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अब आत्मदिवाली मनाओ...

- पूज्य बापूजी
पर्वों का पुंज दीपावली ५ दिनों का पर्व है । धनतेरस के दिन धन को लक्ष्मीनारायण की अर्धांगिनी मानकर उसका सदुपयोग करने का संकल्प किया जाता है । नरक चतुर्दशी को अपने जीवन से लापरवाही, आलस्य, प्रमाद, बेदरकारी, नारकीय विचारों को निकाल देना होता है । दीपावली को ज्ञान का प्रकाश करना है । नरक चतुर्दशी को ‘छोटी दिवाली’ भी बोलते हैं । छोटी दिवाली अर्थात् छोटी खुशी, जिसने लापरवाही हटा दी और तत्परता रखी है उसके जीवन में कुछ खुशी आयेगी लेकिन ज्ञान का दीया जलेगा तो पूरी खुशी आयेगी । फिर आता है नूतन वर्ष और आखिरी दिन होता है भाईदूज ।

धनतेरस

लोग रुपये-पैसों को धन मानते हैं, यह बहुत छोटी बात है क्योंकि उससे महत्त्वपूर्ण आरोग्य-धन है । पहला सुख निरोगी काया… तबीयत अच्छी नहीं तो रुपये-पैसे क्या कर लेंगे ! आरोग्य-धन की सुरक्षा करना भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य दिवस मनाना है । धनतेरस को यमराज के लिए प्रांगण में नैवेद्य धर देना, दीपदान कर देना । इस दिन यमराज को प्रसन्न करेंगे तो अकाल मृत्यु से बचाव होता है । धन्वंतरि महाराज को भी नैवेद्य अर्पण कर प्रेम से बोलना : ‘हमारा आयुवर्धन, आरोग्य की पुष्टि करनेवाले धन्वंतरि महाराज ! आपको भोग लगे । ॐ आरोग्यप्रदायकाय नमः । फिर आप भी थोड़ा खाओगे तो आपकी रात सुखदायी होगी। सुबह उठो तो थोड़ी देर चुप बैठे रहना । धनतेरस को लक्ष्मीजी का पूजन अर्थात् धन के दोषों को हरकर धन का सदुपयोग करने का संकल्प करना।धन से विषय-विकारों में फँसना यह धन का दुरुपयोग है और धन से परमात्मा के रास्ते जाना, साधन-भजन में लगना, शास्त्र खरीदना, यथायोग्य दान-पुण्य करना – यह धन का सदुपयोग है ।

नरक चतुर्दशी

इस दिन तेल की मालिश करके सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए । सूर्योदय के बाद जो स्नान करता है उसके पुण्यों का क्षय माना गया है । इसकी रात्रि में मंत्रजप करने से मंत्र सिद्ध होता है। दीपावली और नरक चतुर्दशी की रात्रियाँ मंत्र-जापकों के लिए वरदानदायी हैं । नरक चतुर्दशी को सरसों के तेल का दीपक रात्रि में जलाने से आँखों को विशेष लाभ होता है । बुद्धिमान महिलाएँ तो काजल बनाती हैं । नजर से बचाने के लिए बच्चों और बड़ों को इसी रात के बनाये हुए काजल का अंजन फायदा करता है । नरक चतुर्दशी, होली, जन्माष्टमी, शिवरात्रि – इन चारों महारात्रियों में अहोभाव से भगवान की स्मृति करें। इन रात्रियों में भूलकर भी संसार-व्यवहार नहीं करना चाहिए, नहीं तो बड़ा भारी पाप लगता है । इन रात्रियों को भगवत्सुमिरन पापों के समूह को नाश करके अच्छा विवेक देता है । जो विवेक का आदर करता है उसका विवेक बढ़ता है और अंत में भगवत्प्राप्ति हो जाती है । जो विवेक का आदर नहीं करता उसका विवेक दबता जाता है ।

दीपावली

दीपावली में ४ काम करने होते हैं। एक तो घर का कूड़ा-कचरा निकालना, यह हुआ बाहर का काम, ऐसे ही दिल का पुराना राग-द्वेष भी निकाल देना यह अंदर की दिवाली है । दूसरा होता है नयी चीज लाना । कई जन्मों में विषय-विकारों को, भोग को तो लाये, अब अपने हृदय में भगवान के सुख को लाओ । कई जन्मों में नहीं था लेकिन इसी जन्म में ले आओ बस । तीसरी बात है कि हम दीये जलाते हैं बाहर, ऐसे ही अंदर में ज्ञान का दीया जलाओ कि दुःख आया है संसार से वैराग्य कराने के लिए और सुख आया है थोड़ा संसार का उपयोग, सेवा करके अपना हृदय पवित्र करने के लिए। चौथी बात है मिठाई खाते-खिलाते हैं, ऐसे ही आप भी भगवत्सुख पाओ और दूसरों को भी पवाओ । आप भी सत्कर्म करो, दूसरों से भी कराओ । महालक्ष्मी, सुख-सम्पदा के साथ ब्रह्मविद्या, परमात्मा को पाने के लिए दीपावली की रात्रि का जप-ध्यान विशेष प्रभावशाली है, इसलिए जितना हो सके शांति से प्रीतिपूर्वक जप करते जायें और ध्यान में डूबते जायें । विशेषरूप से दीपावली की रात को ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं एें कमलवासिन्यै स्वाहा । इस मंत्र को कोई जपे तो लक्ष्मीजी प्रसन्न होंगी और हृदय में ऐश्वर्य, सामर्थ्य लाने की योग्यता के केन्द्र विकसित होंगे ।

बलि प्रतिपदा (नूतन वर्ष)

वर्ष के प्रथम दिन स्त्री-पुरुषों को तिलों के तेल का थोड़ा मर्दन करके स्नान करना चाहिए । इस दिन सुबह उठते समय चार काम करने चाहिए – एक तो उस परम सत्ता का चिंतन, भगवान की प्रार्थना : सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे । तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नमः ।। (श्रीमद्भागवत माहात्म्य : १.१) ‘जो सत् है, चैतन्य है, आनंदस्वरूप है, जिसके अस्तित्व से खुशियाँ दिखती हैं, जड़ शरीरों में चेतना दिख रही है और जो जगत की उत्पत्ति, स्थिति और संहार के हेतु हैं तथा आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक – तीनों तापों का नाश करनेवाले हैं, उन सच्चिदानंद प्रभु को हम प्रणाम करते हैं । दूसरी बात है कि दिन में शुभ कर्म करने का संकल्प हो जाय । तीसरी बात, अपने और परिवार के विषय में, स्वास्थ्य के विषय में विचार कर लिया और चौथी बात, यदि किसी समस्या का समाधान करना है अथवा निर्णय करना है, वह प्रातःकाल सात्त्विकता से करो तो वर्ष का प्रथम दिन अगर हम मंगलमय ढंग से मनाते हैं तो पूरा वर्ष मंगलमय हो जाता है । पूरा वर्ष मंगलमय हो इस भावना से देव-दर्शन, संत-दर्शन, गुरु-दर्शन आदि किया जाता है । परम सुखी होने का लक्ष्य बना लो ‘बापूजी ! आशीर्वाद दो,आशीर्वाद दो । तो हम यह संसारी आशीर्वाद नहीं देते कि ‘आपका धन-धान्य बढ़ता रहे, सुख-समृद्धि बढ़ती रहे, बेटे-पोते सुखी रहें, आप जुग-जुग जियो । हम तो कहते हैं कि ‘जो भी कुछ आये उसको तुम स्वप्न समझो । सुख आये तो उसमें डूबना नहीं, दुःख आये तो उसमें डूबना नहीं, दोनों को पसार होने दो, आप परम सुख का लक्ष्य बना लो ।

स्नेह का पर्व : भाईदूज

इस दिन यमी ने अपने भाई यमराज को भोजन कराया । प्रीति भरे भोजन से संतुष्ट होकर यमराज ने कहा :‘‘बहन ! कुछ माँग ले । यमी : ‘‘आज के दिन जो भाई अपनी बहन के यहाँ भोजन करे और बहन उसे ललाट पर तिलक करे तो वह त्रिलोचन, बुद्धिमान बने और तुम्हारे यमपाश में न बँधे। इस उत्सव ने भारत के भाई और बहन को पवित्र स्नेह से जोड़े रखने का बड़ा ऊँचा काम किया । इससे बहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी शुभ भाव से भाई स्वीकार कर लेता है और भाई के लिए बहन के शुभ संकल्पों की परम्परा सँवारी जाती है । बहन इस भाव से भाई को तिलक करती है कि ‘मेरा भैया त्रिलोचन बने । फिर भैया को भोजन कराना है तो उसमें स्नेह के कण भी जाते हैं । मशीनों के द्वारा बने हुए भोजन और स्नेहियों के द्वारा बने हुए भोजन में जमीन-आसमान का फर्क है । भाई और बहन का निर्दोष प्रेम, निर्दोष शुभ संकल्प इसके पीछे जितना तीव्र होता है, उतना ही दोनों का रक्षण-पोषण होता है और इस कर्म को श्रद्धा, भक्ति, प्रेम, सदाचार के द्वारा चार चाँद लग जाते हैं ।

मिठाइयों से सावधान

  • मिठाइयों पर जो चाँदी के वर्ख लगते हैं वो भी बैलों की आँतों का उपयोग कर के बनाए जाते हैं …सावधान…!!
  • बाजार में बेसन की मिठाई मिलती.. तो बेसन ४० रुपये किलो है और चावल का आटा १८ रुपये किलो ..तो मिठाई दोनों को मिक्स कर के बनाते तो और भी सत्यानाश है…..
  • मावे की मिठाइयाँ अथवा जो भी verity हैं, मावे से बनने वाली आगे चल के बहुत नुकसान करती है..सीधा दूध, लस्सी ये तो फायदा करता है..लेकिन दूध में से जो वैरायटियां बनती हैं जैसे पनीर, रसगुल्ले आदि नुकसान करते हैं..
  • आपका शरीर स्वस्थ रहे, इसलिए मिठाइयों को नपे तुले ढंग से उपयोग में लाना… बाजारू मिठाई से सावधान रहें..!! नपी-तुली खाना ।

दीपावली टिप्स

दिवाली की रात कुबेर भगवान ने लक्ष्मी जी की आराधना की थी जिससे वे धनाढ्यपतियों के भी धनाढ्य कुबेर भंडारी के नाम से प्रसिद्ध हुए, ऐसा इस काल का महत्व है । रात्रि को दीया जलाकर इस सरल मंत्र का यथाशक्ति जप करें :

“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा”

“सुख-सम्पत्ति की वृद्धि के लिए दो विशेष दीपक” दीपावली के दिन घर के मुख्य दरवाजे के दायीं और बायीं ओर गेहूँ की छोटी-छोटी ढेरी लगाकर उसपर दो दीपक जला दें । हो सके तो वें रात भर जलते रहें , इससे आपके घर में सुख-सम्पत्ति की वृद्धि होगी । दीपावली की रात मंदिर में रातभर घी का दीया जलता रहे सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है ।
“लक्ष्मी प्राप्ति हेतु गुरुदेव के श्रीचित्र पर विशेष तिलक” दीपावली के दिन लौंग और इलायची को जलाकर राख कर दें और उससे गुरुदेव (श्रीचित्र) को तिलक करें । ऐसा करने से लक्ष्मी प्राप्ति में मदद मिलती है और काम-धंधे में बरकत आती है।