How to Celebrate Makar Sankranti 2021| Uttarayan Par Kya Kare, Kya Nahi Kare

इस दिन स्नान, दान, जप, तप का प्रभाव ज्यादा होता है ।

उत्तरायण के एक दिन पूर्व रात को भोजन थोड़ा कम लेना ।

दूसरी बात, उत्तरायण के दिन पंचगव्य का पान पापनाशक एवं विशेष पुण्यदायी माना गया है । त्वचा से लेकर अस्थि तक की बीमारियों की जड़ पंचगव्य उखाड़ के फेंक देता है । पंचगव्य आदि न बना सको तो कम-से-कम गाय का गोबर, गोझरण, थोड़े तिल, थोड़ी हल्दी और आंवले का चूर्ण इनका उबटन बनाकर उसे लगा के स्नान करो अथवा सप्तधान्य उबटन से स्नान करो (पिसे हुए गेहूं, चावल, जौ, तिल, चना, मुंग और उड़द से बना मिश्रण) ।

इस पर्व पर जो प्रातः स्नान नहीं करते हैं वे सात जन्मों तक रोगी और निर्धन रहते हैं ।

मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से दस हजार गोदान करने का फल शास्त्र में लिखा है और इस दिन सूर्यनारायण का मानसिक रूप से ध्यान करके मन-ही-मन उनसे आयु-आरोग्य के लिए की गयी प्रार्थना विशेष प्रभावशाली होती है ।

इस दिन किये गये सत्कर्म विशेष फलदायी होते हैं । इस दिन भगवान शिव को तिल, चावल अर्पण करने अथवा तिल, चावल मिश्रित जल से अर्घ्य देने का भी विधान है ।

इस दिन रात्रि का भोजन न करें तो अच्छा है लेकिन जिनको संतान है उनको उपवास करना मना किया गया है…

उत्तरायण के दिन में जो 6 प्रकार से तिलों का उपयोग करता है वह इस लोक और परलोक में वांछित फल को पाता है ।

(1) पानी में तिल डालके स्नान करना

(2) तिल का उबटन लगाना

(3) तिल डालकर पितरों का तर्पण करना, जल देना

(4) अग्नि में तिल डालकर

(5) तिलों का दान करना

(6) तिल खाना

तिलों की महिमा तो है लेकिन तिल की महिमा सुनकर तिल अति भी न खायें और रात्रि को तिल और तिल मिश्रित वस्तु खाना वर्जित है ।

सूर्य-उपासना करें :-

‘ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि । तन्नो भानुः प्रचोदयात्’ इस सूर्य गायत्री के द्वारा सूर्यनारायण को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है अथवा तो ॐ सूर्याय नमः । ॐ रवये नमः ।.. करके भी अर्घ्य दे सकते हैं । आदित्य देव की उपासना करते समय अगर सूर्यगायत्री का जप करके ताँबे के लोटे से जल चढ़ाते हैं और चढ़ा हुआ जल जिस धरती पर गिरा, वहाँ की मिट्टी का तिलक लगाते हैं तथा लोटे में 6 घुंट बचाकर रखा हुआ जल महामृत्युंजय मंत्र का जप करके पीते हैं तो आरोग्य की खूब रक्षा होती है ।

आचमन लेने से पहले उच्चारण करना होता है :-

अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम् ।
सूर्यपादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम् ।।

अकाल मृत्यु को हरने वाले सूर्यनारायण के चरणों का जल मैं अपने जठर में धारण करता हूँ । जठर भीतर के सभी रोगों को और सूर्य की कृपा बाहर के शत्रुओं, विघ्नों, अकाल-मृत्यु आदि को हरे ।

– ऋषि प्रसाद, दिसम्बर 2014

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