वर्तमान समय में प्लास्टिक मानव-जीवन के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी एक गम्भीर समस्या बन गया है । प्लास्टिक के बर्तनों, थैलियों, कप-प्लेटों, दूध व पानी की बोतलों, लंच बॉक्सों में खाद्य व पेय पदार्थ कुछ समय तक रखे रहने पर रासायनिक क्रियाएँ होने से वे विषाक्त हो जाते हैं। इनका सेवन मधुमेह (diabetes), पेट की बीमारियाँ, प्रजनन- संबंधी समस्याएँ, याददाश्त की कमी…. जैसी गम्भीर बीमारियाँ पैदा करता है । शोधकर्ताओं ने कहा है कि: प्लास्टिक की वस्तु में खाद्य पदार्थ रखने, विशेषकर गर्म पदार्थ डालने से कैंसर करनेवाले रसायन उसमें मिल जाते हैं और भविष्य में कैंसर की बीमारी का कारण बनते हैं।

जहर से खेल रहे हैं बच्चे !

दूध की प्लास्टिक बोतल आदि में रासायनिक द्रव्य की कोटिंग होती है। उस बोतल में या थैली में गर्म दूध डालने पर हानिकारक रसायन दूध में मिल जाते हैं। अत: छोटे बच्चों को प्लास्टिक की बोतल की जगह धातु की बनी कटोरी-चम्मच से दूध पिलाना चाहिए।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने अपने अध्ययन में कहा कि बच्चों के दाँत निकलते समय उन्हें दिये जानेवाले खिलौनों ( teether ) में बहुत खतरनाक रसायन होते हैं।

अतः बच्चों को प्लास्टिक के टीथर देने के बजाय खीरे या गाजर के बड़े टुकड़े ( जिन्हें बच्चे निगल न सके ) दे सकते हैं।

बच्चों को प्लास्टिक-निर्मित किसी भी प्रकार के खिलौने देना हानिकारक है क्योंकि उन्हें वे प्रायः मुँह में डाल लेते हैं।