What are 5 Days of Diwali 2020 [Diwali Importance & Significance in Hindi] :

कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है । दीपावली में इसका माहात्म्य विशेष रूप में उजागर होता है । श्री पुष्कर पुराण में आता है :-

तुलायां तिलतैलेन सायंकाले समागते ।

आकाशदीपं यो दद्यान्मासमेकं हरिं प्रति ।

महतीं श्रियमाप्नोति रूपसौभाग्यसम्पदम् ।।

‘जो मनुष्य कार्तिक मास में संध्या के समय भगवान श्री हरि के नाम से तिल के तेल का दीप जलाता है, वह अतुल लक्ष्मी, रूप, सौभाग्य और संपत्ति को प्राप्त करता है ।’

नारदजी के अनुसार दीपावली के उत्सव को द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा – इन 5 दिनों तक मनाना चाहिए । इनमें भी प्रत्येक दिन अलग-अलग प्रकार की पूजा का विधान है ।

● Govatsa Dwadashi 2020

कार्तिक मास की द्वादशी को ‘गोवत्सद्वादशी’ कहते हैं । इस दिन दूध देने वाली गाय को उसके बछड़े सहित स्नान कराकर वस्त्र ओढ़ाना चाहिए, गले में पुष्प माला पहनाना, सींग मँढ़ाना, चंदन का तिलक करना तथा ताँबे के पात्र में सुगन्ध, अक्षत, पुष्प, तिल और जल का मिश्रण बनाकर निम्न मंत्र से गौ के चरणों का प्रक्षालन करना चाहिए ।

क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते ।

सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्यं नमो नमः ।।

‘समुद्र-मंथन के समय क्षीर सागर से उत्पन्न देवताओं तथा दानवों द्वारा नमस्कृत, सर्व देवस्वरूपिणी माता ! तुम्हें बार-बार नमस्कार है । मेरे द्वारा दिये हुए इस अर्घ्य को स्वीकार करो ।’

पूजा के बाद गौ को उड़द के बड़े खिलाकर यह प्रार्थना करनी चाहिए :-

सुरभि त्वं जगन्मातर्देवी विष्णुपदे स्थिता ।

सर्वदेवमये ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ।।

ततः सर्वमये देवि सर्वदेवैरलङ्कृते ।

मातर्ममाभिलाषितं सफलं कुरु नन्दिनी ।।

‘हे जगदम्बे ! हे स्वर्गवासिनी देवी ! हे सर्वदेवमयी ! मेरे द्वारा अर्पित इस ग्रास का भक्षण करो । हे समस्त देवताओं द्वारा अलंकृत माता ! नंदिनी ! मेरा मनोरथ पूर्ण करो ।’

● Dhanteras 2020

इसके बाद रात्रि में इष्ट, ब्राह्मण, गौ तथा अपने घर के वृद्धजनों की आरती उतारनी चाहिए । दूसरे दिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं । भगवान धन्वंतरी ने दुःखीजनों के रोग निवारणार्थ इसी दिन आयुर्वेद का प्राकट्य किया था । इस दिन संध्या के समय घर में बाहर हाथ में जलता हुआ दीप लेकर भगवान यमराज की प्रसन्नता हेतु उन्हें इस मंत्र के साथ दीपदान करना चाहिए :-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह ।

त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ।।

‘त्रयोदशी के इस दीपदान से पाश और दंडधारी मृत्यु तथा काल के अधिष्ठाता देव भगवान यम, देवी श्यामा सहित मुझ पर प्रसन्न हों ।’

● Narak Chaturdashi 2020

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है । इस दिन चतुर्मुखी दीप का दान करने से नरक भय से मुक्ति मिलती है । एक चार मुख (चार लौ) वाला दीप जलाकर इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए :-

दत्तो दीपश्चतुर्दश्यां नरकप्रीतये मया ।

चतुर्वर्तिसमायुक्तः सर्वपापापनुत्तये ।।

‘आज चतुर्दशी के दिन नरक के अभिमानी देवता की प्रसन्नता के लिए तथा समस्त पापों के विनाश के लिए मैं 4 बत्तियों वाला चौमुखा दीप अर्पित करता हूँ ।’

● Diwali 2020 [Deepavali]

अगले दिन कार्तिक अमावस्या को दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है । इस दिन प्रातः उठकर स्नानादि करके जप-तप करने से अन्य दिनों की अपेक्षा विशेष लाभ होता है । इस दिन पहले से ही स्वच्छ किये गृह को सजाना चाहिए भगवान नारायण सहित भगवती लक्ष्मी की मूर्ति अथवा चित्र की स्थापना करनी चाहिए ।

तत्पश्चात धूप-दीप व स्वास्तिवचन आदि वैदिक मंत्रों के साथ (अथवा भक्तिभाव से आरती  के द्वारा) उनकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए । इस रात्रि को भगवति लक्ष्मी भक्तों के घर पधारती हैं ।

● पाँचवे दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को ‘अन्नकूट दिवस’ कहते हैं । इस दिन गौओं को सजाकर, उनकी पूजा करके यह मंत्र कहना चाहिए :-

लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता ।

घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु ।।

‘धेनुरूप में स्थित जो लोकपालों की साक्षात लक्ष्मी है तथा जो यज्ञ के लिए घी देती है, वह गौ माता मेरे पापों का नाश करे ।’

रात्रि को गरीबों को यथासंभव अन्नदान करना चाहिए । इस प्रकार 5 दिन का यह दीपोत्सव संपन्न होता है ।

~ ‘पर्वों का पुंज दीपावली’ पुस्तक से