गाँधीजी ने अपने एक वक्तव्य में रुँधे हुए कंठ से इस बात का जिक्र किया कि बचपन में वे बहुत डरपोक थे और भूत से बहुत डरा करते थे। उन दिनों उनकी धाय ने उनका डर भगाने के लिए उन्हें रामनाम का मंत्र बताया था।

 उन्होंने कहा :” रंभा (धाय माँ) मुझसे कहा करती थी कि जब डर लगे तब राम का नाम लिया करो। वह तुम्हारी रक्षा करेगा।”

उस दिन से भगवान का नाम सब तरह के डरों के लिए मेरा अचूक सहारा बन गया।

भगवन्नाम के आश्रय ने गांधीजी को निर्भय बना ही दिया… गांधीजी से प्रेरणा पाकर लाखों देशवासी साहस और निर्भयता के धनी बन गए और देश की आजादी के लिए.., अस्मिता के लिए उन्होंने ऐसे-ऐसे साहस भरे कदम उठाये कि इतिहास में उनका नाम अमर हो गया।

📚ऋषि प्रसाद/जनवरी २०११