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शुभ भाव व पवित्रता देने वाला पर्व

वैदिक रक्षाबंधन

3 अगस्त 2020

रक्षाबंधन महोत्सव
[Happy Raksha Bandhan 2020]

भारतीय संस्कृति का रक्षा बंधन महोत्सव जो श्रावणी पूनम के दिन मनाया जाता है, आत्मनिर्माण और आत्मविकास का पर्व है । आज के दिन पृथ्वी ने मानो हरी साड़ी पहनी है, सुंदर पुष्प खिले हैं । अपने हृदय को भी प्रेमाभक्ति से, सदाचार-संयम से पूर्ण करने के लिए प्रोत्साहित करनेवाला यह पर्व है ।

रक्षाबंधन का अर्थ
[What is Raksha Bandhan in Hindi]

रक्षाबंधन अर्थात् शुद्ध प्रेम का बंधन… पराक्रम और प्रेम के समन्वय, साहस और संयम का आपसी सहयोग एवं ऋषि पूजन का दिवस… भाई का बहन के प्रति व साधक का सद्गुरु के प्रति स्नेह प्रगट करने तथा सद्गुरु का साधक के प्रति सुरक्षा-संकल्प करने का दिवस । यह महोत्सव आत्मिक जागृति लाने, शुभ संकल्प, व्रत और नियम लेने तथा स्वाध्याय व आत्मशुद्धि के लिए अनुष्ठान करने का दिवस है ।

राखी बँधवाने का उचित समय
[Rakha Bandhan Shubh Muhurat]

भद्राकाल के बाद ही राखी बँधवायें। जैसे शनि की क्रूर दृष्टि हानि करती है, ऐसे ही शनि की बहन भद्रा का प्रभाव भी नुकसान करता है । रावण ने भद्राकाल में शूर्पणखा से रक्षासूत्र बँधवा लिया, परिणाम यह हुआ कि उसी वर्ष में उसका कुलसहित नाश हुआ । भद्रा की कुदृष्टि से कुल में हानि होने की सम्भावना बढ़ती है। अतः भद्राकाल में रक्षासूत्र ( राखी ) नहीं बंधवानी चाहिए ।

[2020 Time] भद्राकाल का समय है : 3 अगस्त  सुबह 9:30 तक भद्राकाल है अत: इसके बाद ही राखी बाँधे -बँधवायें

रक्षाबंधन का अर्थ
[What is Raksha Bandhan in Hindi]

रक्षाबंधन अर्थात् शुद्ध प्रेम का बंधन… पराक्रम और प्रेम के समन्वय, साहस और संयम का आपसी सहयोग एवं ऋषि पूजन का दिवस… भाई का बहन के प्रति व साधक का सद्गुरु के प्रति स्नेह प्रगट करने तथा सद्गुरु का साधक के प्रति सुरक्षा-संकल्प करने का दिवस । यह महोत्सव आत्मिक जागृति लाने, शुभ संकल्प, व्रत और नियम लेने तथा स्वाध्याय व आत्मशुद्धि के लिए अनुष्ठान करने का दिवस है ।

राखी बँधवाने का उचित समय
[Rakha Bandhan Shubh Muhurat]

भद्राकाल के बाद ही राखी बँधवायें। जैसे शनि की क्रूर दृष्टि हानि करती है, ऐसे ही शनि की बहन भद्रा का प्रभाव भी नुकसान करता है । रावण ने भद्राकाल में शूर्पणखा से रक्षासूत्र बँधवा लिया, परिणाम यह हुआ कि उसी वर्ष में उसका कुलसहित नाश हुआ । भद्रा की कुदृष्टि से कुल में हानि होने की सम्भावना बढ़ती है। अतः भद्राकाल में रक्षासूत्र ( राखी ) नहीं बंधवानी चाहिए ।

[2020 Time] भद्राकाल का समय है : 3 अगस्त  सुबह 9:30 तक भद्राकाल है अत: इसके बाद ही राखी बाँधे -बँधवायें

बहन अपने भाई को रक्षासूत्र कैसे बांधे ? और कैसे मनाये रक्षाबंधन ?
[How to celebrate Raksha bandhan]

  • आज के दिन रक्षा सूत्र बाँधने से “वर्ष भर रोगों से हमारी रक्षा रहे, बुरे भावों से रक्षा रहे, बुरे कर्मों से रक्षा रहे” – ऐसा एक दूसरे के प्रति सत्संकल्प करते हैं ।
  • रक्षाबंधन के दिन बहन भैया के ललाट पर तिलक-अक्षत लगाकर संकल्प करती है कि ‘जैसे शिवजी त्रिलोचन हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, वैसे ही मेरे भाई में भी विवेक-वैराग्य बढ़े, मोक्ष का ज्ञान, मोक्षमय प्रेम स्वरूप ईश्वर का प्रकाश आये ।
  • मेरा भाई इस सपने जैसी दुनिया को सच्चा मानकर न उलझे, मेरा भैया साधारण चर्मचक्षुवाला ना हो, दूरद्रष्टा हो । ‘क्षणे रुष्ट: क्षणे तुष्ट:’ न हो, जरा-जरा बात में भड़कने वाला न हो, धीर-गंभीर हो । मेरे भैया की सूझबूझ, यश, कीर्ति और ओज-तेज अक्षुण्ण रहे। भैया को राखी बाँधी और मुँह मीठा किया, भाई गदगद हो गया।
 

सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम् ।

सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत् ।।

Rakshabandhan Vidhi Audio

वैदिक राखी का महत्त्व एवं कैसे बनायें ?
Vedi Rakhi ka Mahatva [Importance]

  सर्व मांगल्यकारी वैदिक रक्षासूत्र

  • भारतीय संस्कृति में ‘रक्षाबंधन पर्व’ की बड़ी भारी महिमा है। इतिहास साक्षी है कि इसके द्वारा अनगिनत पुण्यात्मा लाभान्वित हुए हैं फिर चाहें वह वीर योद्धा अभिमन्यु हो या स्वयं देवराज इन्द्र हों।
  • इस पर्व ने अपना एक क्रांतिकारी इतिहास रचा है।

वैदिक रक्षासूत्र

  • रक्षासूत्र मात्र एक धागा नहीं बल्कि शुभ भावनाओं व शुभ संकल्पों का पुलिंदा है।
  • यही सूत्र जब वैदिक रीति से बनाया जाता है और भगवन्नाम व भगवद्भाव सहित शुभ संकल्प करके बांधा जाता है तो इसका सामर्थ्य असीम हो जाता है।

कैसे बनायें वैदिक राखी ? वैदिक राखी का महत्व ? जानने के लिए

Happy Raksha bandhan Wishes, Messages, Greetings, Images 2020

युवाधन की सुरक्षा - सुरक्षा का स्नेह-सूत्र

  • कैसी दिव्य है भारतीय संस्कृति ! पड़ोस के भाई या बहन के प्रति मन में थोड़ा-सा विकारी भाव उत्पन्न हुआ तो यह ऋषि-परंपरा से चला आया, ऋषियों की प्रसादी ले आया, रक्षा के संकल्प से संपन्न नन्हा-सा, पतला-सा, दिव्य भावना से भरा राखी का धागा बहन ने भाई को बाँधा ( रक्षाबंधन ) और भाव अच्छे हो गये।

नजरें बदलीं तो नजारे बदले।

किश्ती ने बदला रुख तो किनारे बदले ॥

स्वास्थ्य-सुरक्षा - Rakshabandhan Special

  • रक्षाबंधन के दिन स्नान के समय यज्ञ की राख अथवा गोधूलि और गौ-गोबर एवं जौ-तिल आदि का उबटन शरीर पर लगायें। कैसे भी चर्मरोग क्यों न हों, ये पदार्थ सबको मिटा देंगे, शारीरिक शुद्धि हो जायेगी।

रक्षाबंधन का उत्सव श्रावणी पूनम को ही क्यों रखा गया ?

  • भारतीय संस्कृति में संकल्पशक्ति के सदुपयोग की सुंदर व्यवस्था है। ब्राह्मण कोई शुभ कार्य कराते हैं तो कलावा ( रक्षासूत्र ) बाँधते हैं ताकि आपके शरीर में छुपे दोष या कोई रोग जो आपको आपके शरीर को अस्वस्थ कर रहे हों, उनके कारण आपका मन और बुद्धि भी निर्णय लेने में थोड़ा अस्वस्थ न रह जाए ।
  • सावन के महीने में सूर्य की किरणें धरती पर कम पड़ती हैं, किस्म-किस्म के जीवाणु बढ़ जाते हैं जिससे किसी को दस्त, किसी को उल्टियाँ, किसी को बुखार हो जाता है, तो किसीका शरीर टूटने लगता है । इसीलिए रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र बाँधकर तन-मन मति की रक्षा का संकल्प किया जाता है। रक्षासूत्र में कितना मनोविज्ञान है, कितना रहस्य है !

रक्षाबंधन महोत्सव का इतिहास

[Rakshabandhan History Story]

Rakshabandhan History Story/ Kahani

➠ श्रावणी पूर्णिमा अर्थात् रक्षाबंधन-महोत्सव बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा है। हजार-दो हजार वर्ष, पाँच हजार वर्ष, लाख-दो लाख वर्ष नहीं, करोड़ों वर्ष प्राचीन है यह उत्सव । इस पूनम को 'नारियली पूनम' भी कहते हैं । सामुद्रिक धंधा करने वाले लोग ‘जलानां सागरो राजा... ‘ सारे जलाशयों में सागर राजा है... इस भाव से उसे नारियल अर्पण करते हैं कि 'अगर आँधी-तूफान आये तो हमारी देह की बलि न चढ़े इसलिए हम आपको यह बलि अर्पण कर देते हैं ।' यह कृतज्ञता व्यक्त करने का भी उत्सव है ।

➠ ब्राह्मण 'श्रावणी पर्व' मनाते हैं और जनेऊ बदलते हैं । जनेऊ में ३ धागे होते हैं। १-१ में ९-९ गुण... ९ X ३ = २७. प्रकृति के इन गुणों से और बंधनों से पार होने के लिए जनेऊ धारण किया जाता है। 'जनेऊ का धागा तो भले पुराना हो गया इसलिए बदल देते हैं लेकिन हमारा उत्साह तो जैसे पूनम का चाँद पूर्ण विकसित है, ऐसे ही धर्म और कर्म में हमारा उत्साह बना रहे, साहस और प्रेम बना रहे' - यह भावना करते हैं ।

बाल संस्कार केन्द्र में कैसे मनाएं रक्षा बंधन ??

  • रक्षाबंधन शुभ संकल्प करने का दिन है । इस पर्व पर शुभ भावों के विकास हेतु सबसे पहले केन्द्र में आये बच्चों से गुरुदेव का मानसिक पूजन करवायें । बच्चों को सुखासन में आँखें बंद करके बिठायें ।
  • मन-ही-मन इस प्रकार भावना करने को कहें : ‘हम गुरुदेव के श्रीचरण धो रहे हैं… जल से उनके पादारविंदों को स्नान करा रहे हैं ।

आगे की विधि जानने के लिए

बाल संस्कार केन्द्र में कैसे मनाएं रक्षा बंधन ??

  • रक्षाबंधन शुभ संकल्प करने का दिन है । इस पर्व पर शुभ भावों के विकास हेतु सबसे पहले केन्द्र में आये बच्चों से गुरुदेव का मानसिक पूजन करवायें । बच्चों को सुखासन में आँखें बंद करके बिठायें ।
  • मन-ही-मन इस प्रकार भावना करने को कहें : ‘हम गुरुदेव के श्रीचरण धो रहे हैं… जल से उनके पादारविंदों को स्नान करा रहे हैं ।

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