Eating Food with Hands Benefits [Hath Se Khana Khane Ke Labh]

benefits of eating with hands

Eating Food with Hands Benefits in Hindi [Hath Se Khana Khane Ke Fayde]:

आजकल पाश्चात्य रहन-सहन से प्रभावित होकर हाथों से भोजन करने के बजाय चम्मच और काँटों के उपयोग का प्रचलन बढ़ रहा है । हाथों से भोजन करने के लाभों से हम परिचित नहीं हैं ।

➨ हमारा शरीर पाँच तत्वों से बना है । मुद्रा विज्ञान के अनुसार हमारे हाथों से ऊर्जा का तीव्र बहाव होता रहता है । अँगूठा अग्नि, तर्जनी उँगली वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका पृथ्वी व कनिष्ठिका जल-तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं । इन पाँचों तत्वों का असंतुलित होना विभिन्न बीमारियों की जड़ है।

➨ हाथ से भोजन करते समय हम उँगलियों और अँगूठे को मिलाकर भोजन करते हैं, जिससे पाँचों तत्व एकजुट हो जाते हैं और भोजन ज्यादा ऊर्जादायक व स्वास्थ्यप्रद बन जाता है । इससे हमारे प्राणाधार की ऊर्जा भी संतुलित रहती है ।

➨ भोजन करने के लिए जब हम भोजन को स्पर्श करते हैं तो हमारा मस्तिष्क पेट को यह संकेत देता है कि हम भोजन करने वाले हैं । इससे हमारा पेट भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है और पाचन-क्रिया सुधरती है ।

➨ हाथ एक अच्छे तापमान-संवेदक का काम भी करता है । भोजन यदि ज्यादा गर्म होता है तो उसे मुँह में नहीं लेते । इस प्रकार यह जीभ को जलने से बचाता है ।

➨ अतः चम्मच को छोड़कर हाथों से भोजन करना सर्व प्रकार से लाभदायी है..

~ लोक कल्याण सेतु , सितम्बर 2017, अंक नंबर 243 से..

Drugs, Tabacco & Alcohol : Nasha Mukt Samaj ki Aur

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Drugs, Tabacco, Alcohol, Cigarette Mukt Samaj: नशा क्या है….. ? संत श्री आशारामजी बापू कहते हैं : “जिसमें शांति न हो उसे ‘नशा’ कहते हैं ।”

गुटखा, बीड़ी, दारू या कोई भी व्यसन तन-मन को भयंकर हानि पहुंचाते हैं ।

इनसे इच्छाशक्ति दुर्बल होती है । मनुष्य देवता जैसा बनने के बदले पशु से भी बदत्तर बन जाता है । इनके चंगुल से मुक्त होने में ही सार है |

नशा व्यक्ति को खोखला कर देता है ।

शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तम्बाकू आदि से शरीर, मन, बुद्धि व संकल्पशक्ति के साथ रोगप्रतिकारक शक्ति भी क्षीण हो जाती है ।

इससे शरीर कई प्रकार के रोगों का घर बन जाता है, बहुत से लोग तो अकाल मृत्यु के भी शिकार हो जाते हैं ।

यह बात नशा करने वाले को पता तो है परंतु गंदी आदत की ललक के आगे संकल्पबल कमजोर पड़ने से वह व्यसन छोड़ नहीं पाता ।

ऐसी स्थिति से निकलने के लिए संतों-महापुरुषों की शरण में जाना ही एकमात्र उपाय है ।

वे सामर्थ्य, सद्भाव और शुभ संकल्प के अक्षय भंडार होते हैं ।

उनकी मीठी नजर पड़ने पर असाध्य लगने वाले कार्य भी सरलता से हो जाते हैं ।

Happiness(Laughter Yoga) increases Self Confidence/ Atma vishwas

atmavishwas kaise badhaye self confidence

Know Laughter Yoga (Hasya Yog) Importance/ Benefits in Hindi :Laughter Yoga  increases Self Confidence/ Atma vishwas.

‘ऋग्वेद’ में आता है..~

“विश्वाहा वयं सुमनस्यमानाः ।”

‘हम सदा ही अपने को प्रसन्न रखें ।’ 

➠  खुशी जैसी खुराक नहीं और चिंता जैसा गम नहीं। भगवन्नाम या ॐकार आदि के उच्चारण के साथ हास्य करने से बहुत सारी बीमारियाँ मिटती हैं और रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है । हास्य आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है ।

➠ एक होता है ‘लाफिंग क्लब’ वाला असुर-दानव हास्य, जो हू-हू… हा-हा… करके किया जाता है ।

➠ दूसरा होता है देव-मानव हास्य, जिसमें पहले तालियाँ बजाते हुए भगवन्नाम के जल्दी-जल्दी उच्चारण के द्वारा पापनाशिनी शक्ति को उभारा जाता है और भगवद्भाव को बढ़ाया जाता है, फिर दोनों भुजाओं को ऊपर उठाकर भगवत्समर्पण के भाव के साथ हास्य किया जाता है । असुर-दानव हास्य से शारीरिक लाभ होते हैं किंतु देव-मानव हास्य से शारीरिक लाभ के साथ-साथ आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों लाभ होते हैं ।

➠ असुर-दानव हास्य में गर्भवती महिला के लिए गर्भपात, हृदयरोग के मरीज के लिए हृदयाघात जैसे कुछ खतरे हैं, देव-मानव हास्य में कोई खतरा नहीं है ।
इस हास्य में सबकी भलाई निहित होती है ।

➠ पूज्य बापू जी अपने सत्संग कार्यक्रमों में हरिनाम उच्चारण के साथ ʹदेव-मानव हास्य-प्रयोग कराते हैं। पूज्य श्री का कहना हैः “भारतीय संस्कृति की देन ʹदेव-मानव हास्यʹ को ही पाश्चात्य जगत ने विकृत रूप देकर ʹलाफिंग क्लबोंʹ के द्वारा प्रचारित किया है।.

➠ ʹलाफिंग क्लबोंʹ में हँसने की जबरन कोशिश की जाने के कारण उसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है, जबकि हरि का नाम लेकर स्वयं को ईश्वरीय आनंद से सराबोर करके स्वतः स्फुरित होने वाला ʹदेव-मानव हास्यʹ यकृत, गुर्दे, हृदय तथा गर्भाशय की कई बीमारियों को दूर करता है व वातावरण को हरिमय एवं उल्लासमय बनाता है।

➠ हास्य को सदियों से ही शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का महत्त्वपूर्ण साधन माना गया है। दिन की शुरुआत में कुछ समय हँसने से आप दिन भर स्वयं को तरोताजा एवं ऊर्जा (स्फूर्ति) से भरपूर अनुभव करेंगे।

▣ देव-मानव हास्य-प्रयोग के लाभ 

➠ हास्य से फेफड़ों का बढ़िया व्यायाम हो जाता है, श्वास लेने की क्षमता बढ़ जाती है, रक्त का संचार कुछ समय के लिए तेज हो जाता है और शरीर में लाभकारी परिवर्तन होने लगते हैं।

➠ हँसने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, अतः हँसकर फिर भोजन करने से वह शीघ्रता से पच जाता है। खूब हँसने से रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा एवं वीर्य की वृद्धि होती है। 

➠ चिंता, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष आदि विषाक्त मनोभावों से हमारे शरीर में जिन विषों की उत्पत्ति होती रहती है, हास्य उनका परिशोधक है।

हँसते के साथ हँसे दुनिया,
रोते को कौन बुलाता है

❀ पूज्य बापू जी के शब्दों में-

मुस्कराकर गम का जहर जिसको पीना आ गया।
यह हकीकत है कि जहाँ में उसको जीना आ गया।।

➠ जो अति दुःखी रहते हैं, जिनके लिए हँसना कठिन है, उनके लिए पूज्य बापू जी ने कहा हैः ʹʹनाक से 12 से 15 खूब गहरे श्वास लें और मुँह से छोड़ें। श्वास लेते समय ʹरामʹ व छोड़ते समय ʹकृष्णʹ की भावना करें तो विशेष लाभ होगा और प्रेमावतार, प्रसन्नतादाता की कृपा का अनुभव सहज में ही होगा।

➠ इस प्रयोग से उदास चेहरे वाला भी हँसमुख बन जायेगा और प्रसन्नता, खुशी उसके अपने घर की खेती हो जायेगी।”

~  लोक कल्याण सेतु, नवम्बर 2011

Adhik Maas / Purushottam Maas 2020 Date, Kya Kare, Kya Na Kare?

purushottam maas mein kya karein kya na karein

Adhik Maas / Purushottam Maas 2020 Kya Kare, Kya Na Kare?

Adhik Maas 2020 Date Or Purushottam Maas 2020 Date

अधिक – पुरुषोत्तम मास 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर 2020

◆ Purushottam Maas Me Kya Kare ?

(१) आँवला और तिल के उबटन से स्नान पुण्यदायी और स्वास्थ्य व प्रसन्नतावर्धक है।

(२) आँवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करना अधिक प्रसन्नता और स्वास्थ्य देता है।

(३) भगवन्नाम-जप, कीर्तन, भगवद्स्मरण, ध्यान, दान, स्नान आदि तथा पुत्रजन्म के कृत्य, पितृमरण के श्राद्ध आदि एवं गर्भाधान, पुंसवन जैसे संस्कार किये जा सकते हैं।

(४) दीपक-दान से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, दुःख-शोकों का नाश होता है, वंशदीप बढ़ता है, ऊँचा सान्निध्य मिलता है, आयु बढ़ती है।

(५) गीता के १५ वें अध्याय का अर्थ सहित प्रेमपूर्वक पाठ करना और गायों को घास व दाना दान करना चाहिए ।
   – गीता का १५ वां अध्याय पढ़ें अथवा डाउनलोड करें Click Here

(६) ‘देवी भागवत’ के अनुसार यदि दान आदि का सामर्थ्य न हो तो संतों-महापुरुषों की सेवा (उनके दैवी कार्यों में सहभागी होना) सर्वोत्तम है । इससे तीर्थस्नान, तप आदि के समान फल प्राप्त होता है।

(७) इस मास में किये गये निष्काम कर्म कई गुना विशेष फल देते हैं।

(८) भक्तिपूर्वक सद्गुरु से अध्यात्म विद्या का श्रवण करने से ब्रह्महत्या जनित भयंकर पाप भी नष्ट हो जाते हैं तथा दिन-प्रतिदिन अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। निष्काम भाव से यदि श्रवण किया जाए तो जीव मुक्त हो जाता है।

Purushottam Maas Me Kya Nahi Kare ?

(१) पुरुषोत्तम मास व चतुर्मास में नीच कर्मों का त्याग करना चाहिए। वैसे तो सदा के लिए करना चाहिए लेकिन आरम्भ वाला भक्त इन्हीं महीनों में त्याग करे तो उसका नीच कर्मों के त्याग का सामर्थ्य बढ़ जायेगा।

(२) इस मास में विवाह अथवा सकाम कर्म एवं सकाम व्रत वर्जित है । अतः कर्म संसारी कामनापूर्ति के लिए नहीं, ईश्वर के लिए करना ।

~ ऋषि प्रसाद अप्रैल २०१८

पुण्य प्रदाता पुरुषोत्तम मास (अधिक मास)

Sharad Ritu [शरद ऋतु] 2020 Health Tips, Foods to Eat Hindi

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Sharad Ritu [शरद ऋतु 2020] Health Tips & Foods; Kya Khana Chaiye, Kya Nahi Khana Chaiye.

( शरद ऋतु : 22 अगस्त से 21 अक्टूबर तक )

शरद ऋतु में ध्यान देने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें :

(1) ‘रोगाणां शारदी माता ।’ रोगों की माता है यह शरद ऋतु ।

वर्षा ऋतु में संचित पित्त इस ऋतु में प्रकुपित होता है । इसलिए शरद पूर्णिमा की चाँदनी में उस पित्त का शमन किया जाता है ।

इस मौसम में खीर खानी चाहिए । खीर को भोजनों में ‘रसराज’ कहा गया है ।

सीता माता जब अशोक वाटिका में नजरकैद थीं तो रावण का भेजा हुआ भोजन तो क्या खायेंगी, तब इन्द्र देवता खीर भेजते थे और सीताजी वह खाती थीं ।

(2) इस ऋतु में दूध, घी, चावल, लौकी, पेठा, अंगूर, किशमिश, काली द्राक्ष तथा मौसम के अनुसार फल आदि स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं ।

गुलकंद खाने से भी पित्तशामक शक्ति पैदा होती है ।

रात को (सोने से कम-से-कम घंटाभर पहले) मीठा दूध घूँट-घूँट मुँह में बार-बार घुमाते हुए पियें ।

दिन में 7-8 गिलास पानी शरीर में जाए, यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है । (किशमिश व गुलकंद संत श्री आशारामजी आश्रम व समिति के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं । )

(3) खट्टे, खारे, तीखे पदार्थ व भारी खुराक का त्याग करना बुद्धिमत्ता है ।

तली हुईं चीजें, अचार वाली खुराक, रात को देरी से खाना अथवा बासी खुराक खाना और देरी से सोना स्वास्थ्य के लिए खतरा है क्योंकि शरद ऋतु रोगों की माता है ।

कोई भी छोटा-मोटा रोग होगा तो इस ऋतु में भड़केगा इसलिए उसको बिठा दो ।

(4) शरद ऋतु में कड़वा रस बहुत उपयोगी है । कभी करेला चबा लिया, कभी नीम के 10-12 पत्ते चबा लिये ।

यह कड़वा रस खाने में तो अच्छा नहीं लगता लेकिन भूख लगाता है और भोजन को पचा देता है ।

(5) पाचन ठीक करने का एक मंत्र भी है :

अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च वडवानलम् ।
आहारपरिपाकार्थं स्मरेद् भीमं च पंचमम् ।।

यह मंत्र पढ़ के पेट पर हाथ घुमाने से भी पाचनतंत्र ठीक रहता है ।

(6) बार-बार मुँह चलाना (खाना) ठीक नहीं, दिन में दो बार भोजन करें और वह सात्विक व सुपाच्य हो ।

भोजन शांत व प्रसन्न होकर करें । भगवन्नाम से आप्लावित (तर, नम) निगाह डालकर भोजन को प्रसाद बना के खायें ।

(7) 50 साल के बाद स्वास्थ्य जरा नपा-तुला रहता है, रोगप्रतिकारक शक्ति दबी रहती है ।

इस समय नमक, शक्कर और घी-तेल पाचन की स्थिति पर ध्यान देते हुए नपा-तुला खायें, थोड़ा भी ज्यादा खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ।

(8) अगर स्वस्थ रहना है और सात्विक सुख लेना है तो सूर्योदय के पहले उठना न भूलें ।

आरोग्य और प्रसन्नता की कुंजी है सुबह-सुबह वायु-सेवन करना ।

सूरज की किरणें नहीं निकली हों और चन्द्रमा की किरणें शांत हो गयी हों उस समय वातावरण में सात्विकता का प्रभाव होता है ।

वैज्ञानिक भाषा में कहें तो इस समय ओजोन वायु खूब मात्रा में होती है और वातावरण में ऋणायनों का प्रमाण अधिक होता है । वह स्वास्थ्यप्रद होती है ।

सुबह के समय की जो हवा है वह मरीज को भी थोड़ी सांत्वना देती है ।

– पूज्य बापूजी

~BSK Pathyakram August 2020

Best Time to Eat Breakfast, lunch, Dinner For Good Health Hindi

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Khana Jaldi Pachane Ki Tips in Hindi [Gas Problem ka ilaj/ upay] : पहले का खाया हुआ भोजन जब पच जाए तभी उचित मात्रा में दूसरी बार भोजन करना चाहिए अन्यथा सभी रोगों का जड़ ‘अजीर्ण रोग’ हो जाता है। दिन में बारम्बार खाते रहने वालों के पेट को आराम न मिल पाने से उन्हें पेट की गड़बड़ियाँ एवं उनसे उत्पन्न होने वाले अन्य अनेकानेक रोगों का शिकार होना पड़ता है। अनुचित समय में किया हुआ भोजन भी ठीक से न पचने के कारण अनेक रोगों को उत्पन्न करता है।

सुबह की अपेक्षा शाम का भोजन हल्का व कम मात्रा में लेना चाहिए। रात को अन्न के सूक्ष्म पचन की क्रिया मंद हो जाती है… अतः सोने से ढाई तीन घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अधिक भोजन की आवश्यकता नहीं होती अपितु जो भोजन खाया जाता है उसका पूर्ण पाचन अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।

Best Time to Eat Breakfast, lunch, Dinner in Hindi

सुबह का भोजन 9 से 11 बजे के बीच और शाम का भोजन 5 से 7 बजे के बीच कर लेना चाहिए। शाम को प्राणायाम आदि संध्या के कुछ नियम करके भोजन करें तो ज्यादा ठीक रहेगा। भोजन के बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीना चाहिए। भोजन के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए अपितु पौने दो घंटे के बाद प्यास के अनुरूप पानी पीना हितावह है।

Important Tips for Healthy Diet Plans : Bhojan Karte Samaye in Chizo ka Dhyan Rake

◆स्वच्छ, पवित्र स्थान पर शांत व प्रसन्नचित्त होकर भोजन करें।

◆भोजन भगवान का प्रसाद समझकर बिना किसी प्रतिक्रिया के समभाव एवं आदरपूर्वक करना चाहिए।

◆खड़े-खड़े खाने से आमाशय को भोजन पचाने में अधिक श्रम करना पड़ता है। अतः यथासम्भव सुखासन में बैठकर भोजन करना चाहिए

◆भोजन भूख से कुछ कम करें।

◆भोजन में विपरीत प्रकृति के पदार्थ न हों, जैसे दूध और नमकयुक्त पदार्थ, अधिक ठंडे और अधिक गर्म पदार्थ एक साथ नहीं खाने चाहिए।

◆भोजन करते समय सूर्य (दायाँ) स्वर चलना चाहिए ताकि भोजन का पाचन ठीक से हो। (स्वर बदलने की विधि हेतु पढ़ें ‘ऋषि प्रसाद’ जनवरी 2017, पृष्ठ 32)

◆भोजन में अधिक व्यंजनों का उपयोग न हो। भोजन ताजा, सुपाच्य व सादा हो। जिन व्यंजनों को बनाने में अधिक मेहनत लगती है, उनको पचाने के लिए जठराग्नि को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

स्रोतः ऋषि प्रसाद, सितम्बर 2017, पृष्ठ संख्या 30, अंक 297

Bathing Tips For Kids/ Students: Nahane Ka Sahi Tarika in Hindi

Nahane ka sahi tarika

Bathing Tips For Kids Steps on how to take a bath properly in Hindi [Nahane Ka Sahi Tarika]

जल्दी-जल्दी नहाना या शुरू में पैरों पर पानी डालना हानिकारक है, सिर पर डालना चाहिए । सिर को बराबर रगड़ के फिर ज़रा गर्दन को रगड़ लगा दी और दायें कान के पीछे हड्डी के उभरे हुए भाग पर जरा-सा उंगली से मल लिया, जिससे बुद्धि शक्ति और साहस बढाने में मदद मिलेगी।

स्नान के बाद भ्रामरी प्राणायाम और सारस्वत्य मंत्र, गुरुमंत्र या भगवन्नाम का जप करो। सूर्यस्नान व सूर्य नमस्कार करने और सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर तंदुरुस्त तथा बुद्धि विशेष रूप से विकसित होगी।

How to Live Long Life | Long Healthy Life Secrets in Hindi

Healthy Life Secrets

Tips How to Live Long Life | Long Healthy Life Secrets in Hindi Lambi Umar Paane ke Upaye/ Niyam:

प्रत्येक मनुष्य दीर्घ, स्वस्थ और सुखी जीवन चाहता है। यदि स्वस्थ और दीर्घजीवी (Long Healthy Life) बनना हो तो कुछ नियमों को अवश्य समझ लेना चाहिए~

➠ आसन-प्राणायाम, जप-ध्यान, संयम-सदाचार आदि से मनुष्य दीर्घजीवी होता है।

➠ मोटे एवं सूती वस्त्र ही पहनें। सिंथेटिक वस्त्र स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं हैं।

➠ विवाहित हों तो संयम-नियम से रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करें।

➠ आज जो कार्य करते हैं, सप्ताह में कम-से-कम एक दिन उससे मुक्त हो जाइये। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जो आदमी सदा एक जैसा काम करता रहता है उसको थकान और बुढ़ापा जल्दी आ जाता है।

➠ चाय-कॉफी, शराब-कबाब, धूम्रपान बिल्कुल त्याग दें। पान मसाले की मुसीबत से भी सदैव बचें। यह धातु को क्षीण व रक्त को दूषित करके कैंसर को जन्म देता है। अतः इसका त्याग करें।

➠ लघुशंका करने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, न ही पानी पीने के तुरंत बाद लघुशंका जाना चाहिए। लघुशंका करने की इच्छा हुई हो तब पानी पीना, भोजन करना, मैथुन करना आदि हितकारी नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से भिन्न-भिन्न प्रकार के मूत्ररोग हो जाते हैं. ऐसा वेदों में स्पष्ट बताया गया है।

➠ मल-मूत्र का वेग (हाजत) नहीं रोकना चाहिए, इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है व बीमार भी पड़ सकते हैं। अतः कुदरती हाजत यथाशीघ्र पूरी कर लेनी चाहिए।

➠ प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाना, सुबह-शाम खुली हवा में टहलना उत्तम स्वास्थ्य की कुंजी है।
दीर्घायु व स्वस्थ जीवन के लिए प्रातः कम से कम 5 मिनट तक लगातार तेज दौड़ना या चलना तथा कम से कम 15 मिनट नियमित योगासन करने चाहिए।

Sweets/ Mithai Par Chandi ka Vark [Silver Foil] Kaise Banta hai

bazaru mithayion se savdhan

Mithai Par Chandi ka Vark [Silver Foil] Kaise Banta hai – Fayde ya Nuksan:

➠  मिठाइयों पर जो चाँदी के वर्ख लगते हैं वो भी बैलों की आँतों का उपयोग कर के बनाए जाते हैं …सावधान…!!

➠  बाजार में बेसन की मिठाई मिलती है .. तो बेसन ४० रुपये किलो है और चावल का आटा १८ रुपये किलो ..तो मिठाई दोनों को मिक्स कर के बनाते हैं तो और भी सत्यानाश है…..

➠  मावे की मिठाइयाँ अथवा जो भी verity हैं, मावे से बनने वाली आगे चल के बहुत नुकसान करती हैं..सीधा दूध, लस्सी ये तो फायदा करता है..लेकिन दूध में से जो वैरायटियां बनती हैं जैसे पनीर, रसगुल्ले आदि नुकसान करते हैं..

➠  आपका शरीर स्वस्थ रहे, इसलिए मिठाइयों को नपे तुले ढंग से उपयोग में लायें… बाजारू मिठाई से सावधान रहें..!! नपी-तुली खाएं ।

3 Foods Bad For Eyes [Aankh] & Teeth [Daant]- FastFood, IceCream

foods bad for eyes and teeth

Foods Bad For Aankh aur Danth ki Health. Reason of Eyes Weakness & Reason of Teeth Decay of Children in Hindi :

FastFood: डबल रोटी (ब्रेड), पिज़्ज़ा, बर्गर, बिस्कुट आदि खाद्य पदार्थों में मैदा, यीस्ट (खमीर) आदि होते हैं। वे आँतों में जाकर जम जाते हैं जिससे कब्ज, बदहज़मी, गैस, कमजोर पाचन-तंत्र, मोटापा, हृदयरोग, मधुमेह, आँतों के रोग आदि होते हैं।

IceCreams : इसमें पेपरोनिल (कीड़े मारने की दवा), इथाइल एसिटेट (गुर्दे, फेफड़े और हृदय के लिए हानिकारक) आदि घातक रसायन पाये जाते हैं। कई बाजारू आइसक्रीमों में 6 प्रतिशत तक पशुओं की चर्बी होती है।

Chocolates: फिनायल व इथाइल एमीन, जानथीम, थायब्रोमीन आदि केमिकल्स पाये जाते हैं, जिनसे दाँतों का सड़ना, डायबिटीज, कैंसर जैसे भयानक रोग हो सकते हैं।