7 Chakras: Name, Colors, Mantras, Meaning in Hindi [Guide]

7 chakras names meaning

The 7 Chakras Name, Colors, Mantras, Place of Chakra in Body, Meaning in Hindi:

हमारे शरीर में नीचे से ऊपर तक सात चक्र हैं । ये चक्र जितने विकसित होते हैं, उतना ही व्यक्ति का जीवन विकसित होता है । बच्चों को बाल संस्कार केन्द्र में इनकी महिमा आप बताएं और इस पर आधारित ये खेल भी खिलायें ।

सातों चक्रों के नाम बच्चों को याद करवायें और शरीर के किस हिस्से में कौन सा चक्र है उसकी स्थिति भी बतायें ।

१. मूलाधार —◆ गुदा के पास
२. स्वाधिष्ठान —◆ नाभि के नीचे
३. मणिपुर —◆ नाभि में
४. अनहद —◆ ह्रदय में
५. विशुद्धाख्य —◆ कंठ में
६. आज्ञा चक्र —◆ भौहों के बीच
७. सहस्रार —◆ चोटी वाले स्थान पर

कैसे खेलें ❓

खेल-1
शिक्षक जैसे ही बोलें सहस्रार तो बच्चे अपनी चोटी वाले स्थान पर हाथ रखेंगे। आज्ञा चक्र बोलने पर बच्चे तिलक वाले स्थान पर उंगली रखें । इसी प्रकार दूसरे चक्रों के नाम बोलेंगे और बच्चे उस-उस चक्र की स्थिति वाले स्थान पर हाथ रखें । नीचे के दो चक्रों के बारे में ना पूछें । आगे-पीछे क्रम बदलकर भी पूछ सकते हैं । जो गलत करेंगे वे खेल से बाहर हो जायेंगे । आख़री तक सही करने वाला विद्यार्थी विजेता होगा ।

खेल -2
इसी खेल को चक्र का क्रम पूछकर भी खेल सकते हैं या खेल का 2nd राउंड बनाकर भी खेल सकते हैं, जैसे शिक्षक बोलें ४ तो बच्चे अनहद चक्र पर हाथ रखें। ७ बोलें तो बच्चे चोटी पर हाथ रखें।

खेल -3
इसी खेल में चक्रों के तत्व के बारे में भी पूछ सकते हैं ।

खेल-4
इसी खेल में चक्रों के बीज मंत्र के बारे में भी पूछ सकते हैं ।

खेल-5
इसी खेल में चक्रों के रंग के बारे में भी पूछ सकते हैं ।

१. चक्र : मूलाधार
तत्व : पृथ्वी
बीज मंत्र : लं
चक्र रंग : लाल

२. चक्र : स्वाधिष्ठान
तत्व : जल
बीज मंत्र : वं
चक्र रंग :नारंगी

३. चक्र : मणिपुर
तत्व : अग्नि
बीज मंत्र : रं
चक्र रंग : पीला

४. चक्र : अनाहद
तत्व : वायु
बीज मंत्र : यं
चक्र रंग : हरा

५. चक्र : .विशुद्धाख्य
तत्व : आकाश
बीज मंत्र : हं
चक्र रंग : आसमानी

६. चक्र : आज्ञाचक्र
बीज मंत्र : शं
चक्र रंग : नीला

७. चक्र : सहस्रार
बीज मंत्र : ॐ
चक्र रंग : बैंगनी

Bhagwan Shri Krishna Ke Priya Anmol Ratan: Gau Aur Geeta

Shri Krishna ke anmol ratan gau aur geeta

Lord Shri Krishna’s Favourite Things/ Animal ➠ भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन मानवजाति के लिए एक महान आदर्श है ही परन्तु उनके जो दो प्रिय अनमोल रत्न हैं वे भी सभी के लिए आदरणीय,माननीय हैं। भगवान के वे दो रत्न हैं ‘गौ’ और ‘गीता’ ।

‘गौ” शारीरिक एवं बौद्धिक विकास की संजीवनी है तो ‘गीता’ आत्मिक विकास के लिए संजीवनी अमृत है। भारतवासी यदि इन दो का आदर करना सीख लें तो विश्व में ऐसी कोई भी शक्ति नहीं जो इस देश पर आघात लगा सके। श्रीकृष्ण का जीवन जितना अनमोल है उतने ही अनमोल उनके ये दो रत्न भी हैं।

➠ श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान के कारण सम्पूर्ण भारतवासियों ने ही नहीं अपितु सुज, महात्मा थोरो. एमर्सन आदि कई विदेशी मूर्धन्य विद्वानों ने भी श्रीकृष्ण के चरणों में अपना सिर झुकाया है। रसखान, मीर, पीरजादा और ताजबेगम आदि श्रीकृष्ण की भक्ति के रंग में रंगकर अपने जीवन को उज्ज्वल बना लेते हैं।

➢  सन् १९४० की घटित घटना है : प्रसिद्ध गामा पहलवान

➠ पहलवान (जिसका मूल नाम गुलाम हुसैन था) से पत्रकार जैका फ्रेड ने पूछा:

“आप एक हजार से भी ज्यादा भर्तियां खेल चुके हैं। कसम खाने के लिए भी लोग दो-पाँच कुश्ती हार जाते हैं। आपने हजारों कुश्तियों में विजय पाई है और आज तक हारे नहीं हैं। आपकी इस विजय का रहस्य क्या है ?”

➠ अजीज हुसैन के पुत्र गुलाम हुसैन (गामा पहलवान) ने कहा: “मैं किसी औरत की तरफ बुरी नजर से नहीं देखता हूँ। मैं जब कुश्ती में उतरता हूँ तो गीतानायक श्रीकृष्ण का ध्यान करता हूँ और बल की प्रार्थना करता हूँ। इसीलिए हजारों कुश्तियों में मैं एक भी कुश्ती हारा नहीं हूँ, यह श्रीकृष्ण की दुआ है।”

➠ ऐसे सर्वगुण सम्पन्न, लीलापुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की जयंती को उत्साह, प्रेम एवं भक्ति भाव के साथ मनाना हम भारतवासियों के लिए परम सौभाग्य की बात है।

~ लोक कल्याण सेतु / जुलाई-अगस्त 2001

5 Saal Ke Bacche Ne Car Drive Ki Traffic me: Mantra Jap Mahima

mantra jap mahima 5 saal ke bacche ne drive ki car

“मैंने पूज्य बापूजी से ‘सारस्वत्य मंत्र’ की दीक्षा ली है । जब मैं पूजा करता हूँ, बापूजी मेरी तरफ पलकें झपकाते हैं । मैं बापूजी से बातें करता हूँ। मैं रोज दस माला जप करता हूँ । मैं बापूजी से जो माँगता हूँ, वह मुझे मिल जाता है । मुझे हमेशा ऐसा एहसास होता है कि बापूजी मेरे साथ हैं ।

5 जुलाई 2005 को मैं अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था । मेरा छोटा भाई छत से नीचे गिर गया । उस समय हमारे घर में कोई बड़ा नहीं था। इसलिए हम सब बच्चे डर गये ।

इतने में पूज्य बापूजी की आवाज आयी कि ‘तांशू ! इसे वैन में लिटा और वैन चलाकर हास्पिटल ले जा ।’

उसके बाद मैंने अपनी दीदियों की मदद से हिमांशु को वैन में लिटाया। गाड़ी कैसे चली और अस्पताल तक कैसे पहुँची, मुझे नहीं पता । मुझे रास्ते भर ऐसा एहसास रहा कि बापूजी मेरे साथ बैठे हैं और गाड़ी चलवा रहे हैं । ( घर से अस्पताल की दूरी 5 कि.मी. से अधिक है । )

– तांशु बेसोया,
राजवीर कालोनी, दिल्ली – 96

5 साल का नन्हा ड्राईवर - तान्शु

Benefit of Mata Pita Sanskar on Anandmayi Maa: MPPD 2021 Special

Shri Anandmayi Maa Sanskar

Benefit of Mata Pita Sanskar on Anandmayi Maa: Matru Pitru Pujan Divas 2021 Special

आओ मनाएँ मातृ-पितृ पूजन दिवस : 14th February

माता-पिता, दादा-दादी आदि के संस्कारों का ही प्रभाव संतान पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्षरूप से पड़ता है।

श्री आनंदमयी माँ के पिता विपिनबिहारी भट्टाचार्य एवं माता श्रीयुक्ता मोक्षदासुंदरी देवी (विधुमुखी देवी) – दोनों ही ईश्वर-विश्वासी,भक्तहृदय थे। माता जी के जन्म से पहले व बहुत दिनों बाद तक इनकी माँ को सपने में तरह-तरह के देवी-देवीताओं की मूर्तियाँ दिखती थीं और वे देखतीं कि उन मूर्तियों की स्थापना वे अपने घर में कर रही हैं। आनंदमयी माँ के पिताजी में ऐसा वैराग्यभाव था कि इनके जन्म के पूर्व ही वे घर छोड़कर कुछ दिन के लिए बाहर चले गये थे और साधुवेश में रह के हरिनाम-संकीर्तन,जप आदि में समय व्यतीत किया करते थे।

माता जी के माता-पिता बहुत ही समतावान थे। इनके तीन छोटे भाइयों की मृत्यु पर भी इनकी माँ को कभी किसी ने दुःख में रोते हुए नहीं देखा। माता-पिता, दादा-दादी आदि के संस्कारों का ही प्रभाव संतान पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्षरूप से पड़ता है। माता जी बचपन से ही ईश्वरीय भावों से सम्पन्न, समतावान व हँसमुख थीं।

आनंदमयी माँ को आध्यात्मिक संस्कार तो विरासत में ही मिले थे अतः बचपन से ही कहीं भगवन्नाम-कीर्तन की आवाज सुनाई देती तो इनके शरीर की एक अनोखी भावमय दशा हो जाती थी। आयु के साथ इनका यह ईश्वरीय प्रेमभाव भी प्रगाढ़ होता गया। लौकिक विद्या में तो माता जी का लिखना-पढ़ना मामूली ही हुआ। वे विद्यालय बहुत कम ही गयीं। परंतु संयम, नियम-निष्ठा से व गृहस्थ के कार्यों को ईश्वरीय भाव से कर्मयोग बनाकर इन्होंने सबसे ऊँची विद्या – आत्मविद्या, ब्रह्मविद्या को भी हस्तगत कर लिया।

~आनन्दमयी माँ को विरासत में क्या मिला था ?

 

Freedom Fighters Played Role as “Gau Rakshak”

freedom fighter played role as Gau Rakshak

भारत में गौहत्या विशेषकर अंग्रेजों का शासन स्थापित होने पर शुरू हुई । यहाँ पहले गौहत्या न के बराबर ही होती थी लेकिन अंग्रेजों ने इसे बढ़ावा दिया । भारत में स्वतंत्रता के बीज का अंकुरण गौ के कारण ही हुआ ।

1857 ई. में जब अंग्रेज सरकार ने कारतूसों में गाय की चरबी का प्रयोग शुरू किया तो गौभक्त भारतीय सिपाही यह सहन न कर पाये कि विदेशी विधर्मी अंग्रेज सरकार गाय की चर्बी के माध्यम से पवित्र वैदिक धर्म नष्ट करे ।

वीर मंगल पांडे ने बैरकपुर छावनी (मेरठ) में गाय की चरबी लगे अपवित्र कारतूसों को छूने से इनकार करके खुला विद्रोह किया । इस विद्रोह के परिणाम स्वरूप भारत में प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन शुरू हुआ ।

झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई केवल स्वतंत्रता ही नहीं बल्कि गौरक्षा के लिए भी आजादी की लड़ाई में कूदी थीं और अंग्रेजी सैनिकों से लोहा लिया था ।

अंग्रेजों ने गोरी फौज का पेट भरने के लिए हिन्दुओं के पवित्र तीर्थस्थानी में गौओं को काटना प्रारम्भ कर दिया था । इससे अंग्रेजों के विरुद्ध घृणा और असंतोष उत्पन्न होना स्वाभाविक था ।

1857 की क्रांति के बाद स्वामी श्रद्धानंद, लाला लाजपत राय, हासानंद, पं. मदनमोहन मालवीयजी, लोकमान्य तिलक, चौधरी चरण सिंह आदि ने स्वतंत्रता आंदोलन को सक्रिय हुआ  था। इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन भारत में गौहत्या का कलंक पूरी तरह मिटाने का संकल्प लिया था । कई गौभक्तों ने बलिदान भी दिया । 

सन् 1921 के पावन गोपाष्टमी पर्व पर दिल्ली के ‘शहीदी हॉल’ में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता और महात्मा गांधी की उपस्थिति में एक सम्मेलन हुआ । उसमें सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया था कि ‘अंग्रेजी राज्य में गौहत्या होती है अतः इस राज्य को सहयोग नहीं किया जाए ।’

 

पं. मदनमोहन मालवीयजी ने जनवरी 1928 में प्रयाग में त्रिवेणी के पावन तट पर ‘अखिल भारतीय सनातन धर्म महासभा’ के अधिवेशन में हाथ में गंगाजल लेकर प्रतिज्ञा की थी कि स्वतंत्र भारत का जो संविधान बनेगा. उसके प्रथम परिच्छेद में ही गौ हत्या बंदी की कलम होगी ।

गौहत्या बड़ा-से-बड़ा महापाप है । गौवंश की रक्षा में ही देश की रक्षा समायी है । हम जीवनभर गौरक्षा तथा गौसेवा के लिए प्रयासरत रहेंगे ।

गांधीजी कहते थे : “मानव-विकास के इतिहास में गौरक्षा को मैं एक महत्त्वपूर्ण घटना मानता हूँ । मैं तो गौरक्षा को स्वराज्य से भी अधिक महत्व का प्रश्न मानता हूँ ।”

स्वामी श्रद्धानंद कहते थे : “गौमाता सब सुख-सम्पत्ति की दात्री है इसलिए इसकी रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने के लिए भी तत्पर रहना चाहिए ।”

– लोक कल्याण सेतु / नवम्बर 2017

Gau Raksha: Saving Humanity, Health & Culture

Gau raksha me hai manavata, swasthya v sanskriti ki raksha

-पूज्य बापूजी

गाय की रक्षा करने वाले हम कौन होते हैं ? अरे ! गाय तुम्हारी-हमारी और पर्यावरण की रक्षा करती है ।

चौरासी लाख प्राणी हैं किंतु देशी गाय के अलावा किसी का मल और मूत्र पवित्र नहीं माना जाता । चाहें कोई महाराजा हो, ब्राह्मण हो या तपस्वी हो फिर भी उसका मल-मूत्र लीपने के काम नहीं आता ।

जब कोई व्यक्ति मरने की स्थिति में होता है तब भूमि को देशी गाय के गोबर व मूत्र से लीपन कर उस पर उस व्यक्ति को लिटाते हैं ताकि उसकी सद्गति हो । देशी गाय के दूध, दही, घी, मूत्र में सुवर्णक्षार होते हैं ।

अगर किसी महिला को प्रसूति नहीं हो रही हो तो देशी गाय के गोबर का १० ग्राम ताजा रस पिलाने से सरलता से प्रसूति हो जाती है । किसी को कैंसर की बीमारी है तो प्रतिदिन गौ का मूत्र सेवन कराओ, ठीक हो जायेगा ।

राजतिलक के समय राजा को पंचगव्य (देशी गाय का दूध, दही, घी, मूत्र व गोबर-रस) पिलाने व उससे राजतिलक करने से राजा राज्य अच्छा चलायेगा ।

किसी भी खेत में थोड़े दिन देशी गाय को रखो फिर देखो वह खेत कितना फसल-उत्पादन देता है ।

गाय को सानी (पानी में भिगोयी हुई खली व भूसा), चारा आदि रखो या न रखो, केवल उसके सामने उसका बछड़ा लाने पर वह दूध देने लगेगी जबकि भैंस तो ऐसी स्वार्थी होती है कि सानी देखकर ही दूध देती है । यदि आप चाहते हो कि आपके बच्चे आगे चलकर अति स्वार्थी, अहंकारी बन के आपस में झगड़ें नहीं, भाई-भाई आपस में स्वार्थ,सम्पदा के कारण न लड़ें तो बच्चों को देशी गाय का दूध पिलायें ।

भैंस के  पाड़े आपस में लड़ते हैँ तो ऐसे लड़ते हैं कि छोड़ते ही नहीं, चाहें कितने ही डंडे मारो । डंडे टूट जायें तो भी वे लड़ना नहीं छोड़ते, भिड़े रहते हैं दो-दो दिन तक । बच्चे भैंस का दूध पीते हैं तो आगे चलकर ये सम्पत्ति, जमीन-जायदाद के लिए मुकदमेबाजी करते हैं व हथियार उठाते हैं लेकिन यदि गाय का दूध पीते हैं तो जैसे भगवान राम कहते हैं : ‘भरत राज्य करे ।’ और भरत जी कहते हैं : ‘नहीं, रामजी राज्य करें।’ – इस प्रकार भाई, भाई के चरणों में राज्य अर्पित कर देते हैं ।

औरंगजेब भैंस का दूध पीकर ऐसा हो गया था कि अपने बाप को ही जेल में डाला व राज्य करने लगा । गौ-सेवा करने वाले के दिल में खुशी होती है ।

गाय पालने वाले के घर में जितनी तंदुरुस्ती होगी उतनी गाय का मांस खाने वाले के घर में नहीं होगी, बिल्कुल पक्की बात है ! जो भी गौ- पालक हैं, उनको मैं धन्यवाद देता हूँ, प्रणाम करता है । 

दुर्भाग्यवश आज के लोग गाय का दर्शन, गाय के दूध व गौ-किरणों का प्रभाव भूल गये हैं । इसी कारण घर-घर में लोग बीमार पड़े हैं, शल्यक्रिया (ऑपरेशन) करा रहे हैं ।

आज कहीं अकाल पड़ रहा है, कहीं अतिवृष्टि हो रही है और कहीं मुकदमे हो रहे हैं । धन-धान्य भी इतना ठीक नहीं होता, मानो पृथ्वी ने रस खींच लिया है और फूलों ने खिलना भी कम कर दिया है ।

यह कहना बिल्कुल गलत है कि हम गाय की रक्षा करते हैं । हम गाय की नहीं बल्कि गाय हमारी रक्षा करती है । गौ-रक्षा हमारी आधारभूत आवश्यकता है । हम अपनी रक्षा के लिए गौ-रक्षा करते हैं, गौ तो कभी नहीं बोलती कि “मेरी रक्षा करो।” बुद्धिमान समझते हैं कि गाय की रक्षा में स्वास्थ्य, मानवता, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा है ।

– ऋषि प्रसाद / नवम्बर 2017

Why Indian Desi Cow is Called as Gau Mata of India and World

why indian desi cow is called gau mata of india and world

Know Why Cow is called Gau Mata/ Mother in Hindi.  Why do hindu worship cow? 

हम गाय की सेवा करेंगे तो गाय से हमारी सेवा होगी । सेवक कैसा होना चाहिए इस पर विचार करने से लगता है कि सेवक के हृदय में एक मधुर-मधुर पीड़ा रहनी चाहिए और उत्साह रहना चाहिए, निर्भयता रहनी चाहिए एवं असफलता देखकर उसे कभी भी निराश नहीं होना चाहिए ।

सेवक से सेवा होती है, सेवा से कोई सेवक नहीं बना करता ।

इस देश में ही नहीं, समस्त विश्व में मानव और गाय का ऐसा सम्बंध है जैसे मानव-शरीर के साथ प्राणों का ।

अन्य देशों में गाय का सम्बंध आत्मीय नहीं रहा, कहीं आर्थिक बना दिया गया, कहीं कुछ बना दिया गया (यह वक्तव्य उस समय का है जिस समय भारत में इतने कत्लखाने नहीं खुले थे) ।

मेरे ख्याल से गाय का सम्बंध आत्मीय सम्बंध है। गाय मनुष्य मात्र की माता है ।

मेरे दिल में एक दर्द है कि कोई घर ऐसा न हो जिसमें गाय न हो, गाय का दूध न हो । हर घर में गाय हो और गाय का दूध पीने को मिलना चाहिए । गाय ने मानवबुद्धि की रक्षा की है ।

बेईमानी का समर्थन करना और उससे एक-दूसरे पर अधिकार जमाना – यह प्रवृत्ति आज बढ़ती जा रही है ।

इसका कारण है कि बुद्धि सात्त्विक नहीं है, बुद्धि सात्त्विक क्यों नहीं है ? कारण, मन सात्त्विक नहीं है। मन सात्त्विक क्यों नहीं है ? कारण, शरीर सात्त्विक नहीं है । शरीर सात्त्विक नहीं है तो इसका कारण? आहार सात्त्विक नहीं है ।

गाय के दूध में, घी में स्वर्ण क्षार होते हैं, सात्त्विकता होती है । गाय के शरीर में से गोशक्ति के प्रभाव से

चौबीसों घंटे सात्त्विक तरंगें निकलती हैं । इसी कारण राजसी-तामसी शक्तियों की बाधा के शिकार बने बच्चों को गाय की पूंछ से झाडा जाता था । पूतना राक्षसी द्वारा नन्हे श्रीकृष्ण को भगा ले जाने के प्रसंग के बाद श्रीकृष्ण को भी गाय की पूँछ से झाड़ा गया था ।

जैसे-जैसे आप गोसेवा करते जायेंगे, वैसे-वैसे आपको यह मालूम होता जायेगा कि गाय आपकी सेवा कर रही है । स्वास्थ्य की दृष्टि से, बौद्धिक दृष्टि से और हर दृष्टि से आपको यह लगेगा कि आप गाय की सेवा कर रहे हैं तो गाय आपकी हर तरह से सेवाकर रही है ।

हम सच्चे सेवक होंगे तो हमारी सेवा होगी, हमारी सेवा का मतलब मानव-जाति की सेवा होगी । मानवमात्र की सेवा से ही सब कुछ हो सकता है। जब मानव सुधरता है तो सब कुछ सुधरता है और जब मानव बिगड़ता है तो सब कुछ बिगड़ जाता है ।

मानव को सात्विक आहार, सात्विक संग, श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत आदि सत्शास्त्रों का पठन-मनन और सत्संग-श्रवण करना चाहिए । उसका मंगल इसमें है कि वह सद्गुण बढ़ाता जाय ।

– ऋषि प्रसाद, जुलाई 2005

Advantages/ Importance of Indian Desi Cow [देसी गाय]

importance of Indian desi cow

भारतीय गायें विदेशी तथाकथित गायों की तरह बहुत समय तक जंगलों में हिंसक पशु के रूप में घूमते रहने के बाद घरों में आकर नहीं पलीं, वे तो शुरू से ही मनुष्यों द्वारा पाली गयी हैं ।

भारतीय गायों के लक्षण हैं उनका गल-कम्बल (गले के नीचे झालर-सा भाग), पीठ का कूबड़, चौड़ा माथा, सुंदर आँखें तथा बड़े मुड़े हुए सींग । भारतीय गोवंश की कुछ प्रमुख नस्लें हैं गिर, थारपारकर, साहीवाल, लाल सिंधी आदि ।

भारतीय गायों पर करनाल की ‘नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेस (एनबीएजीआर) संस्था ने अध्ययन कर पाया कि इनमें उन्नत ‘A-2 एलील जीन’ पाया जाता है, जो इन्हें स्वास्थ्यवर्धक दूध उत्पन्न करने में मदद करता है ।

भारतीय नस्लों में इस जीन की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) 100 प्रतिशत तक पायी जाती है, जबकि विदेशी नस्लों में यह 60 प्रतिशत से भी कम होती है ।

भारतीय गोवंश में गर्मी, सर्दी तथा वर्षा को सहने की क्षमता होती है । बरसात में इनकी त्वचा से तैलीय पदार्थ के निकलने से उन्हें वर्षा से होने वाला कोई संक्रमण नहीं होता ।

भारतीय गायों में ‘सूर्यकेतु नाड़ी’ होती है । गायें अपने लम्बे सींगों के द्वारा सूर्य की किरणों को इस सूर्यकेतु नाड़ी तक पहुँचाती हैं । इससे सूर्यकेतु नाड़ी स्वर्णक्षार बनाती है, जिसका बड़ा अंश दूध में और अल्पांश गोमूत्र में आता है ।

भारतीय गाय के दूध में ‘ओमेगा-6’ फैटी एसिड होता है, जिसकी कैंसर-नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका है ।

विदेशी नस्ल की गायों के दूध में इसका नामोनिशान तक नहीं है । भारतीय गाय के दूध में अनसैचुरेटेड फैट होता है, इससे धमनियों में वसा नहीं जमती और यह हृदय को भी पुष्ट करता है ।

भारतीय गाय चरते समय यदि कोई विषैला पदार्थ खा लेती है तो दूसरे प्राणियों की तरह वह विषैला तत्व दूध में मिश्रित नहीं होता भारतीय गाय संसार के एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके मल-मूत्र का औषधि तथा यज्ञ-पूजा आदि में उपयोग होता है ।

परमाणु विकिरण से बचने में गाय का गोबर उपयोगी होता है । भारतीय गाय के गोबर-गोमूत्र में रेडियोधर्मिता को सोखने का गुण होता है । भोपाल में घातक गैस का रिसाव हुआ तो इसका असर उन घरों में कम हुआ, जो गोबर से लिपे हुए थे व जहाँ गाय के घी एवं कंडे से हवन होता था ।

भारतीय गोवंश का पंचगव्य निकट भविष्य में प्रमुख जैव-औषधि बनने की सीमा पर खड़ा है । अमेरिका ने पेटेंट देकर स्वीकार किया है कि कैंसर-नियंत्रण में गोमूत्र सहायक है ।

भारतीय गाय की पीठ पर, गलमाला पर प्रतिदिन आधा घंटा हाथ फेरने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है ।

गोबर को शरीर पर मलकर स्नान करने से बहुत-से चर्मरोग दूर हो जाते हैं गोमय-स्नान को पवित्रता और स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम माना गया है । इस प्रकार भारतीय गाय की अनेक अद्भुत विशेषताएँ हैं । 

धनभागी हैं वे लोग, जिनको भारतीय गाय  का दूध, दूध के पदार्थ आदि मिलते हैं और जो उनकी कद्र करते हैं ।

~लोक कल्याण सेतु, अगस्त 2015

 

Madan Mohan Malviya Quotes Sayings for “Gau Rakshak” [Gau Seva]

Bharat Kalyan k liye Gau Raksha Anivarya

– पं. मदनमोहन मालवीयजी

आप जानते हैं कि भारत के कल्याण के लिए गौ-रक्षा अनिवार्य है । संसार का जो उपकार गौमाता ने किया है, उसके महत्व को जानते हुए भी लोग गौ की उपेक्षा करते हैं और गौ-रक्षा के प्रश्न पर ध्यान नहीं देते । यह उनका भ्रम (बेहोशी) और अन्याय है ।

जो लोग गोवध करते हैं अथवा गोवध करना अपना धर्म समझते हैं उनके अज्ञान का ठिकाना नहीं ।

गौ जैसे उपकारी प्राणी का वध करना कभी भी धर्मसंगत नहीं कहा जा सकता । दुःख की बात है कि जो लोग गौमाता को पूज्य दृष्टि से देखते हैं और उनकी पूजा कर वैतरणी* पार उतरना चाहते हैं, वे भी गौ-सेवा से विमुख दिखाई देते हैं ।

सब सज्जनों से मैं अनुरोध करता हूँ कि गौ-रक्षा के प्रश्न पर विशेष ध्यान दें और प्राणपण से इस बात की चेष्टा करें कि भारत में फिर वही दिन आ जाए जब गौ सचमुच में माता समझी जाए और उसकी रक्षा के लिए हम अपने प्राणों का मोह न करें ।

मुझे पूरा विश्वास है कि यदि आप ऐसा संकल्प कर लेंगे और गौ रक्षा के अनुष्ठान में तन-मन-धन से लग जायेंगे तो वे दिन दूर नहीं हैं, जब फिर से देश में दूध की नदियाँ बहें और प्रत्येक भारतीय गौमाता को पूज्य दृष्टि से देखे । याद रहे कि इस्लाम या कुरान शरीफ में गोवध का विधान नहीं है जो हमें उसके रोकने में मजहब की अड़चन पड़े । गौमाता की सभी संतान हैं ।

हिन्दू, मुसलमान या ईसाई का सवाल गौमाता के यहाँ नहीं है। अकबर को इस बात का ज्ञान था । उसने गोवध बंद करवा दिया था । सँभलो और औरों को समझाओ कि दिव्य जीवन के लिए गौ-सेवा कितने महत्त्व की चीज है ।

विश्वास रखो कि यदि आप गौ-पालन के लिए तैयार हो गये तो परमात्मा अवश्य आपकी मदद करेगा और आप जरूर अपने काम में सफल होंगे ।

*पुराणानुसार परलोक की एक नदी, जिसे जीवात्मा को शरीर छोड़ने पर पार करना पड़ता है ।

– लोक कल्याण सेतु / अक्टूबर 2018

 

 

Janm Diwas Badhai Song [Best Happy Birthday Song Hindi Lyrics]

janm diwas badhayi geet

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बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।
बधाई हो बधाई, जन्मदिन की बधाई।।

जन्मदिवस पर देते हैं, तुमको हम बधाई,

जीवन का हर इक लम्हा, हो तुमको सुखदाई।

धरती सुखदायी, हो अम्बर सुखदाई,

जल सुखदाई, हो पवन सुखदाई। बधाई….

मंगलमय दीप जलाओ, उजियारा जग फैलाओ।

उद्यम पुरुषार्थ जगाकर, आत्मपद को अपने पाओ।

हो शतंजीव तुम चिरंजीव, शुभ घड़ी आज आई।।

माता सुखदाई, हो पिता सुखदाई,

बंधु सुखदाई, हो सखा सुखदाई। बधाई….

सदगुण की खान बने तू, इतना महान बने तू।

हर कोई चाहे तुझको, ऐसा इन्सान बने तू।

बलवान हो तू महान हो, करे गर्व तुझ पे अब हम।।

दर्शन सुखदाई, हो जीवन सुखदाई। बधाई…

ऋषियों का वंशज है तू, ईश्वर का अंश है तू।

तुझमें है चंदा और तारे, तुझमें ही सर्जनहारे।

तू जान ले पहचान ले, निज शुद्ध बुद्ध आतम।।

ईश्वर सुखदाई, ऋषिवर सुखदाई, सुमति सुखदाई, हो सत्ज्ञान सुखदाई। बधाई….

आनंदमय जीवन तेरा, खुशियों का हो सवेरा।

चमके तू बन के सूरज, हर पल हो दूर अँधेरा।

तू ज्ञान का भंडार है, रखना तू धैर्य संयम।।

ग्रह सुखदाई, हो गगन सुखदाई,

जल सुखदाई, हो अगन सुखदाई। बधाई….

तुझमें ना जीना मरना, जग है केवल एक सपना।

परमेश्वर है तेरा अपना, निष्ठा तू ऐसी रखना।

तू ध्यान कर आत्मरूप का, तू सृष्टि का है उद्गम।।

मंजिल सुखदाई, हो बधाई हो बधाई। बधाई….

बधाई हो बधाई, शुभ दिन की बधाई।
बधाई हो बधाई, जन्मदिन की बधाई।।

जल, थल, पवन, अगन और अम्बर, हो तुमको सुखदाई।

गम की धूप लगे ना तुझको, देते हम दुहाई।।

ईश्वर सुखदाई, ऋषिवर सुखदाई,

सुमति सुखदाई, हो सत्ज्ञान सुखदाई। बधाई….

~ हम भारत के लाल