-पूज्य बापूजी

“अनुशासन में प्यार और सामने वाले का हित तथा शुद्ध ज्ञान और मंगल भावना नहीं भरी है तो वह अनुशासन अहमपोषक और शासितों को सतानेवाला हो जाएगा। बिना प्यार का अनुशासन झगड़ा, तंगदिली और खिंचाव लाएगा। प्यार में से अनुशासन निकाला तो मोह बन जायेगा। अनुशासन तो जरूरी है पर उसमें प्यार मिला हुआ हो ।”