21+ Best Tulsi Benefits in Hindi [For Physical & Mental Health]

21 Best Tulsi Benefits for physical and mental health

 

Tulsi Benefits in Hindi [Tulsi Benefits for Skin, thyroid, Cough, immunity, Hairs, Eye, Lungs, Body, Weight Loss etc]

➨जिसे नींद न आती हो तो 51 तुलसी के पत्ते उसके तकिये के नीचे रखने से नींद अच्छी आती है ।

➨ मिर्गी और कोमा की स्थिति में तुलसी के रस में सेंधा नमक मिलाकर नाक में डालें । स्वास्थ्य में जल्दी सुधार होता है । सर्दियों के दिनों में गरम पानी में रखकर फिर डालें ।

➨ एक चुटकी तुलसी बीज रात को पानी में भिगो दें । अगले दिन सुबह खाली पेट खायें, बुढ़ापा जल्दी नहीं आयेगा, ब्रह्मचर्य की रक्षा होगी ।

➨ तुलसी की माला गले में धारण करने से शरीर में विद्युत शक्ति का संचार अच्छा होता है । जीवन शक्ति बढ़ती है, शरीर में ओज-तेज बना रहता है ।

➨ तुलसी की माला धारण करके किया गया शुभ कर्म अनंत फल देता है ।

➨ कफजन्य रोग, दमा, अस्थमा आदि रोगों में तुलसी वरदानस्वरूप है ।

➨ तुलसी की जड़ या जड़ों के मनके की माला कमर में बांधने से गर्भवती स्त्रियों को विशेष लाभ होता है, प्रसव की पीड़ा नहीं होती ।

➨ नियमित रूप से तुलसी का सेवन करने से ट्यूमर आदि नहीं बनता । अनगिनत बीमारियाँ तो मात्र तुलसी की माला पहनने से ही दूर हो जाती हैं ।

➨ 10 ग्राम तुलसी का रस और 10 ग्राम शहद/10 ग्राम तुलसी का रस और 50 ग्राम ताजा दही का सेवन करने से कैंसर रोग में राहत मिलती है ।
➨ विश्वभर के फूलों और पत्तों से जितनी भी दवाइयाँ बनती हैं और उनसे जितना आरोग्य प्राप्त होता है, उतना ही आरोग्य तुलसी से आधे पत्ते से मिल जाता है ।

➨ तुलसी के निकट रहने से मन शांत रहता है, क्रोध जल्दी नहीं आता ।

➨ फ्रेंच वैज्ञानिक डॉ. विक्टर रेसिन ने कहा कि इससे हिमोग्लोबिन बढ़ता है, लिवर नियंत्रित होता है, कोलेस्ट्रोल कंट्रोल होता है । कई प्रकार के बुखार मलेरिया, टाइफाइड आदि दूर होते हैं । हृदय रोगों में विशेष लाभकारी है ।

➨ दरिद्रता मिटाने के लिए अमावस्या और 25 दिसंबर के दिन तुलसी जी की 108 परिक्रमा करने से लाभ होता है ।

➨ मृतक व्यक्ति के मुँह में तुलसीदल और गंगाजल डालने से उसकी सद्गति होती है ।

➨ तुलसी की लकड़ी से शरीर का दाह संस्कार किया जाये तो उसका पुनर्जन्म नहीं होता ।

➨ जो व्यक्ति तुलसी के 5-7 पत्ते सुबह चबाकर पानी पीता है उसकी यादशक्ति बढ़ती है, ब्रह्मचर्य मजबूत होता है और जलोदर, भगंदर कभी नहीं होता है । 800 बीमारियाँ दूर करने की ताकत तुलसी के पत्तों में है । बहुत सारी बीमारियाँ जिनका उपचार हम नहीं जानते उन पर भी तुलसी का बहुत असर होता है, जैसे – पेट की खराबी, कैंसर या कोई अन्य खतरनाक बीमारी आदि ।

➨ तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय में किये गये एक अध्ययन के अनुसार ‘तुलसी का पौधा उच्छ्वास में ओजोन वायु छोड़ता है, जो विशेष स्फूर्तिप्रद है ।’

➨ डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अनुसंधानों से यह सिद्ध हुआ है कि ‘तुलसी में एंटी ऑक्सीडंट गुणधर्म है और वह आण्विक विकिरणों से क्षतिग्रस्त कोषों को स्वस्थ बना देती है । कुछ रोगों एवं जहरीले द्रव्यों, विकिरणों तथा धूम्रपान के कारण जो कोषों को हानि पहुँचाने वाले रसायन शरीर में उत्पन्न होते हैं, उनको तुलसी नष्ट कर देती है ।’

➨ आभामंडल नापने के यंत्र ‘यूनिवर्सल स्केनर’ के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञ श्री के.एम. जैन द्वारा किये गये परीक्षणों से यह बात सामने आयी कि ‘यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी या देशी गाय की परिक्रमा करे तो उसके शरीर में धनात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे शरीर पर रोगों के आक्रमण की सम्भावना भी काफी कम हो जाती है । यदि कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे की 9 बार परिक्रमा करे तो उसके आभामंडल के प्रभाव-क्षेत्र में 3 मीटर की आश्चर्यकारक बढ़ोतरी होती है ।’

➨ अभी वैज्ञानिकों ने प्रयोग किया कि एक मुर्दे के इर्द-गिर्द तुलसी के खूब गमले रख दिये गये, 4 दिन तक मुर्दे में कोई फर्क नहीं पड़ा । नहीं तो मुर्दा तो बिल्कुल फूल जाता है । दूसरी दवाएँ कीटाणु नष्ट करती हैं लेकिन तुलसी की हवा तो कीटाणु पैदा ही नहीं होने देती है ।’

➨ विज्ञान के अनुसार घर में तुलसी-पौधे लगाने से स्वस्थ वायुमंडल का निर्माण होता है । तुलसी से उड़ते रहने वाला तेल आपको अदृश्य रूप से कांति, ओज और शक्ति से भर देता है । अतः सुबह-शाम तुलसी के नीचे धूप-दीप जलाने से नेत्रज्योति बढ़ती है, श्वास का कष्ट मिटता है । तुलसी के बगीचे में बैठकर पढ़ने, लेटने, खेलने व व्यायाम करने वाले दीर्घायु व उत्साही होते हैं । तुलसी उनकी कवच की तरह रक्षा करती है ।

➨ तुलसी के पास बैठकर प्राणायाम करने से शरीर में बल तथा बुद्धि और ओज की वृद्धि होती है ।

➨ मात्र भारत में ही नहीं वरन् विश्व के कई अन्य देशों में भी तुलसी को पूजनीय व शुभ माना गया है । ग्रीस में इस्टर्न चर्च नामक सम्प्रदाय में तुलसी की पूजा होती थी और सेंट बेजिल जयंती के दिन ‘नूतन वर्ष भाग्यशाली हो’ इस भावना से देवल में चढ़ाई गयी तुलसी के प्रसाद को स्त्रियाँ अपने घर ले जाती थीं ।

➨ तुलसी के पत्तों को जल में डालने से जल सुगंधित व तुलसी के समान गुणकारी हो जाता है । यदि पानी में उचित मात्रा में तुलसी-पत्ते डालकर उसे शुद्ध किया जाए तो उसके सारे दोष समाप्त हो जाते हैं । यह पानी शरीर को पुष्ट बनाता है तथा मुख का तेज, शरीर का बल एवं मेधा व स्मरण शक्ति बढ़ाता है ।

➨ पूज्य बापूजी के सत्संग में आता है कि ‘‘जिस घर में बीमारियों का भय हो वहाँ तुलसी के पौधे बढ़ा दो । सुबह तुलसी के दर्शन करो, तुलसी के आगे सूर्योदय के समय (सूर्य की किरणें नाभि पर पड़ें इस प्रकार बैठकर) प्राणायाम करो तो दमा-वमा दूर रहेगा, निरोगता आ जायेगी ।’’

➨ तुलसी बड़ी पवित्र एवं अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण है । यह माँ के समान सभी प्रकार से हमारा रक्षण व पोषण करती है । हिन्दुओं के प्रत्येक शुभ कार्य में, भगवान के प्रसाद में तुलसी-दल का प्रयोग होता है । जहाँ तुलसी के पौधे होते हैं, वहाँ की वायु शुद्ध और पवित्र रहती है । तुलसी के पत्तों में एक विशिष्ट तेल होता है जो कीटाणुयुक्त वायु को शुद्ध करता है । तुलसी की गंधयुक्त वायु से मलेरिया के कीटाणुओं का नाश होता है । तुलसी में एक विशिष्ट क्षार होता है जो दुर्गन्ध को दूर करता है । जिसके मुँह से दुर्गन्ध आती हो वह रोज तुलसी के पत्ते खाये तो मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है ।

➨ ‘गरुड़ पुराण’ के अनुसार ‘तुलसी का वृक्ष लगाने, पालन करने, सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्मार्जित पाप जलकर विनष्ट हो जाते हैं ।’

➨ कुछ लोग इस पवित्र पौधे का आदर नहीं करते हैं । तुलसी तो माता है । हर घर में तुलसी के 12 पौधे तो होने ही चाहिए ।

➨Tulsi benefits for skin & Hairs : तुलसी के पत्तों का उबटन लगाने से अनेक असाध्य त्वचा रोग दूर होते हैं ।

Does Toothpaste Cause Cancer? Toothpaste Babies Ke Lie safe Hai?

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Does Toothpaste Cause Cancer? Toothpaste Safe for Babies/ Pregnant Ladies/ 1 Year old:

आजकल बाजार में बिकने वाले अधिकांश टूथपेस्टों में फ्लोराइड नामक रसायन का प्रयोग किया जाता है।

यह रसायन शीशे तथा आरसेनिक जैसा विषैला होता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी यदि पेट में पहुँच जाये तो कैंसर जैसे रोग पैदा हो सकते हैं।

अमेरिका के खाद्य एवं स्वास्थ्य विभाग ने फ्लोराइड का दवाओं में प्रयोग प्रतिबंधित किया है।

फ्लोराइड से होने वाली हानियों से संबंधित कई मामले अदालत तक भी पहुँचे हैं। इसेक्स ( इंग्लैंड ) के 10 वर्षीय बालक के माता-पिता को ‘कोलगेट पामोलिव’ कंपनी द्वारा 265 डॉलर का भुगतान किया गया क्योंकि उनके पुत्र को कोलगेट के प्रयोग से फ्लोरोसिस नामक दाँतों की बीमारी लग गयी थी।

अमेरिका के नेशनल कैंसर इन्सटीच्यूट के प्रमुख रसायनशास्त्री द्वारा किये गये एक शोध के अनुसार अमेरिका में प्रतिवर्ष दस हजार से भी ज्यादा लोग फ्लोराइड से उत्पन्न कैंसर के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं।

टूथपेस्टों में फ्लोराइड की उपस्थिति चिन्ताजनक है, क्योंकि यह मसूढ़ों के अन्दर चला जाता है तथा अनेक खतरनाक रोग पैदा करता है।

छोटे बच्चे तो टूथपेस्ट को निगल भी लेते हैं। फलतः उनके लिए तो यह अत्यन्त घातक हो जाता है।

हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही नीम तथा बबूल की दातून का उपयोग करते रहे हैं। इनसे होने वाले अनमोल लाभ ‘लोक कल्याण सेतु’ के अंक क्रमांक 33 तथा 10 में विस्तारपूर्वक प्रकाशित किये जा चुके हैं।

~ बाल संस्कार पाठ्यक्रम साहित्य से

How Lipstick Is Made [Lipstick Kaise Banti Hai]: Truth Exposed

how lipstick is made truth exposed

How Lipstick Is Made with harmful chemicals [Lipstick Kaise Banti Hai]

➢ लिपस्टिक से होठों का प्राकृतिक सौंदर्य नष्ट हो जाता है और वे काले पड़ जाते हैं ।

➢ लिपस्टिक का प्रयोग करने वाली महिलाओं को यदि इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के बारे में जानकारी हो तो वे इसका उसी समय त्याग कर दें।

➢ लिपस्टिक बनाने में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के लिए अनेक जीवों की क्रूरतापूर्वक हत्या की जाती है ।

➢ इसमें उपस्थित ग्लिसरीन सुअर या गौमांस से प्राप्त किया जाता है । इसमें चमक लाने के लिए मछलियों के अवयवों का प्रयोग होता है ।

➢ लाल रंग के लिए कुछ विशेष प्रकार के कीड़ों को मारा जाता है। इसके अतिरिक्त इसके निर्माण में व्हेल मछली की चर्बी तथा पशुओं के शरीर के आंतरिक हिस्सों का भी प्रयोग होता है।

➢ अब लिपस्टिक लगाने वाली माताएँ-बहनें जरा सोचें कि मात्र बाह्य सौंदर्य के लिए वे कितने प्राणियों की आहें ले रही हैं और यह गंदगी अपने होठों पर लगा रही हैं।

~ लोक कल्याण सेतु /अगस्त 2005

Is Chocolate Vegetarian? Or Non Veg.? Vegan? Know Full Details

is chocolate Vegetarian or non veg

Can vegetarians eat chocolate cake ? Is Cadbury/ White Dark Chocolates Vegetarian/ Vegan or Non Veg? Know Full Details Here:

★ चॉकलेट का नाम सुनते ही बच्चों के मन में गुदगुदी न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। बच्चों को खुश करने का एक प्रचलित साधन है “चॉकलेट” !!

★ बच्चों में ही नहीं, वरन् किशोरों तथा युवा वर्ग में भी चॉकलेट ने अपना विशेष स्थान बना रखा है।

★ पिछले कुछ समय से टॉफियों तथा चॉकलेटों का निर्माण करने वाली अनेक कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों में आपत्तिजनक अखाद्य पदार्थ मिलाये जाने की खबरें सामने आ रही हैं। कई कंपनियों के उत्पादों में तो हानिकर रसायनों के साथ-साथ गायों की चर्बी मिलाने तक की बात का रहस्योदघाटन हुआ है।

★ गुजरात के समाचार पत्र ‘गुजरात समाचार’ में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, ‘नेस्ले यू.के. लिमिटेड’ द्वारा निर्मित ‘किटकैट’ नामक चॉकलेट में कोमल बछड़ों के ‘रेनेट’ (मांस) का उपयोग किया जाता है।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि ‘किटकैट’ बच्चों में खूब लोकप्रिय है। अधिकतर शाकाहारी परिवारों में भी इसे खाया जाता है।

नेस्ले यू.के.लिमिटेड की न्यूट्रिशन आफिसर श्रीमति वाल एन्डर्सन ने अपने एक पत्र में बताया किः ‘किटकैट के निर्माण में कोमल बछड़ों के रेनेट का उपयोग किया जाता है। फलतः किटकैट शाकाहारियों के खाने योग्य नहीं है।”

इस पत्र को अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘यंग जैन्स’ में प्रकाशित किया गया था। अतः सावधान रहो ऐसी कंपनियों के कुचक्रों से !

★टेलिविजन पर अपने उत्पादों को शुद्ध दूध पीने वाले अनेक कोमल बछड़ों के मांस की प्रचुर मात्रा अवश्य होती है।

★हमारे धन को अपने देशों में ले जाने वाली ऐसी अनेक विदेशी कंपनियाँ हमारे सिद्धान्तों तथा परम्पराओं को तोड़ने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

व्यापार तथा उदारीकरण की आड़ में भारतवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

★सन् 1857 में अंग्रेजों ने कारतूसों में गायों की चर्बी का प्रयोग करके सनातन संस्कृति को खण्डित करने की साजिश की थी परन्तु मंगल पाण्डेय जैसे वीरों ने अपनी जान पर खेलकर उनकी इस चाल को असफल कर दिया।

अभी फिर यह नेस्ले कम्पनी चालें चल रही है। अभी मंगल पाण्डेय जैसे वीरों की जरूरत है। ऐसे वीरों को आगे आना चाहिए।

★हमारे देश को खण्ड-खण्ड करने के मलिन मुरादे रखने वालों और हमारी संस्कृति पर कुठाराघात करने वालों को सबक सिखाना चाहिए।

★लेखकों, पत्रकारों, प्रचारकों को उनका डटकर विरोध करना चाहिए। देव संस्कृति, भारतीय समाज की सेवा में सज्जनों को साहसी बनना चाहिए। इस ओर सरकार का भी ध्यान खिंचवाना चाहिए।

★ऐसे हानिकारक उत्पादों के उपभोग को बंद करके ही हम अपनी संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। इसलिए हमारी संस्कृति को तोड़ने वाली ऐसी कम्पनियों के उत्पादों के बहिष्कार का संकल्प लेकर आज और अभी से भारतीय संस्कृति की रक्षा में हम सबको कंधे से कंधा मिलाकर आगे आना चाहिए।

~ बाल संस्कार पाठ्यक्रम..

कहीं आप जहर तो नहीं खा-पी रहे हैं ??

वर्तमान समय में प्लास्टिक मानव-जीवन के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी एक गम्भीर समस्या बन गया है । प्लास्टिक के बर्तनों, थैलियों, कप-प्लेटों, दूध व पानी की बोतलों, लंच बॉक्सों में खाद्य व पेय पदार्थ कुछ समय तक रखे रहने पर रासायनिक क्रियाएँ होने से वे विषाक्त हो जाते हैं। इनका सेवन मधुमेह (diabetes), पेट की बीमारियाँ, प्रजनन- संबंधी समस्याएँ, याददाश्त की कमी…. जैसी गम्भीर बीमारियाँ पैदा करता है । शोधकर्ताओं ने कहा है कि: प्लास्टिक की वस्तु में खाद्य पदार्थ रखने, विशेषकर गर्म पदार्थ डालने से कैंसर करनेवाले रसायन उसमें मिल जाते हैं और भविष्य में कैंसर की बीमारी का कारण बनते हैं।

जहर से खेल रहे हैं बच्चे !

दूध की प्लास्टिक बोतल आदि में रासायनिक द्रव्य की कोटिंग होती है। उस बोतल में या थैली में गर्म दूध डालने पर हानिकारक रसायन दूध में मिल जाते हैं। अत: छोटे बच्चों को प्लास्टिक की बोतल की जगह धातु की बनी कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना चाहिए।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने अपने अध्ययन में कहा कि बच्चों के दाँत निकलते समय उन्हें दिये जानेवाले खिलौनों ( teether ) में बहुत खतरनाक रसायन होते हैं।

अतः बच्चों को प्लास्टिक के टीथर देने के बजाय खीरे या गाजर के बड़े टुकड़े ( जिन्हें बच्चे निगल न सके ) दे सकते हैं।

बच्चों को प्लास्टिक-निर्मित किसी भी प्रकार के खिलौने देना हानिकारक है क्योंकि उन्हें वे प्रायः मुँह में डाल लेते हैं।

– लोक कल्याण सेतु, मई 2019

सत्संग का प्रभाव रक्त पर….

➠ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में डिलाबार प्रयोगशाला में बार-बार एक प्रयोग किया गया कि आपके अपने विचारों का प्रभाव तो आपके रक्त पर पड़ता ही है परन्तु आपके विषय में शुभ अथवा अशुभ विचार करनेवाले अन्य लोगों का प्रभाव आपके रक्त पर कैसा पड़ता है और आपके अन्दर कैसे परिवर्तन होते हैं।

➠ वैज्ञानिकों ने अपने दस वर्ष के परिश्रम के पश्चात् यह निष्कर्ष निकाला कि :

“आपके लिए जिनके ह्रदय में मंगल भावना भरी हो, जो आपका उत्थान चाहता हो ऎसे व्यक्ति के संग में जब आप रहते हैं तब आपके प्रत्येक घन मि.मी. रक्त में 1500 श्वेतकणों का वर्धन एकाएक हो जाता है । इसके विपरीत आप जब किसी द्वेषपूर्ण अथवा दुष्ट विचरोंवाले व्यक्ति के पास जाते हो तब प्रत्येक घन मि.मी रक्त में 1600 श्वेतकण तत्काल घट जाते हैं ।”

➠ वैज्ञानिकों ने तुरन्त लहू-निरीक्षण उपरान्त यह निर्णय प्रकट किया है ।  जीवविज्ञान कहता है कि रक्त के श्वेतकण ही हमें रोगों से बचाते हैं और अपने आरोग्य की रक्षा करते हैं । 

➠ वैज्ञानिकों को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शुभ विचारवाले, सबका हित चाहनेवाले, मंगलमूर्ति सज्ज्न पुरुषों  में ऎसा क्या होता है कि जिनके दर्शन से अथवा जिनके सान्निध्य में आने से इतना परिवर्तन आ जाता है ? अपना योगविज्ञान तो पहले से जानता है परन्तु अब आधुनिक विज्ञान भी इसे सिद्ध करने लगा है ।

➠ रक्त में जब इतना परिवर्तन होता है तब अन्य कितने अदृश्य एवं अज्ञात परिवर्तन होते होंगे जो कि विज्ञान के जानने में न आते हों ?

~ मन को सीख साहित्य से

पेनकिलर पेन को नहीं मारती…!!

क्या आप जानते हैं कि दर्द-निवारक दवाइयाँ शरीर की महत्त्वपूर्ण क्रियाओं में भी कमी ला देती हैं ??


अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार दर्द-निवारक दवाइयाँ टूटी हड्डियों के जुड़ने की प्रक्रिया पर हानिकारक असर डालती हैं। ‘न्यू साइंटिस्ट’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार एस्प्रिन और ब्रूफेन जैसी दर्द-निवारक दवाइयां फ्रैक्चर के ठीक होने की प्रक्रिया को धीमी कर देती हैं, अथवा रोक देती हैं।

न्यूजर्सी विश्वविद्यालय के डॉ. पैट्रिक ओ.कोन्नौर के नेतृत्व में ऐसे चूहों पर परीक्षण किये गये जिनकी हड्डियाँ टूटी हुई थीं।
शोधकर्ताओं ने इन चूहों को ‘रोपोकोसिब’ और ‘सेलिकोसिब’ नामक दर्द-निवारक दवाइयाँ दी। परीक्षणों में पाया गया कि रोपोकोसिब खानेवाले चूहों की हड्डियाँ जुड़ी ही नहीं, जबकि सेलिकोसिब खानेवाले चूहों की कुछ ही हड्डियों जुड़ पायी।

लोग आमतौर पर दर्द से बचने के लिए ‘पेन किलर’ लेते हैं पर वास्तव में वह ‘पेन’ ( दर्द ) को नहीं मारती, पेन की खबर देनेवाले ज्ञानतंतुओं को शिथिल कर देती है।

स्वास्थ्य के लिए हानिकर : रात्रि-जागरण

‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस’ पत्रिका में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन के अनुसार रात्रि-जागरण हमारे शरीर के डी.एन.ए को गम्भीर नुकसान पहुंचाता है। डी.एन.ए हमारी कोशिकाओं के केन्द्र में मौजूद वह महत्त्वपूर्ण तत्त्व है जिसमें हमारी आनुवांशिक विशेषताओं की जानकारी होती है। जैसे – हमारे बालों का रंग, आँखों का रंग क्या होगा ? या हमें कौन-कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं ?

सरी विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) में शोधकर्ताओं ने २२ स्वस्थ लोगों का विश्लेषण किया और उनके सोने के समय में लगातार ३ दिनों तक ४ घंटे की देरी की। शोधकर्ताओं ने यह पाया कि सभी २२ लोगों के जीन्स की लय को गहरा नुकसान पहुँचा है। ९७% से अधिक जीन्स जो पहले तालबद्ध थे, सोने का समय बदलने से अपनी लय खो चुके थे। ये जीन्स हमारे डी.एन.ए का ६% हिस्सा होते हैं और बीमारियों के खिलाफ हमारे शरीर के रक्षाकवच का काम करते हैं। शोधकर्ताओं ने नतीजा निकाला कि लम्बे समय तक रात में काम करना शरीर के लिए गम्भीर स्वास्थ्य – समस्याएँ पैदा कर सकता है।

📚फरवरी 2014/लोक कल्याण सेतु

विदेशों में बढ़ी देशी गायों की माँग| Desi Cow’s Demand in US, UK

भारतीय देशी गायों में अधिक तापमान बर्दाश्त करने की अद्भुत क्षमता है । इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता, पौष्टिक तत्वों की कम जरूरत और रख-रखाव में आसान होने के कारण दुनिया के प्रमुख राष्ट्र इनका आयात कर रहे हैं ।

केन्द्र सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ योजना के तहत बनायी गयी गौशालाओं में ६० प्रतिशत देशी दुधारू गायें तथा ४० प्रतिशत बिना दूध देनेवाली गायें रखी जायेंगी । पूज्य बापूजी ने भी सालों पूर्व ऐसी ही पहल करते हुए कत्लखाने ले जायी जा रहीं, बिल्कुल दूध न देनेवाली हजारों गायों की गौशालाएँ बनाकर संरक्षण-संवर्धन किया है ।

यह कैसा मनोरंजन !

पूर्वी केन्या में एक स्कूल के छात्रों ने वीडियो फिल्म शो और डिस्को पर प्रतिबंध लगाने सम्बंधी शिक्षकों के आदेश के विरोध में अपने ही स्कूल को आग लगा दी और वहाँ रखे कम्प्यूटरों को लेकर फरार हो गये।

दैनिक समाचार पत्र ‘द ईस्ट अफ्रीकन स्टैंडर्ड डेली’ के अनुसार शिक्षकों ने परीक्षा की दृष्टि से यह प्रतिबंध लगाया था ताकि छात्रों को पढ़ाई का मौका मिल सके। इस आदेश के खिलाफ करीब साढ़े सात सौ स्कूली छात्रों ने जमकर उत्पात मचाया और स्कूल में तोड़-फोड़ की। पुलिस ने इन छात्रों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े। समाचार पत्र में स्कूल के जले हिस्सों की अनेक तस्वीरें छपी थीं।

बच्चे टी.वी. पर हिंसक फिल्में देखते हैं।
समाजशास्त्रियों एवं मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ये फिल्में जनमानस में जहर घोल रही हैं। फिल्मों में बढ़ती हिंसा और अश्लीलता के प्रदर्शन का जो विष वातावरण में घुल रहा है। उसकी पहुँच टीवी. के माध्यम से घर-घर तक हो रही है और आम लोगों के मन-मस्तिष्क दूषित हो रहे हैं। इससे अनगिनत लोगों का आचरण बिगड़ रहा है और शारीरिक व मानसिक रूप से वे विकृत और बीमार हो रहे है।

फिल्म-निर्माता पैसे के लिए अपनी फिल्मों में अनावश्यक क्रूरता, पाशविकता और परपीड़ा के दृश्य ठूंसते हैं। विशेष प्रभाव पैदा करनेवाली तकनीक की सहायता से इन दृश्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाता है। ऐसे दृश्य एक बार नहीं, विभिन्न कार्यक्रमों में बार-बार दिखाये जाते है। तना अधिक हिंसक और अश्लील दृश्य होगा, उतना हा अधिक बार उसे दिखाया जाता है। इस तरह बच्चों, किशोरों और युवाओं के मन मस्तिष्क पर इसका गहरा असर पड़ता है तथा हिंसा और अश्लीलता का जहर उनको लगातार पंगु बनाता जाता है। फिल्मों, विडियो फिल्मों और टी.वी. चैनलों द्वारा प्रदर्शित ये दृश्य बच्चों के कोमल मन पर इतना खराब प्रभाव छोड़ रहे हैं कि वे उससे बहुत समय तक मुक्त नहीं हो सकेंगे। मासूम पीढ़ी का जीवन अंधकारमय हो रहा है। उनकी सोच नकारात्मक हो रही है और कदम गलत दिशा में बढ़ रहे हैं। नैतिकता और मर्यादा नष्ट करनेवाले फैशन, विलासिता, मारधाड़, अपराध, सेक्स, व्यसन, फिजूलखर्ची व चरित्रहीनता के दृश्य फिल्मों व टी.वी. कार्यक्रमों में भरे पड़े हैं। इनके दूषित और हानिकारक प्रभाव विनाशकारी सिद्ध हो रहे हैं। ये फिल्में मनोरंजन नहीं करती बल्कि बल, बुद्धि व ओज का नाश करके विनाश की तरफ ले जाती हैं।