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Vishva Seva Satsang Divas

Vishva Seva Satsang Divas

वर्षगाँठ का उद्देश्य
  • पिछला वर्ष बीत गया, नया आने को है, उसके बीच खड़े रहने का नाम है वर्षगांठ । इस दिन हिसाब कर लेना चाहिए कि गत वर्ष में हमने कितना जप किया ? उससे ज्यादा कर सकते थे कि नहीं ? हमसे क्या-क्या गलतियाँ हो गयीं ?
  • हमने कर्ताभाव में आकर क्या-क्या किया और अकर्ताभाव में आकर क्या होने दिया ? वर्षभर में जिन गलतियों से हम अपने ईश्वरीय स्वभाव से, आत्मस्वभाव से अथवा साधक-स्वभाव से नीचे आये, जिन गलतियों के कारण हम ईश्वर की या अपनी नजर में गिर गये वे गलतियाँ जिन कारणों से हुईं उनका विचार करके अब न करने का संकल्प करना – यह वर्षगाँठ है ।
  • दूसरी बात, आने वाले वर्ष के लिए योजना बना लेना । योजना बनानी है कि हम सम रहेंगे । सम रहने के लिए आत्मनिष्ठा, ज्ञाननिष्ठा, भक्तिनिष्ठा, प्रेमनिष्ठा, सेवानिष्ठा को जीवन में महत्व देंगे । जिस वस्तु में महत्व बुद्धि होती है, उसमें पहुंचने का मन होता है । ईश्वर में, आत्मज्ञान में, गुरु में महत्व बुद्धि होने से हम उधर पहुँचते है ।
  • धन में महत्वबुद्धि होने से लोग छल-कपट करके भी धन कमाने लग जाते हैं । पद में महत्व बुद्धि होने से न जाने कितने-कितने दांव-पेच करके भी पद पर पहुँच जाते हैं । अगर आत्मज्ञान में महत्व बुद्धि आ जाए तो बेड़ा पार हो जाए । तो वर्षगाँठ के दिन नये वर्ष की योजना बनानी चाहिए कि हमें जितना प्रयत्न करना चाहिए उतना करेंगे, जितना होगा उतना नहीं । रेलगाड़ी या गाड़ी में बैठते हैं तो जितना किराया हम दे सकते हैं उतना देने से टिकट नहीं मिलता बल्कि जितना किराया देना चाहिए उतना ही देना पड़ता है, ऐसे ही जितना यत्न करना चाहिए उतना करके आने वाले वर्ष में हम परमात्म निष्ठा, परमात्मज्ञान, परमात्म-मस्ती परमात्म प्रेम, परमात्म रस में, परमात्म स्थिति में रहेंगे ।
विश्ववंदनीय ब्रह्मनिष्ठ परम पूज्य लोकसंत श्री आशारामजी बापू का अवतरण-दिवस अर्थात विश्व सेवा-सत्संग दिवस
vishv sewa satsang diwas
  • प्रातःस्मरणीय परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ऐसे महापुरुष है जिन्होंने अपने शिष्यों को भक्तियोग और ज्ञानयोग के साथ-साथ कर्मयोग भी सिखाया है । पूज्यश्री का कहना है कि कर्म को करने की कला जान लो और उसे कर्मयोग बनाओ तो कर्म आपको बांधने वाले नहीं, भगवान से मिलने वाले हो जायेंगे । भगवान ने हमें जो जानने, मानने और करने की शक्तियाँ दी हैं, उनका सदुपयोग करो । परहित में सत्कर्म करने से करने की शक्ति का सदुपयोग होता है ।
  • पूज्य बापूजी के इन्हीं वचनों का आदर करते हुए पूज्यश्री के शिष्यों द्वारा पूरे भारत में आपका अवतरण दिवस हर वर्ष ‘सेवा-दिवस’ के रूप में मनाया जाता है ।
  • इस अवसर पर देश विदेश में फैले आश्रम-संचालित 18,000 से अधिक बाल संस्कार केन्द्रों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न कार्यक्रम किये जाते हैं और भोजन प्रसाद का वितरण किया जाता है ।
  • संत श्री आशारामजी आश्रम की सभी शाखाओं एवं आश्रम की 1275 सेवा समितियों द्वारा अपने-अपने गाँवों, नगरों, शहरों में आध्यात्मिक जागृति हेतु हरिनाम संकीर्तन यात्राएँ निकाली जाती हैं । साथ ही झुग्गी झोपड़ियों में गरीब-गुरबों को, बेसहारा विधवाओं को, अनाथालयों में अनाथों को, आदिवासी क्षेत्रों में अभावग्रस्तों को और अस्पतालों में मरीजों को अन्न, फल, औषधि, वस्त्र आदि जीवनोपयोगी वस्तुएँ तथा आर्थिक सहायता प्रदान कर कई-कई प्रकारों से इन संत के अवतरण-दिवस’ पर सेवा-सुवास महकायी जाती है ।
  • इस प्रकार ‘वासुदेवः सर्वम्’ अर्थात् ‘यह पूरी सृष्टि परमात्मा का ही प्रकट स्वरूप है’ – इस भाव से दीन-दुःखियों, जरूरतमंदों एवं सम्पूर्ण समाज की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने से कर्म को कर्मयोग बनाने की कला जीवन में आ जाती है । साथ ही
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः….’
  • अर्थात् ‘सबका मंगल, सबका भला’ की भावना जीवन में दृढ़ हो जाती है । अद्वैत वेदांत के सर्वोच्च आध्यात्मिक सिद्धांत को जीवन में प्रत्यक्ष उतारने वाले ये सद्गुरु के निःस्वार्थ सेवक मानो समाज को संदेश दे रहे हैं : ‘आओ, संसार रूपी कर्मभूमि को कर्मयोग का अवलम्बन लेकर नंदनवन बनायें ।’
  • पूज्य बापूजी के शिष्य एक ओर तो गुरुदेव से प्राप्त कर्मयोग की शिक्षा को व्यावहारिक रूप देकर जनसेवा अभियान चला रहे हैं तो दूसरी ओर ज्ञानयोग और भक्तियोग के पोषण हेतु इस दिन उत्सव का आयोजन कर सत्संग, ध्यान, भजन तथा संकीर्तन यात्राएँ आदि के द्वारा जीवन में ईश्वरीय आनंद, परमात्म-माधुर्य एवं भगवद्शांति को छलका रहे हैं ।

Message on Avataran Diwas

  • वर्षगाँठ के दिन वर्षभर में जो आपने भले कार्य किये वे भूल जाओ, उनका व्याज या बदला न चाहो, उन पर पोता फेर दो । जो बुरे कार्य किये, उनके लिए क्षमा माँग लो, आप ताजे-तवाने हो जाओगे । किसी ने बुराई की है तो उस पर पोता फेर दो । तुमने किसी से बुरा किया है तो वर्षगाँठ के दिन उस बुराई के आघात को प्रभावहीन करने के लिए जिससे बुरा किया है
    उसको जरा आश्वासन, स्नेह दे के, यथायोग्य करके उससे माफी करवा लो, छूटछाट करवा लो तो अंतःकरण निर्मल हो जायेगा, ज्ञान प्रकट होने लगेगा, प्रेम छलकने लगेगा, भाव-रस निखरने लगेगा और भक्ति का संगीत तुम्हारी जिह्वा के द्वारा छिड़ जायेगा ।
  • कोई भी कार्य करो तो उत्साह से करो, श्रद्धापूर्वक करो, अडिग धैर्य व तत्परता से करो, सफलता मिलेगी, मिलेगी और मिलेगी ! और आप अपने को अकेला, दुःखी, परिस्थितियों का गुलाम मत मानो । विघ्न-बाधाएँ तुम्हारी छुपी हुई शक्तियाँ जगाने के लिए आती हैं । विरोध तुम्हारा विश्वास जगाने के लिए आता है ।
  • जो बेचारे कमजोर हैं, हार गये हैं, थक गये हैं, बीमारी से या इससे कि ‘कोई नहीं हमारा… वे लोग वर्षगाँठ के दिन सुबह उठ के जोर से बोलें कि ‘मैं अकेला नहीं हूँ, मैं कमजोर या बीमार नहीं हूँ । हरि ॐ ॐ ॐ…’ इससे भी शक्ति बढ़ेगी । आप जैसा सोचते हैं वैसे बन जाते हैं । अपने भाग्य के आप विधाता है । तो अपने जन्मदिन पर यह संकल्प करना चाहिए कि ‘मुझे मनुष्य-जन्म मिला है, मैं हर परिस्थिति में सम रहूँगा ; सुख-दुःख को खिलवाड़ समझकर अपने जीवनदाता की तरफ यात्रा करता जाऊँगा – यह पक्की बात है ! हमारे अंदर आत्मा-परमात्मा का असीम बल व योग्यता छिपी है ।’
  • ऐसा करके आगे बढ़ो । सफल हो जाओ तो अभिमान के ऊपर पोता फेर दो और विफल हो जाओ तो विषाद के ऊपर पोता फेर दो । तुम अपना हृदयपटल कोरा रखो और उस पर भगवान के, गुरु के धन्यवाद के हस्ताक्षर हो जाने दो ।

Pujya BapuJi ka Avtaran Divas April 2022

वो दिन आ गया है आज, जिसका किया था इंतजार ।
पूज्यश्री के चरणों में, हम सबका प्रणाम है बारंबार ।।
खुशियों में झूम-झूमकर, देवगण फूल बरसायेंगे ।
आनंदित हुए सभी भक्तजन, हर्षविभोर हो जायेंगे ।।
जन्मदिन के सु-अवसर पर, देते भक्तगण बधाई हैं ।
कभी ना बिछड़े इनसे हम, प्रार्थना यही हमारी है ।।
कई जन्मों के पुण्यों से, बापू को हमने पाया है ।
श्रीचरणों में ही हमने, अपना शीश नवाया है ।।

अवतरण दिवस का प्यारा भजन “आज जन्मदिन बापूजी का आया है” का Lyrics पढ़ें अथवा ऑडियो में Download करें

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