीं तो दूसरे दिन, तीसरे दिन, पाँचवें, पंद्रहवें दिन अंतर्यामी परमात्मा तुम पर प्रसन्न हो जायेंगे और आवाज आयेगी कि ‘हाँ भाई ! तू मेरा है ।’ बस, तुम्हारा तो काम हो गया !

4. गोपियों की तरह भगवान का हृदय में आह्वान, चिंतन करो और शबरी की तरह ‘भगवान मुझे मिलेेंगे’ ऐसी दृढ़ निष्ठा रखो ।

5. किसी के लिए अपने हृदय में द्वेष की गाँठ मत बाँधना, बाँधी हो तो लाभपंचमी के पाँच-पाँच अमृतमय उपदेश सुनकर वह गाँठ खोल देना ।
जिसके लिए द्वेष है वह तो मिठाई खाता होगा, हम द्वेष बुद्धि से उसको याद करके अपना हृदय क्यों जलायें ! जहर जिस बोतल में होता है उसका नहीं बिगाड़ता लेकिन द्वेष तो जिस हृदय में होता है उस हृदय का ही सत्यानाश करता है ।

स्वार्थरहित सबका भला चाहें और सबके प्रति भगवान के नाते प्रेमभाव रखें ।

जैसे माँ बच्चे को प्रेम करती है तो उसका मंगल चाहती है, हित चाहती है और मंगल करने का अभिमान नहीं लाती, ऐसा ही अपने हृदय को बनाने से तुम्हारा हृदय भगवान का प्रेमपात्र बन जायेगा ।

हृदय में दया रखनी चाहिए । अपने से छोटे लोग भूल करें तो दयालु होकर उनको समझायें, जिससे उनका पुण्य बढ़े, उनका ज्ञान बढ़े ।

जो दूसरों का पुण्य, ज्ञान बढ़ाते हुए हित करता है वह यशस्वी हो जाता है और उसका भी हित अपने-आप हो जाता है । लाभ-पंचमी के दिन इन बातों को पक्का कर लेना चाहिए ।

धन, सत्ता, पद-प्रतिष्ठा मिल जाना वास्तविक लाभ नहीं है । वास्तविक लाभ तो जीवनदाता से मिलाने वाले सद्गुरु के सत्संग से जीवन जीने की कुंजी पाकर, उसके अनुसार चलके लाभ-हानि, यश-अपयश, विजय-पराजय सबमें सम रहते हुए आत्मस्वरूप में विश्रांति पाने में है ।

– बाल संस्कार केंद्र पाठ्यक्रम, नवम्बर 2020

Pujya BapuJi’s Message (Sandesh) on Shubh Diwali 2020

Bapuji Diwali Nutan Varsh Bhai Dooj Sandesh

दिवाली की रात को छोटे स्वभाव के लोग पटाखे फोड़कर ही खुश हो जाते हैं । उससे तो प्रदूषण बढ़ता है लेकिन जो समझदार हैं वे पटाखे में ही खुश नहीं हो जाते, वे तो प्रीतिपूर्वक भगवान का भजन-सुमिरन करते हैं ।

जो भगवान को प्रीतिपूर्वक भजता है उसको वे बुद्धियोग देते हैं । बुद्धि तो सबके पास है, बुद्धि में भगवत्सुख, भगवत्-शांति का योग देते हैं – ‘समय की धारा को जो जानता है वह चैतन्य आत्मा ‘मैं’ हूँ । सुख-दुःख को, बीमारी-तंदुरुस्ती को जो जानता है वही आत्मा चैतन्य ‘मैं’ हूँ और परमात्मा का अविनाशी अंश हूँ । ॐ ॐ आनंद… ॐ ॐ शांति… ॐ ॐ माधुर्य…’

नूतन वर्ष

वर्ष प्रतिपदा के दिन सत्संग के विचारों को बार-बार विचारना । भगवन्नाम का आश्रय लेना ।

दीपावली की रात्रि को सोते समय यह निश्चय करेंगे कि ‘कल का प्रभात हमें मधुर करना है ।’ वर्ष का प्रथम दिन जिनका हर्ष-उल्लास और आध्यात्मिकता से जाता है, उनका पूरा वर्ष लगभग ऐसा ही बीतता है । सुबह जब उठें तो ‘शांति, आनंद, माधुर्य… आधिभौतिक वस्तुओं का, आधिभौतिक शरीर का हम आध्यात्मिकीकरण करेंगे क्योंकि हमें सत्संग मिला है, सत्य का संग मिला है, सत्य एक परमात्मा है । सुख-दुःख आ जाय, मान-अपमान आ जाए, मित्र आ जाय, शत्रु आ जाए, सब बदलनेवाला है लेकिन मेरा चैतन्य आत्मा सदा रहने वाला है ।’ – ऐसा चिंतन करें और श्वास अंदर गया ‘सोऽ…’, बाहर आया ‘हम्…’, यह हो गया आधिभौतिकता का आध्यात्मिकीकरण, अनित्य शरीर में अपने नित्य आत्मदेव की स्मृति, नश्वर में शाश्वत की यात्रा ।

सुबह उठकर बिस्तर पर ही बैठकर थोड़ी देर श्वासोच्छ्वास को गिनना, अपना चित्त प्रसन्न रखना, आनंद उभारना ।

भाईदूज

यह भाई-बहन के निर्दोष स्नेह का पर्व है । बहन को सुरक्षा और भाई को शुभ संकल्प मिलते हैं । यमराज ने अपनी बहन यमी से प्रश्न किया : ‘‘बहन ! तू क्या चाहती है ? मुझे अपनी प्रिय बहन की सेवा का मौका चाहिए ।’’

यमी ने कहा : ‘‘भैया ! आज वर्ष की द्वितीया है । इस दिन भाई बहन के यहाँ आये या बहन भाई के यहाँ पहुँचे और इस दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ का बना हुआ भोजन करे वह यमपुरी के पाश से मुक्त हो जाए ।’’

यमराज प्रसन्न हुए कि ‘‘बहन ! ऐसा ही होगा ।’’

भैया को भोजन कराते है तो उसमें स्नेह के कण भी जाते हैं । मशीनों द्वारा बने हुए भोजन में और अपने स्नेहियों के द्वारा बने हुए भोजन में बहुत फर्क होता है ।

Diwali 2020: Lakshmi Mantras for Wealth (Money) & Prosperity

diwali Lakshmi Prapti ki Sadhna

Diwali Lakshmi Mantra for Wealth & Prosperity: दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे के दायीं और बायीं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी लगाकर उस पर दो दीपक जला दें । हो सके तो वे रात भर जलते रहें, इससे आपके घर में सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होगी ।

मिट्टी के कोरे दीयों में कभी भी तेल-घी नहीं डालना चाहिए । दीये 6 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर इस्तेमाल करें । नासमझ लोग कोरे दीयों में घी डालकर बिगाड़ करते हैं ।

लक्ष्मीप्राप्ति की साधना का एक अत्यंत सरल और केवल तीन दिन का प्रयोग :-

दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात् भाईदूज तक स्वच्छ कमरे में अगरबत्ती या धूप ( केमिकल वाली नहीं, गोबर से बनी ) करके दीपक जलाकर, शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केसर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला द्वारा नित्य प्रातः काल निम्न मंत्र की मालायें जपें :-

ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महै ।
अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि ।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।।

अशोक के वृक्ष और नीम के पत्ते में रोगप्रतिकारक शक्ति होती है ।

प्रवेशद्वार के ऊपर नीम, आम, अशोक आदि के पत्ते का तोरण (बंदनवार) बाँधना मंगलकारी है ।

दीपावली से आरम्भ करें :-
दीपावली पर लक्ष्मी प्राप्ति की साधना का एक अत्यंत सरल एवं त्रिदिवसीय उपाय यह भी है कि दीपावली के दिन से तीन दिन तक अर्थात भाईदूज तक स्वच्छ कमरे में धूप, दीप, व अगरबत्ती जलाकर, शरीर पर पीले वस्त्र धारण करके, ललाट पर केशर का तिलक कर, स्फटिक मोतियों से बनी माला नित्य प्रातः काल निम्न मंत्र की दो-दो मालायें जपें –

ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महै ।
अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।।

( दीपावली लक्ष्मी जी का जन्मदिवस है । समुद्र मंथन के दौरान वे क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं, अतः घर में लक्ष्मी जी के वास, दरिद्रता के विनाश और आजीविका के उचित निर्वाह हेतु यह साधना करने वाले पर लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं । )

– क्या करें? क्या न करें ?

Diwali 2020 Special Bhajan Songs with Lyrics| Mp3 Audio| Video

Mani Aaj achhi Diwali Hamari
Mani Aaj achhi Diwali Hamari

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अच्छी दिवाली हमारी

सभी इन्द्रियों में हुई रोशनी है ।
यथा वस्तु है सो तथा भासती है ।।
विकारी जगत् ब्रह्म है निर्विकारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

दिया दर्श ब्रह्मा जगत् सृष्टिकर्ता ।
भवानी सदा शंभु ओ विघ्नहर्ता ।।
महा विष्णु चिन्मूर्ति लक्ष्मी पधारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

दिवाला सदा ही निकाला किया मैं ।
जहाँ पे गया हारता ही रहा मैं ।।
गये हार हैं आज शब्दादि ज्वारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

लगा दाव पे नारी शब्दादि देते ।
कमाता हुआ द्रव्य थे जीत लेते ।।
मुझे जीत के वे बनाते भिकारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

गुरु का दिया मंत्र मैं आज पाया ।
उसी मंत्र से ज्वारियों को हराया ।।
लगा दाँव वैराग्य ली जीत नारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

सलोनी, सुहानी, रसीली मिठाई ।
वशिष्ठादि हलवाइयों की है बनाई ।।
उसे खाय तृष्णा दुराशा निवारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

हुई तृप्ति, संतुष्टता, पुष्टता भी ।
मिटी तुच्छता, दुःखिता, दीनता भी ।।
मिटे ताप तीनों हुआ मैं सुखारी ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

करे वास भोला ! जहाँ ब्रह्म विद्या ।
वहाँ आ सके ना अंधेरी अविद्या ।।
मनावें सभी नित्य ऐसी दिवाली ।
मनी आज अच्छी दिवाली हमारी ।।

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Deepavali 2020 Bhajan With Lyrics in Hindi

Shubh/ Param Diwali Meaning in Hindi

Shubh Param Diwali meaning in Hindi

प- परम चैतन्य की आभा से, जगमग हो दिल दीप ।
लौ तेल बाती वही, ज्योति स्वरूप मन मीत ।
तन सितार की तार में, गूंजे ‘सोऽहम्’ संगीत ।
मिथ्या माया जगत सब, साँची प्रभु गुरु प्रीत ।।

र – रंगोली सजी प्रेम की, परम स्नेह के रंग ।
समता सुमति भक्ति संग, छलके आनंद उमंग ।
रोम-रोम कण-कण वही, ‘साक्षी’ एक असंग ।
घट-घट में साहिब बसा, नित्य निर्लेप निसंग ।।

म – मधुर मिठाई हरिनाम की, फीका है सब संसार ।
आत्मज्ञान हरिचिंतन साचा, झूठा जग व्यवहार ।
सत्य सनातन सार है, बाकी मिथ्या आसार ।
गुरु ज्ञान आत्मभाव से, जीवन नैया हो पार ।।

दि- दीया जगा है ज्ञान का, मन मंदिर हुआ प्रकाश ।
ईश अनुराग तप त्याग से, भेद भरम भय नाश ।
अनासक्ति गुरुप्रीति से, बढ़ा उत्साह विश्वास ।
निजानंद की मस्ती में, रही न आस निरास ।।

वा – वाणी मधुर व शील धन, सुखमय जीवन आधार ।
शम संतोष संयम सरलता, मन हो निर्विकार ।
परोपकार सेवा सुभाव से, खुले मन मंदिर द्वार ।
प्रसन्नता हरिचिंतन से, होवे आनंद अपार ।।

ली- ली चित्त हरिध्यान में, रही न चिंता चाह ।
अहंता ममता मिट गयी, दोष दुर्गुण की स्याह (कालिख) ।
जिसको कुछ नहीं चाहिए, वह शाहों का शाह ।
गुरु ज्ञान में प्रीति से, मिल गयी सत्य की राह ।।

– साक्षी चंदनानी, अहमदाबाद

~ऋषि प्रसाद / अक्टूबर २०१७ / अंक २९८

A Prayer for Diwali with Lyrics| Mp3 Audio| YouTube Video

Diwali Priya Pujiyega
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दिवाली प्रिय पूजियेगा

वर्षों दिवाली करते रहे हो ।
तो भी अन्धेर घुप में पड़े हो ।।
माया अन्धेर अब त्यागियेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

पूजा अनात्मा नहीं आत्म पूजा ।
पूजा करे ‘हो’ नित भूत दूजा ।।
ना दूसरे से सुख पाइयेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

क्या सूर्य को धूप छुपा सके है । 
क्या सिंधु को तरंग दबा सके है ।।
ना झूठ से सत्य छिपाइयेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

दृष्टा तथा दृश्य जुदे जुदे हैं ।
अज्ञान से भासते एक से हैं ।।
अज्ञान की ऐनक तोड़ियेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

बाले दीये बाह्य किया उजेरा ।
फैला हुआ है घर में अंधेरा ।।
अन्धेर ऐसा मत कीजियेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिया पूजियेगा ।।

‘योगांग झाड़ू’ घर चित्त झाड़ो ।
विक्षेप कूड़ा, ‘सब झाड़ काढ़ो’ ।।
अभ्यास पीता फिर फेरियगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

प्रजा मिला प्राणन बत्ती घालो ।
वैराग्य घी दीपक ज्ञान बालो ।।
जो वस्तु जैसी तस देखियेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

ऐसी दिवाली श्रुति संत गाई ।
अत्रेय योगी करके दिखाई ।।
भोला ! कहे मित्र न चूकियेगा ।
प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

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दिवाली प्रिय पूजियेगा - पाठ

Deepavali/ Diwali Ke Din Kya Karna Chahiye Tips by SureshanandJi

Diwali ke din kya karna chahiye Tips by Sureshanandji

Deepavali Ke Din Kya Karna Chahiye [Tips for Diwali 2020 Celebration]

1. दीपावली के दिन रात भर घी का दिया जले सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है ।

2. दिवाली की रात को चाँदी की छोटी कटोरी या दीए में कपूर जलने से दैहिक दैविक और भौतिक परेशानी/कष्टों से मुक्ति होती है ।

3. हर अमावस्या को (और दिवाली को भी) पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं, और अच्छी आत्माएं घर में जनम लेती हैं ।

4. दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष के नीचे घी का दीया जलायें, तो बहुत शुभ माना जाता है ।

5. दिवाली की रात गणेशजी को लक्ष्मी जी के बाएं रख कर पूजा की जाये तो कष्ट दूर होते हैं ।

6. दिवाली के दिनों में अपने घर के बाहर सरसों के तेल का दीया जला देना, इससे गृहलक्ष्मी बढ़ती हैं ।

7. दिवाली की रात प्रसन्नतापूर्वक सोना चाहिये ।

8. थोड़ी खीर कटोरी में डाल के और नारियल लेकर के घूमना और मन में “लक्ष्मी- नारायण” जप करना और खीर ऐसी जगह रखना जहाँ किसी का पैर ना पड़े और गायें, कौए आदि खा जाएँ और नारियल अपने घर के मुख्य द्वार पर फोड़ देना और इसकी प्रसादी बाँटना । इससे घर में आनंद और सुख -शांति रहेगी ।

9. दीपावली की रात मुख्य दरवाजे के बाहर दोनों तरफ १-१ दीया गेहूँ के ढेर पर जलाएं और कोशिश करें कि दीया पूरी रात जले । आपके घर सुख समृद्धि की वृद्धि होगी ।

10. दिवाली के दिन अगर घर के लोग मिलकर 5-5 आहुति डालते हैं तो घर में सुख सम्पदा रहेगी । लक्ष्मी का निवास स्थाई रहेगा ।

11. दिवाली के दिनों में चौमुखी दीया जलाकर चौराहे पर रख दिया जाए, चारों तरफ, वो शुभ माना जाता है ।

12. नूतन वर्ष के दिन (दीपावली के अगले दिन) गाय के खुर की मिट्टी से, अथवा तुलसी जी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी ।

Importance of Diwali Festival in Hindi [Deepavali Ka Mahatva]

importance of diwali - deepavali ka mahatva

दीपावली हिन्दू समाज में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्यौहार है । दीपावली को मनाने का उद्देश्य भारतीय संस्कृति के उस प्राचीन सत्य का आदर करना है, जिसकी महक से आज भी लाखों लोग अपने जीवन को सुवासित कर रहे हैं । दिवाली का उत्सव पर्वों का पुंज है । भारत में दिवाली का उत्सव प्रतिवर्ष मनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है ।

यह तो हमारी प्रतिवर्ष मनायी जाने वाली दिवाली है, किंतु इस दिवाली को हम अपने जीवन की विशेष दिवाली बना लें, ऐसा पुरुषार्थ हमें करना चाहिए ।

भोले बाबा ने कहाः वर्षों दिवाली करते रहे हो, तो भी अंधेरे में पड़े हो ।

वे महापुरुष हमसे कैसी दिवाली मनाने की उम्मीद रखते होंगे ? दीपावली का पर्व प्रकाश का पर्व है, किंतु इसका वास्तविक अर्थ यह होता है कि ‘हमें अपने जीवन में छाये हुए अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ज्योति को प्रज्ज्वलित करना चाहिए । यही बात उपनिषद भी कहते हैं- ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय।’ परंतु इस ओर कभी हमारा ध्यान ही नहीं गया । इसी कारण उन महापुरुषों ने हमें जगाने के यह बात कही होगी :-

जले दिये बाह्य किया उजेरा, फैला हुआ है हृदय में अंधेरा ।

जिस प्रकार हम घी तथा तेल के दीये जलाकर रात्रि के अंधकार को मिटाते हैं, उसी प्रकार हम वर्षों से अपने मनःपटल पर पड़ी अज्ञान रूपी काली छाया को सत्कर्म, सुसंस्कार, विवेक तथा ज्ञान रूपी प्रकाश से मिटाकर ऋषियों के स्वप्न को साकार कर दें । जैसे, एक व्यापारी दीपावली के अवसर पर अपने वर्षभर के कारोबार की समीक्षा करता है, ऐसे ही हम भी अपने द्वारा किये गये वर्षभर के कार्यों का अवलोकन करें ।

यदि सत्कर्म अधिक किये हों तो अपना उत्साह बढ़ायें और यदि गलतियाँ अधिक हुई हों तो उन्हें भविष्य में न दोहराने का संकल्प कर अपने जीवन को सत्यरूपी ज्योति की ओर अग्रसर करें ।

दीपावली के पर्व पर हम अपने परिचितों को मिठाई बाँटते हैं, लेकिन इस बार हम महापुरुषों के शांति, प्रेम, परोपकार जैसे पावन संदेशों को जन-जन तक पहुँचा कर पूरे समाज को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करेंगे, ऐसा संकल्प लें । इस पावन पर्व पर हम अपने घर के कूड़े-करकट को निकालकर उसे विविध प्रकार के रंगों से रँगते हैं । ऐसे ही हम अपने मन में भरे स्वार्थ, अहंकार तथा विषय-विकार रूपी कचरे को निकालकर उसे संतों के सत्संग, सेवा तथा भक्ति के रंगों से रँग दें ।

योगांग झाड़ू धर चित्त झाड़ो, विक्षेप कूड़ा सब झाड़ काढ़ो ।

अभ्यास पीता फिर फेरियेगा, प्रज्ञा दिवाली प्रिय पूजियेगा ।।

आज के दिन से हमारे नूतन वर्ष का प्रारंभ भी होता है । इसलिए भी हमें अपने इस नूतन वर्ष में कुछ ऊँची उड़ान भरने का संकल्प करना चाहिए । ऊँची उड़ान भरना बहुत धन प्राप्त करना अथवा बड़ा बनने की अंधी महत्वकांक्षा का नाम नहीं है । ऊँची उड़ान का अर्थ है विषय-विकारों, मैं-मैं, तू-तू, स्वार्थता तथा दुष्कर्मों के देश से अपने चित्त को ऊँचा उठाना । यदि ऐसा कर सकें, तो आप ब्रह्मवेत्ता महापुरुषों के जैसी दिवाली मनाने में सफल हो जायेंगे ।

हमारे हृदय में अनेक जन्मों से बिछुड़े हुए उस राम का तथा उसके प्रेम का प्राकट्य हो जाये, यही याद दिलाने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इस पर्व को शास्त्रों में ऊँचा स्थान दिया है । उन्हें यह उम्मीद भी थी कि बाह्य ज्योत जलाते-जलाते हम अपने आंतरिक ज्योति को भी जगमगाना सीख जायेंगे, किंतु हम भूल गये । अतः उन महापुरुषों के संकल्प को पूर्ण करने में सहायक बनकर हम अपने जीवन को उन्नत बनाने का संकल्प करें ताकि आने वाला कल तथा आने वाली पीढ़ियाँ हम पर गर्व महसूस करें ।

भारत के वे ऋषि-मुनि धन्य हैं, जिन्होंने दीपावली – जैसे पर्वों का आयोजन करके मनुष्य को मनुष्य के नजदीक लाने का प्रयास किया है तथा उसकी सुषुप्त शक्तियों को जागृत करने का संदेश दिया है । उन्होंने जीवात्मा को परमात्मा के साथ एकाकार करने में सहायक भिन्न-भिन्न उपायों को खोज निकाला है । उन उपायों की गाँव-गाँव तथा घर-घर तक पहुँचाने का पुरुषार्थ अनेक ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों ने किया है । उन महापुरुषों को आज हमारा कोटि-कोटि प्रणाम है ।

~ ‘पर्वों का पुंज दीपावली’ पुस्तक से

Diwali Me Ghar Ki Sukh, Shanti, Dhan Laxmi, Health Ke Liye Upay

diwali mein lakshi, sukh shanti ke liye tips

2020 Diwali Me Ghar Ki Sukh, Shanti, Laxmi Prapti, Health Ke Liye Upay in Hindi [Tips for Money and Prosperity]

(1) दीपावली के दिन नारियल व खीर की कटोरी लेकर घर में घूमें ।

घर के बाहर नारियल फोड़ें और खीर ऐसी जगह पर रखें कि कोई जीव-जंतु या गाय खाये तो अच्छा है, नहीं तो और कोई प्राणी खाये ।

इससे घर में धन-धान्य की बरकत में लाभ होता है ।

(2) घर के बाहर हल्दी और चावल के मिश्रण या केवल हल्दी से स्वास्तिक अथवा ॐकार बना दें ।

यह घर को बाधाओं से सुरक्षित रखने में मदद करता है । द्वार पर अशोक और नीम के पत्तों का तोरण (बंदनवार) बाँध दें । उससे पसार होने वाले की रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी ।

(3) आज के दिन सप्तधान्य उबटन (पिसे हुए गेहूँ, चावल, जौ, तिल, चना, मूँग और उड़द से बना मिश्रण) से स्नान करने पर पुण्य, प्रसन्नता और आरोग्यता की प्राप्ति होती है ।

दिवाली के दिन अथवा किसी भी पर्व के दिन गोमूत्र से रगड़कर स्नान करना पापनाशक स्नान होता है ।

(4) इन दिनों में चौमुखी दीये जलाकर चौराहे पर चारों तरफ रख दिये जायें तो वह भी शुभ माना जाता है ।

(5) दीपावली की रात को घर में लक्ष्मीजी के निवास के लिए भावना करें और लक्ष्मीजी के मंत्र का भी जप कर सकते हैं ।

मंत्र :

ॐ नमो भाग्यलक्ष्म्यै च विद्महे ।
अष्टलक्ष्म्यै च धीमहि ।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।

(6) घर में विसंवादिता मिटाने के लिए गौ-चंदन अगरबत्ती पर देशी गाय का घी डाल के जलायें, घर के लोग मिलकर ‘हरि ॐ’ का गुंजन करें ।

दीवार पर या कहीं भी अपने नेत्रों की सीध में इष्ट देवता या सद्गुरु के नेत्र हों, उन्हें एकटक देखें और आसन बिछाकर ऐसी ध्वनि (ॐकार का गुंजन) करें । और दिनों में नहीं कर सके तो दिवाली के पाँच दिन तो अवश्य करें, इससे घर में सुख-सम्पदा का वास होगा ।

परंतु यह है शरीर का घर, तुम्हारा घर तो ऐसा है कि महाराज ! सारी सुख-सम्पदाएँ वहीं से सबको बँटती रहती हैं और कभी खूटती नहीं । उस अपने आत्म-घर में आने का भी इरादा करो ।

~(ऋषि प्रसाद : नवम्बर 2012)

What is Diwali and Why is it celebrated [History Story, Katha]

what is diwali and why it is celebrated

What is Diwali, Why Diwali is celebrated [Diwali Kyu manaya jata hai]. Know History Story/ Katha in Hindi: 

भगवान राम ने जिस दिन अयोध्या में प्रवेश किया था, वह दीपावली का दिन माना जाता है। इस दिन जैसे घर का कचरा निकाल कर दीपक जलाकर प्रकाश किया जाता है, ऐसे ही अंतःकरण में अज्ञान का अहंता – ममता का जो कचरा है, दोष है, इन सब को भी निकाल के ज्ञान का प्रकाश करें ।

इन सब दोषों की जड़ है अविद्या, अस्मिता, राग ,द्वेष अभिनिवेश उसका परिवार है । इन दोषों से आदमी घिरा हुआ है, अंधेरे में है ।

अविद्या का मतलब है अंधेरा । उस अंधेरे को निकालने से ही वास्तविक भीतरी दिवाली होती है । 

जब श्रीरामचंद्रजी अयोध्या आए तब अयोध्या में आनंद, प्रकाश और दिव्यता छा गई, ऐसे ही अपने हृदय रूपी अयोध्या में जब अंतर आत्मा राम प्रकट होते हैं तब जीवन में ब्रह्मानंद, ज्ञान का प्रकाश और दिव्य शांति छा जाती है ।

जरा-जरा बात में अगर उलझ जाएंगे तो अपने ह्रदय रूपी अयोध्या में आत्मा रूपी राम जी का प्राकट्य नहीं होगा ।

जब राम जी अयोध्या से चले जाते हैं तब अयोध्या सुनी हो जाती है, लोग दु:खी हो जाते हैं लेकिन राम जी आने वाले हैं तो लोग घरों को साफ करते हैं । इसी प्रकार अपने चित्त में आत्माराम का प्राकट्य करने के लिए हम इंद्रियों को पवित्र और संयमित रखें ।

यह राम जी के आगमन की पूर्वभूमिका है । हर हृदय में छुपे हुए राम संयम और पवित्रता के द्वारा प्रकट किए जा सकते हैं, यदि उत्सुकता हो ।

नवद्वारों वाली यह देश ही अयोध्या है । दस इंद्रियों में रत रहने वाला जीवन रूपी दशरथ इस पर राज्य करता है ।

दशरथ की तीन रानियां है- कौशल्या, सुमित्रा व कैकयी । इसी प्रकार सत्वगुण, रजोगुण,तमोगुण- यह तीन वृत्तियां इस जीवात्मा दशरथ की रानियां है ।

यह चाहता है कि रामराज्य हो लेकिन कैकयी की कहानी में लगकर रामराज्य की जगह राम वनवास हो जाता है । दशरथरूपी जीव राम खोते हैं और दुखी होते हैं ।

सीता जी राम के साथ-साथ जाती है और सोने का मृग देखती है । सोने के मृग की तरफ उनका आकर्षण हुआ तो उन्हें राम जी के सान्निध्य से दूर कर दिया । सीता जी स्वर्ण की लंका में पहुंची लेकिन ‘ राम ‘ बिना सोने की लंका क्या मायने रखती है ? सीता जी तड़प रही है ।

हनुमानजी ज्ञान और वैराग्य की मूर्ति हैं । शास्त्रों के ज्ञाता और संसार के विषय- विकारों से वैराग्य वाले हनुमान जी अगर सहयोग देते हैं तो सीता जी श्रीरामजी से मिल पाती हैं ।

ऐसे ही तुम्हारी भक्ति वृत्ति परमात्मा को मिले इसीलिए ब्रह्मज्ञान के अभ्यास और वैराग्य रूपी हनुमान जी की आवश्यकता है ।

~लोक कल्याण सेतु अक्टुबर २०१५