Lord Shri Krishna’s Favourite Things/ Animal ➠ भगवान श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन मानवजाति के लिए एक महान आदर्श है ही परन्तु उनके जो दो प्रिय अनमोल रत्न हैं वे भी सभी के लिए आदरणीय,माननीय हैं। भगवान के वे दो रत्न हैं ‘गौ’ और ‘गीता’ ।

‘गौ” शारीरिक एवं बौद्धिक विकास की संजीवनी है तो ‘गीता’ आत्मिक विकास के लिए संजीवनी अमृत है। भारतवासी यदि इन दो का आदर करना सीख लें तो विश्व में ऐसी कोई भी शक्ति नहीं जो इस देश पर आघात लगा सके। श्रीकृष्ण का जीवन जितना अनमोल है उतने ही अनमोल उनके ये दो रत्न भी हैं।

➠ श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान के कारण सम्पूर्ण भारतवासियों ने ही नहीं अपितु सुज, महात्मा थोरो. एमर्सन आदि कई विदेशी मूर्धन्य विद्वानों ने भी श्रीकृष्ण के चरणों में अपना सिर झुकाया है। रसखान, मीर, पीरजादा और ताजबेगम आदि श्रीकृष्ण की भक्ति के रंग में रंगकर अपने जीवन को उज्ज्वल बना लेते हैं।

➢  सन् १९४० की घटित घटना है : प्रसिद्ध गामा पहलवान

➠ पहलवान (जिसका मूल नाम गुलाम हुसैन था) से पत्रकार जैका फ्रेड ने पूछा:

“आप एक हजार से भी ज्यादा भर्तियां खेल चुके हैं। कसम खाने के लिए भी लोग दो-पाँच कुश्ती हार जाते हैं। आपने हजारों कुश्तियों में विजय पाई है और आज तक हारे नहीं हैं। आपकी इस विजय का रहस्य क्या है ?”

➠ अजीज हुसैन के पुत्र गुलाम हुसैन (गामा पहलवान) ने कहा: “मैं किसी औरत की तरफ बुरी नजर से नहीं देखता हूँ। मैं जब कुश्ती में उतरता हूँ तो गीतानायक श्रीकृष्ण का ध्यान करता हूँ और बल की प्रार्थना करता हूँ। इसीलिए हजारों कुश्तियों में मैं एक भी कुश्ती हारा नहीं हूँ, यह श्रीकृष्ण की दुआ है।”

➠ ऐसे सर्वगुण सम्पन्न, लीलापुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण की जयंती को उत्साह, प्रेम एवं भक्ति भाव के साथ मनाना हम भारतवासियों के लिए परम सौभाग्य की बात है।

~ लोक कल्याण सेतु / जुलाई-अगस्त 2001