Makar Sankranti 2021 Vrat, Puja Vidhi Samagri, Mantra

◆ प्रातःकाल तिल का उबटन लगाकर तिलमिश्रित जल से स्नान करें ।

◆ स्नान के पश्चात् अपने आराध्य-देव की पूजा-अर्चना करें ।

◆ ताँबे के लोटे में रक्त चंदन, कुमकुम, लाल रंग के फूल तथा जल डालकर पूर्वाभिमुख होकर सूर्य-गायत्री मंत्र से तीन बार सूर्य भगवान को जल दें और सात बार अपने ही स्थान पर परिक्रमा करें ।

 

सूर्य गायत्री मंत्र [Makar Sankranti Mantra]

ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि । तन्नो भानुः प्रचोदयात् ।

◆ फिर गायत्री मंत्र तथा ‘आदित्यहृदय स्तोत्र’ का पाठ करें ।

◆ पक्षियों को अनाज व गाय को घास, तिल, गुड़ आदि खिलायें ।

◆ ‘पद्म पुराण के अनुसार ‘जो मनुष्य पवित्र होकर भगवान सूर्य के आदित्य, भास्कर, सूर्य, अर्क, भानु, दिवाकर, स्वर्णरेता, मित्र, पूषा, त्वष्टा, स्वयम्भू और तिमिराश – इन १२ नामों का पाठ करता है, वह सब पापों और रोगों से मुक्त होकर परम गति को पाता है ।’

आज से तिल-तिल दिन बढ़ने लगते हैं, अतः इसे ‘तिल संक्रांति के रूप में भी मनाया जाता है । ‘विष्णु धर्मसूत्र’ में कहा गया है कि पितरों के आत्मा की शांति, स्वयं के स्वास्थ्यवर्धन व सर्वकल्याण के लिए तिल के छः प्रयोग पुण्यदायक एवं फलदायक होते हैं – तिल-जल स्नान, तिल-दान, तिल-भोजन, तिल- जल अर्पण, तिल-आहुति तथा तिल उबटन मर्दन । किंतु ध्यान रखें कि सूर्यास्त के बाद तिल व तिल के तेल से बनी वस्तुएँ खाना वर्जित है ।

 यह पावन पर्व पारस्परिक स्नेह और मधुरता की वृद्धि का महोत्सव है, इसलिए इस दिन लोग एक-दूसरे को स्नेह के प्रतीक तिल और मधुरता का प्रतीक गुड़ देते हैं ।

इस मकर संक्रांति पर्व पर हम यह संकल्प लें कि आज से हम आपसी मतभेद व वैमनस्य को भुलाकर सत्शास्त्रों व सद्गुरुओं के ज्ञान को आत्मसात् करेंगे और उनके बताये हुए मार्ग पर चलकर शाश्वत सुख, शाश्वत आनंद को पायेंगे ।’

-लोक कल्याण सेतु / दिसम्बर 2010