Benefits Of Mantra Chanting based on Science/ Scientific Facts (Om, Gayatri Mantra Ke Fayde Science): नानकजी ने बड़ी ही सुंदर बात कही है : 

भयनाशन दुर्मति हरण कलि में हरि को नाम ।

निशदिन नानक जो जपे सफल होवहिं सब काम ॥

भगवन्नाम में, मंत्रजाप में बड़ी अद्भुत शक्ति है। इसे वैज्ञानिक भी स्वीकार कर रहे हैं। बंगाल की सुप्रसिद्ध गायिका तारा देवी ने जब अपने साज पर तालबद्ध वेद की ऋचाएँ गायीं तो बालू पर कुछ सौम्य आकृतियाँ उभर आयीं।

एकतान होकर भैरव राग गाने से और दृष्टि एकाग्र करने से बालू पर पहले कुत्ते जैसी आकृति उभरी, बाद में भैरव की आकृति उभर आयी !

विदेशों में भी लोग दंग हो रहे हैं कि शब्द के साथ आकृति का इतना प्राकृतिक और वैज्ञानिक सम्बन्ध होता है यह हमें पता न था!

अभी डॉ. लिवर लिजेरिया, वॉट्स हक, मैडम लोंगो तथा दूसरे वैज्ञानिक कहते हैं कि ह्रीं, हरि, ॐ आदि के उच्चारण से शरीर के विभिन्न भागों पर भिन्न-भिन्न हितकारी असर पड़ता है। १७ वर्षों के अनुभव के पश्चात् उन्होंने यह खोज निकाला कि हरि के साथ अगर ॐ शब्द मिलाकर उच्चारण किया जाय तो पाँचों ज्ञानेन्द्रियों पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ता है और मंत्र के बल से निःसंतान व्यक्तियों को संतान दी जा सकती है। किंतु भारत के ऋषि-मुनियों ने इससे भी अधिक जानकारी हजारों-लाखों वर्ष पहले शास्त्रों में वर्णित कर दी थी ।

भगवन्नाम-जप से केवल स्थूल शरीर को फायदा होता है ऐसी बात नहीं है वरन् इससे हमारे अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय इन पाँचों शरीरों पर, समस्त नाड़ियों पर तथा सातों केन्द्रों पर बड़ा सात्त्विक प्रभाव पड़ता है।

भगवन्नाम-जप से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है, अनुमान शक्ति जगती है, स्मरणशक्ति और शौर्यशक्ति का विकास होता है ।

सारस्वत्य मंत्र के प्रभाव से बुद्धि कुशाग्र होती है, स्मरणशक्ति विकसित होती है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में या अन्य छुट्टियों के समय सारस्वत्य मंत्र का अनुष्ठान करके बच्चे इसका अधिकाधिक लाभ उठा सकते हैं ।

पहले के गुरुकुलों में लौकिक विद्या के साथ साथ विद्यार्थियों की सुषुप्त शक्तियाँ भी जाग्रत हों, ऐसी व्यवस्था थी। इसीलिए गुरुकुल में पढ़ा हुआ विद्यार्थी प्रमाणपत्र लेकर नौकरी के लिए। धक्के नहीं खाता था। जहाँ भी, जिस किसी क्षेत्र में जाता सफलता अर्जित करता था। आजकल तो बेचारे कई जवान प्रमाणपत्र लेकर घूमते रहते हैं किंतु नौकरी के ठिकाने नहीं होते। नौकरी मिलने पर भी पदोन्नति की चिंता और तबादले का डर तो बना ही रहता है।

यदि आज का विद्यार्थी इस बात को समझ ले और पहुँच जाय किन्हीं ब्रह्मवेत्ता महापुरुष के चरणों में तो वह आज भी अपनी सुषुप्त शक्तियों को जाग्रत करने की कुंजियाँ पाकर अपने जीवन को व औरों को भी समुन्नत कर सकता है।

– ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2004