20+ Safety Precaution For Yoga Exercise Guidelines [Savdhaniya]

safety precautions for yoga savdhania

Things to remember while performing Yoga asanas. Best Safety Guidelines Precaution For Yoga Exercise.

1. भोजन के छः घण्टे बाद, दूध पीने के दो घण्टे बाद या बिल्कुल खाली पेट ही आसन करें ।

2. शौच-स्नानादि से निवृत्त होकर आसन किये जाएँ तो अच्छा है ।

3. योगासन के बाद तुरंत कुछ न खायें न पियें । सिर्फ एक-दो घूँट पानी पी सकते हैं ।

4. श्वास मुँह से न लेकर नाक से ही लेना चाहिए । योगासन के दौरान मुँह बंद रखें ।

5. आसनों में श्वास लेने-छोड़ने का सही क्रम हो, जैसा प्रशिक्षक बतायें या विधि में लिखा हो । गलत क्रम से करने पर नुकसान हो सकता है ।

6.  जगह खुली, हवादार हो, साफ हो, धूप, धुआं रहित हो । (आश्रम की गौचंदन धूपबत्ती का धूप कर सकते हैं )

7. गरम कम्बल, टाट या ऐसा ही कुछ बिछाकर आसन करें । खुली भूमि पर बिना कुछ बिछाये आसन कभी न करें, जिससे शरीर में निर्मित होने वाला विद्युत-प्रवाह नष्ट न हो जाये ।

8. आसन करते समय शरीर के साथ ज़बरदस्ती न करें । आसन कसरत नहीं है । अतः धैर्यपूर्वक आसन करें ।

9. आसन करने के बाद ठंड में या तेज हवा में न निकलें । स्नान करना हो तो थोड़ी देर बाद करें ।

10. आसन करते समय शरीर पर कम से कम वस्त्र, ढीले और सूती कपड़े होने चाहिए ।

11. योगासन के तुरंत बाद भारी काम न करें ।

12. आसन करते-करते और मध्यान्तर में और अंत में 10-15 मिनट शवासन करके, शिथिलीकरण के द्वारा शरीर के तंग बने स्नायुओं को आराम दें ।

13. आसन के बाद मूत्रत्याग अवश्य करें जिससे एकत्रित दूषित तत्व बाहर निकल जायें ।

14. आसन करते समय आसन में बताए हुए चक्रों पर ध्यान करने से और मानसिक जप करने से अधिक लाभ होता है ।

15. प्राणायाम में शरीर स्थिर और सीधा रखना चाहिए । श्वास झटके से न लें, न छोड़ें । श्वास की आवाज भी नहीं आनी चाहिए । ( श्वास तेल-धारवत् चलना चाहिए । )

16. योगासन भी सही क्रम में करने चाहिए । पहले खड़े होकर करने वाले, फिर बैठ के करने वाले, फिर लेट के करने वाले आसन करना चाहिए ।

17. आसन के बाद थोड़ा ताजा जल पीना लाभदायक है. ऑक्सिजन और हाइड्रोजन में विभाजित होकर सन्धि-स्थानों का मल निकालने में जल बहुत आवश्यक होता है । आसनों में भी ( 2-2 या 3 आसनों के बाद) बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा आराम करना चाहिए ।

18. स्त्रियों को चाहिए कि गर्भावस्था में तथा मासिक धर्म की अवधि में वे कोई भी आसन कभी न करें ।

19. स्वास्थ्य के आकांक्षी हर व्यक्ति को पाँच-छः तुलसी के पत्ते प्रातः चबाकर पानी पीना चाहिए । इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है, एसीडीटी एवं अन्य रोगों में लाभ होता है ।

20. व्यायाम में शरीर की ऊर्जा खर्च होती है और व्यायाम के बाद थोड़ी थकावट लगती है परंतु योगासन करने के बाद शरीर में ऊर्जा आती है और स्फूर्ति लगती है । यदि आसनों के बाद थकावट लगती है तो इसका मतलब आसन सही तरीके से नहीं हो रहे हैं ।

~ योगासन साहित्य से

FAQ

Can we bath after yoga ?

योगासन करने के तुरंत बाद स्नान नहीं कर सकते ।

Can we sleep after doing yoga ?

हां

What to do before yoga in the morning

शौच-स्नानादि से निवृत्त होकर आसन किये जाएँ तो अच्छा है ।

Can we drink water before yoga in morning

1 घंटे पहले पी सकते है। बिल्कुल खाली पेट ही आसन करें ।

What to Eat After Yoga in the Morning

योगासन के बाद तुरंत कुछ न खायें ।

Best time to do yoga morning or night ?

सुबह खाली पेट

Yoga before or after bath ? Best time of day to do yoga ?

स्नान नहीं करना चाहिए।

What is the best time to do yoga in evening ?

खुली एवं हवादार जगह पर अपने समय अनुकूल कर सकते है।

When to do yoga after eating ?

खाने के तुरंत बाद योगासन न करें ।

How much time to do yoga ?

अपने समयानुसार पर नियमित करें ।

How many times can you do yoga in a day ?

अपने शरीर के अनुसार कर सकते है बस ज्यादा न हो ।

Best time to do yoga for weight loss

सोने से पहले ।

Can we do yoga in periods ?

स्त्रियों को चाहिए कि गर्भावस्था में वे कोई भी आसन कभी न करें ।

Can we do Yoga in Pregnancy ?

मासिक धर्म कि अवधि में कोई भी आसान कभी न करें ।

Successful Student Tips: Vidhyarti Apni Soyi hui Shakti Jagaye

Chamatkarik Omkar Prayog

पूज्य बापूजी का विद्यार्थियों के लिए वरदान…!!

कानों में उँगलियाँ डालकर लम्बा श्वास लो । जितना लम्बा श्वास लोगे उतने फेफड़ों के बंद छिद्र खुलेंगे, रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी ।
 
श्वास रोककर कंठ में भगवान के पवित्र, सर्वकल्याणकारी ʹૐʹ का जप करो । मन में ʹप्रभु मेरे, मैं प्रभु काʹ बोलो ।
 
मुँह बंद रख के कंठ से ૐ…. ૐ…. ૐ…. ૐ….. ૐ…… ૐ….. ૐ….. ओઽઽઽम्…. का उच्चारण करते हुए श्वास छोड़ो । इस प्रकार दस बार करो ।
 
कानों में से उँगलियाँ निकाल दो ।
 
इतना करने के बाद शांत बैठकर होठों से जपो – ʹૐ ૐ प्रभु जी ૐ ,आनंद देवा ૐ, अंतर्यामी ૐ….ʹ दो मिनट करना है । फिर हृदय से जपो – ʹૐशांति…., ૐ आनंद…., ૐૐૐ…ʹ जीभ व होंठ मत हिलाओ । अब कंठ से जप करना है । यह एक चमत्कारिक प्रयोग है । इसके नियमित अभ्यास से बुद्धिशक्ति का अदभुत विकास होगा । विद्यार्थियों के लिए तो यह वरदानस्वरूप है ।
 
– हम भारत के लाल हैं ।

योग्यताओं के खजाने को खोलने की चाबी

[Supta Vajrasana]**: Pose Image, Benefits, Steps, Precautions

Supt vajrasan

Supt vajrasan

इस आसन में ध्यान करने से मेरूदण्ड को सीधा करने का श्रम नहीं करना पड़ता और मेरूदण्ड को आराम मिलता है । उसकी कार्य़शक्ति प्रबल बनती है । इस आसन का अभ्यास करने से प्रायः तमाम अंतःस्रावी ग्रन्थियों को, जैसे शीर्षस्थ ग्रन्थि, कण्ठस्थ ग्रन्थि, मूत्रपिण्ड की ग्रन्थि, ऊर्ध्वपिण्ड तथा पुरूषार्थ ग्रन्थि आदि को पुष्टि मिलती है । फलतः व्यक्ति का भौतिक एवं आध्यात्मिक विकास सरल हो जाता है । तन-मन का स्वास्थ्य प्रभावशाली बनता है । जठराग्नि प्रदीप्त होती है । मलावरोध की पीड़ा दूर होती है । धातुक्षय, स्वप्नदोष, पक्षाघात, पथरी, बहरा होना, तोतला होना, आँखों की दुर्बलता, गले के टॉन्सिल, श्वासनलिका का सूजन, क्षय, दमा, स्मरणशक्ति की दुर्बलता आदि रोग दूर होते हैं ।

Surya Namaskar: Benefits, Step by Step Poses, Images, Mantra

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Surya Namaskar Steps (Poses), Mantra, Benefits, Images, 12 Steps [ सूर्य नमस्कार के फायदे ( लाभ)]

Surya Namaskar Benefits [Labh] in Hindi

➠ हमारे ऋषियों ने मंत्र और व्यायाम सहित एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसमें सूर्योपासना का समन्वय हो जाता है। इसे ‘सूर्यनमस्कार’ कहते हैं। इसमें कुल 10 आसनों का समावेश है। हमारी शारीरिक शक्ति की उत्पत्ति, स्थिति एवं वृद्धि सूर्य पर आधारित है।

➠ जो लोग सूर्यस्नान करते हैं, सूर्योपासना करते हैं वे सदैव स्वस्थ रहते हैं। सूर्यनमस्कार से शरीर की रक्तसंचरण प्रणाली, श्वास-प्रश्वास की कार्यप्रणाली और पाचन-प्रणाली आदि पर असरकारक प्रभाव पड़ता है। यह अनेक प्रकार के रोगों के कारणों को दूर करने में मदद करता है। सूर्यनमस्कार के नियमित अभ्यास से शारीरिक एवं मानसिक स्फूर्ति के साथ विचारशक्ति और स्मरणशक्ति तीव्र होती है।

➠ पश्चिमी वैज्ञानिक गार्डनर रॉनी ने कहाः सूर्य श्रेष्ठ औषध है। उससे सर्दी, खाँसी, न्युमोनिया और कोढ़ जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।

➠ डॉक्टर सोले ने कहाः सूर्य में जितनी रोगनाशक शक्ति है, उतनी संसार की अन्य किसी चीज़ में नहीं। प्रातःकाल शौच स्नानादि से निवृत होकर कंबल या टाट (कंतान) का आसन बिछाकर पूर्वाभिमुख खड़े हो जायें। चित्र के अनुसार सिद्ध स्थिति में हाथ जोड़ कर, आँखें बन्द करके, हृदय में भक्तिभाव भरकर भगवान आदिनारायण का ध्यान करें-

ध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः।

केयूरवान् मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपर्धृतशंखचक्रः।।

➠ सवितृमण्डल के भीतर रहने वाले, पद्मासन में बैठे हुए, केयूर, मकर कुण्डल किरीटधारी तथा हार पहने हुए, शंख-चक्रधारी, स्वर्ण के सदृश देदीप्यमान शरीर वाले भगवान नारायण का सदा ध्यान करना चाहिए। – (आदित्य हृदयः 938)

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोsस्तु ते।।

➠ हे आदिदेव सूर्यनारायण ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे प्रकाश प्रदान करने वाले देव ! आप मुझ पर प्रसन्न हों। हे दिवाकर देव ! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे तेजोमय देव ! आपको मेरा नमस्कार है।

➠ यह प्रार्थना करने के बाद सूर्य के तेरह मंत्रों में से प्रथम मंत्र ‘ॐ मित्राय नमः’ के स्पष्ट उच्चारण के साथ हाथ जोड़ कर, सिर झुका कर सूर्य को नमस्कार करें। फिर चित्रों कें निर्दिष्ट 10 स्थितियों का क्रमशः आवर्तन करें। यह एक सूर्य नमस्कार हुआ। इस मंत्र द्वारा प्रार्थना करने के बाद निम्नांकित मंत्र में से एक-एक मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करते हुए सूर्यनमस्कार की दसों स्थितियों का क्रमबद्ध अनुसरण करें।

Surya Namaskar Mantra Lyrics in Hindi

1. ॐ मित्राय नमः।

2. ॐ रवये नमः।

3. ॐ सूर्याय नमः।

4. ॐ भानवे नमः।

5. ॐ खगाय नमः।

6. ॐ पूष्णे नमः।

7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

8. ॐ मरीचये नमः।

9. ॐ आदित्याय नमः।

10. ॐ सवित्रे नमः।

11. ॐ अर्काय नमः।

12. ॐ भास्कराय नमः।

13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।

Surya Namaskar Step by Step with Images

Surya Namaskar Step 1

पहली स्थिति :

नमस्कार की स्थिति में ही दोनों भुजाएँ सिर के ऊपर, हाथ सीधे, कोहनियाँ तनी हुईं, सिर और कमर से ऊपर का शरीर पीछे को झुका हुआ, दृष्टि करमूल में, पैर सीधे, घुटने तने दूसरी स्थिति हुए, इस स्थिति में आते हुए श्वास भीतर भरें।

दूसरी स्थिति :

नमस्कार की स्थिति में ही दोनों भुजाएँ सिर के ऊपर, हाथ सीधे, कोहनियाँ तनी हुईं, सिर और कमर से ऊपर का शरीर पीछे को झुका हुआ, दृष्टि करमूल में, पैर सीधे, घुटने तने दूसरी स्थिति हुए, इस स्थिति में आते हुए श्वास भीतर भरें।

Surya Namaskar Step 2
Surya Namaskar Step 2
Surya Namaskar Step 3
Surya Namaskar Step 3

तीसरी स्थिति :

बायाँ पैर पीछे, उसका पंजा और घुटना धरती से लगा हुआ, दायाँ घुटना मुड़ा हुआ, दोनों हथेलियाँ पूर्ववत्, भुजाएँ सीधी-कोहनियाँ तनी हुईं, कन्धे और मस्तक पीछे खींचे हुए, दृष्टि ऊपर, बाएँ पैर को पीछे ले जाते समय श्वास को भीतर खींचे।

चौथी स्थिति :

दाहिना पैर पीछे लेकर बाएँ पैर के पास, दोनों हाथ पैर सीधे, एड़ियाँ जमीन से लगी हुईं, दोनों घुटने और कोहनियाँ तनी हुईं, कमर ऊपर उठी हुई, सिर घुटनों की ओर खींचा हुआ, ठोड़ी छाती से लगी हुई, कटि और कलाइयाँ इनमें त्रिकोण, दृष्टि घुटनों की ओर, कमर को ऊपर उठाते समय श्वास को छोड़ें।

Surya Namaskar Step 4
Surya Namaskar Step 4
Surya Namaskar Step 5
Surya Namaskar Step 5

पाँचवीं स्थिति :

साष्टांग नमस्कार, ललाट, छाती, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने, दोनों पैरों के पंजे, ये आठ अंग धरती पर टिके हुए, कमर ऊपर उठी हुई, कोहनियाँ एक दूसरे की ओर खींची हुईं, चौथी स्थिति में श्वास बाहर ही छोड़ कर रखें।

छठी स्थिति :

घुटने और जाँघे धरती से सटी हुईं, हाथ सीधे, कोहनियाँ तनी हुईं, शरीर कमर से ऊपर उठा हुआ मस्तक पीछे की ओर झुका हुआ, दृष्टि ऊपर, कमर हथेलियों की ओर खींची हुई, पैरों के पंजे स्थिर, मेरूदंड धनुषाकार, शरीर को ऊपर उठाते समय श्वास भीतर लें।
Surya Namaskar Step 6
Surya Namaskar Step 6
Surya Namaskar Step 7
Surya Namaskar Step 7

सातवीं स्थिति :

साष्टांग नमस्कार, ललाट, छाती, दोनों हथेलियाँ, दोनों घुटने, दोनों पैरों के पंजे, ये आठ अंग धरती पर टिके हुए, कमर ऊपर उठी हुई, कोहनियाँ एक दूसरे की ओर खींची हुईं, चौथी स्थिति में श्वास बाहर ही छोड़ कर रखें।

आठवीं स्थिति :

बायाँ पैर आगे लाकर पैर का पंजा दोनों हथेलियों के बीच पूर्व स्थान पर, दाहिने पैर का पंजा और घुटना धरती पर टिका हुआ, दृष्टि ऊपर की ओर, इस स्थिति में आते समय श्वास भीतर को लें। ( तीसरी और आठवीं स्थिति में पीछे-आगे जाने वाला पैर प्रत्येक सूर्यनमस्कार में बदलें। )

Surya Namaskar Step 8
Surya Namaskar Step 8
Surya Namaskar Step 9
Surya Namaskar Step 9

नौवीं स्थिति :

यह स्थिति दूसरी की पुनरावृत्ति है, दाहिना पैर आगे लाकर बाएँ के पास पूर्व स्थान पर रखें, दोनों हथेलियाँ दोनों पैरों के पास धरती पर टिकी हुईं, ललाट घुटनों से लगा हुआ, ठोड़ी उरोस्थि से लगी हुई, दोनों हाथ पैर सीधे, दोनों घुटने और कोहनियाँ तनी हुईं, इस स्थिति में आते समय श्वास को बाहर छोड़ें।

दसवीं स्थिति :

प्रारम्भिक सिद्ध स्थिति के अनुसार समपूर्ण शरीर तना हुआ, दोनों पैरों की एड़ियाँ और अँगूठे परस्पर लगे हुए, दृष्टि नासिकाग्र, दोनों हथेलियाँ नमस्कार की मुद्रा में, अँगूठे छाती से लगे हुए, श्वास को भीतर भरें, इस प्रकार दस स्थितियों में एक सूर्यनमस्कार पूर्ण होता है। ( यह दसवीं स्थिति ही आगामी सूर्यनमस्कार की सिद्ध स्थिति बनती है। )

Surya Namaskar Step 10
Surya Namaskar Step 10

प्राणायाम – टंक विद्या | Pranayam Rahasya Kundalini

प्राणायाम करने वालों को और सभी साधकों को टंक विद्या का प्रयोग करना चाहिए। बच्चों को भी जो कान में उँगली डाल के ‘ॐकार गुंजन’ की साधना सिखाते हैं, उसके पहले भी ये दो प्राणायाम कराने चाहिए।

लाभ :

● यह लगता तो साधारण प्रयोग है लेकिन शरीर के सात केन्द्रों में से यह पंचम केन्द्र को सक्रिय रखता है। नीचे के चार केन्द्रों की अपेक्षा पाँचवाँ केन्द्र हमें छठे केन्द्र में, जो भूमध्य (भौंहों के मध्य) में है, जल्दी पहुंचा देता है; जिससे नीचे के सभी पाँचों केन्द्रों के विकास का फायदा मिल जाता है। एक-एक केन्द्र पर रुकने के बजाय पाँचवें में आयें फिर छठे केन्द्र में आगये। जैसे छलाँग लगाते हैं ना, पहली सीढ़ी से सीधा चौथी या पाँचवीं पर पहुँच गये ।

● इस प्राणायाम की विधि ऐसी ही बता रहा हूँ, छलाँगवाली…. !!!

विधि  :  लम्बा श्वास लेकर होंठ बंद करके कंठ से ‘ॐ’ की ध्वनि निकालते हुए सिर को ऊपर-नीचे करें।

~ऋषि प्रसाद /जुलाई 2013

टंक विद्या प्रयोग

मत्स्यासन विधि और लाभ -Matsyasana (Fish Pose) Steps & Benefits

मत्स्य का अर्थ है मछली । इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है अतः मत्स्यासन कहलाता है । प्लाविनी प्राणायाम के साथ इस आसन की स्थिति में लम्बे समय तक पानी में तैर सकते हैं ।ध्यान विशुद्धाख्य चक्र में । श्वास पहले रेचक, बहिर्कुम्भक, फिर पूरक और रेचक ।

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मयूरासन विधि और लाभ -Mayurasana (Peacock Pose) Steps & Benefits

इस आसन में मयूर अर्थात् मोर की आकृति बनती है इससे इसे मयूरासन कहा जाता है । ध्यान मणिपुर चक्र में । श्वास बाह्य कुम्भक ।

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वज्रासन विधि और लाभ -Vajrasana for Weight Loss Steps & Benefits

वज्रासन का अर्थ है बलवान स्थिति । पाचनशक्ति, वीर्यशक्ति तथा स्नायुशक्ति देनेवाला होने से यह आसन वज्रासन कहलाता है ।

ध्यान मूलाधार चक्र में और श्वास दीर्घ ।

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पद्मासन विधि और लाभ| Padmasana [Lotus Position] Steps & Benefits

padmasan

इस आसन में पैरों का आधार पद्म अर्थात कमल जैसा बनने से इसको पद्मासन या कमलासन कहा जाता है। ध्यान आज्ञाचक्र में अथवा अनाहत चक्र में। श्वास रेचक, कुम्भक, दीर्घ, स्वाभाविक।

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योगमुद्रासन विधि और लाभ- Yoga Mudrasana Meaning, Pose & Benefits

योगाभ्यास में यह मुद्रा अति महत्त्वपूर्ण है इससे इसका नाम योगमुद्रासन रखा गया है । ध्यान मणिपुर चक्र में । श्वास रेचक, कुम्भक और पूरक ।

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