यह आसन करना कठिन है इसलिए इसे उग्रासन कहा जाता है । उग्र का अर्थ है शिव । भगवान शिव संहारकरता हैं… अतः उग्र या भयंकर हैं । शिवसंहिता में भगवान शिव ने मुक्त कण्ठ से प्रशंसा करते हुए कहा है : ‘‘यह आसन सर्वश्रेष्ठ आसन है । इसको प्रयत्नपूर्वक गुप्त रखें । सिर्फ अधिकारियों को ही इसका रहस्य बतायें ।

ध्यान मणिपुर चक्र में । श्वास प्रथम स्थिति में पूरक, और दूसरी स्थिति में रेचक और फिर बहिर्कुम्भक ।

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