How to Celebrate birthday in Indian Style [Traditional Hindu Style Janamdin Kaise Manaye]

➠ सत्संग समारोह में पूज्य बापूजी ने जन्मदिवस मनाने की पाश्चात्य पद्धति को गलत बताया और उसके स्थान पर भारतीय संस्कृति के अनुसार जन्मदिवस मनाने की विधि को विस्तारपूर्वक समझाते हुए कहा :  “लोग ‘केक’ बनवाते हैं, उस पर मोमबत्तियाँ जलाते हैं और फिर फूँक मारकर उन्हें बुझाते हैं ।

➠ जो लोग विज्ञान पढ़े हैं वे लोग जानते होंगे कि पानी का प्याला एक बार होठों पर लगाने से उसमें लाखों कीटाणु पाये गये । जब सिर्फ एक बार मुँह से लगाने पर प्याले में लाखों की संख्या में कीटाणु जा सकते हैं तब मोमबत्तियाँ बुझाने के लिए बार-बार फूँक मारने से उस ‘केक’ में कितने कीटाणु चले जाते होंगे ।

➠ दूसरी बात यह कि आप दीप बुझाकर प्रकाश से अंधकार की ओर जाने की भूल करते हैं । मनुष्यता से पशुता की ओर जा रहे हैं ।

➠ फूँकना, थूकना और अंधेरा करके पाश्चात्य भोगवादियों का अनुसरण करते हुए जन्मदिवस मनाना भारतवासियों के लिए शर्म की बात है ।

➠ जन्मदिन मनाना हो तो खूब प्रेम से मनाओ परन्तु ऋषि-मुनियों की भाँति आधिभौतिक का आध्यात्मिकीकरण करो ।

➠ यह शरीर पाँच भूतों से बना हुआ है – पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश। इन पाँचों भूतों के अलग-अलग रंग हैं – पृथ्वी का पीला, जल का सफेद, अग्नि का लाल, वायु का हरा और आकाश का नीला । इन पाँचों रंगों से चावलों को रँग लो और उनसे एक ‘स्वास्तिक’ बना लो ।

➠ जिसका जन्मदिवस मना रहे हो वह जितने वर्ष का हो चुका है उतने दीये जलाओ ।

➠ मानो, आपके 30 वर्ष पूरे हो गये और 31वाँ प्रारम्भ हो रहा है तो आपके स्नेही 30 दीये जलाकर उस स्वास्तिक के ऊपर रख दें । फिर स्वास्तिक के बीचों बीच जहाँ उसकी चारों भुजाएँ मिलते हैं वहाँ पर अन्य दीयों से बड़े आकार वाला 31वाँ दीया रखो । उस बड़े दीये को उस व्यक्ति के द्वारा जलवाओ जो आपके कुटुम्ब में श्रेष्ठ हो, ऊँची समझ वाला तथा भक्तिभाव वाला हो ।

➠ इसके बाद जिसका जन्मदिन मना रहे हो उसके लिए सब मिलकर प्रार्थना करोः “पृथ्वी आपके लिए सुखद हो….. जल आपके लिए अनुकूल हो…. तेज आपके लिए अनुकूल हो…..वायु आपके लिये सुखद हो…. आकाश आपके लिए सुखद हो…. सभी मित्र व स्नेही सम्बन्धी आपके लिए सुखद हों….यहाँ तक कि सभी दिशाएँ व देवी-देवता आपके लिए सुखद व अनुकूल हों

(पुत्र का जन्मदिवस है तो माता-पिता व स्नेही अनुकूल हों, पुत्री का जन्म दिवस है तो माता-पिता, भाई, बन्धु व स्नेही अनुकूल हों, पति का जन्मदिवस है तो पत्नी आपके अनुकूल हो, पत्नी का जन्मदिवस है तो पति व परिवार आपके अनुकूल हो।) सभी मित्रों का मित्र, स्नेहियों का स्नेही, सभी देवों का देव परमात्मदेव, आपके अन्तर में बैठे अन्तर्यामी देव आपको विशेष-विशेष सदबुद्धि दे, आपके भीतर विशेष-विशेष प्रकाश खिले।

➠ 30 वर्षों में जो प्रकाश व सुख मिला उससे शुरू होने वाला ये 31वाँ वर्ष …. वर्षों में जो प्रकाश व सुख मिला उससे शुरू होने वाला ये 31वाँ वर्ष आपके लिए विशेष प्रकार से सुखमय, ज्ञानमय हो ।

➠ प्रभु की करूणा-वरूणा का दीप आपके दिल में जगमगाता रहे । सुख-शांति व आनंद बढ़ता रहे, निखरता रहे, बहता रहे । आपके दीर्घ जीवन का दीया जगमगाता रहे ।

➠ हम सभी स्नेही आपके जन्मदिवस पर मधुर-मधुर बधाइयाँ देते हैं और प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि आप दीर्घायु हों, दृढ़ निश्चयी हों, शुभकर्त्ता हों, संयमी भोक्ता हों, परमात्मा के प्यारे हों, सबके दिल के दुलारे हों आदि-आदि बधाई हो, बधाई हो ।”

➠ जन्मदिवस पर भगवन्नाम कीर्तन, आरती, ‘गीता’ व ‘श्रीरामचरितमानस’ का पाठ आदि आयोजित कर सकते हैं । भगवान को भोग लगाकर प्रसाद बाँटना बड़ा लाभकारी है ।

➠ फूँकने, थूकने व ‘केक’ काटने से बहुत बढ़िया रीति है भारत की उक्त पद्धति ।

➠ क्यों ? त्यागोगे न …?? फूँकना, थूकना और मनाओगे न सात्त्विक शुभकामना सहित जन्मदिवस ???

(कृपया आप भी इसे करें व औरों को भी प्रेरित करें।)

~ बाल संस्कार केंद्र पाठ्यक्रम से