जो छोटे बच्चे मोबाइल से खेलते हैं, वो देर से बोलना शुरू करते हैं।
-‘टाइम मैगजीन में प्रकाशित रिपोर्ट’

लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर का खतरा ।
-‘एम्स की स्टडी’

मोबाइल बच्चों में ड्राई आइज की बड़ी वजह।
-‘द.कोरियाई वैज्ञानिक’

अगर आप अपने बच्चे को मोबाइल या टैबलेट दे रहे हैं या आप उनके सामने लगातार मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं…तो आपको इससे जुड़े खतरे भी पता होने चाहिए । 

क्या आपको पता है दुनिया के सबसे अमीर शख्सियतों में शुमार बिल गेट्स ने अपने बच्चों को 14 साल की उम्र तक मोबाइल नहीं दिया था । इसी तरह स्टीव जॉब्स ने 2011 में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपने बच्चों को कभी भी आईपैड इस्तेमाल नहीं करने दिया था । ये दो उदाहरण सिर्फ इसलिए है, ताकि आप यह जान सकें कि मोबाइल दुनिया की सबसे जरूरी वस्तु नहीं है । 

दुनिया में मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर भी कई रिसर्च हुई हैं, जिनके परिणाम चौंकाने वाले हैं । जो बच्चे स्मार्टफोन किसी भी रूप में इस्तेमाल करते हैं (वीडियो देखने-गाना सुनने) वे अन्य बच्चों की तुलना में देर से बोलना शुरू करते हैं । छह माह से दो साल तक 900 बच्चों पर किए गए सर्वे में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। हर 30 मिनट के स्क्रीन टाइम (मोबाइल इस्तेमाल) से ही 49% आसार बढ़ जाते हैं कि बच्चा देरी से बोलना शुरू करेगा । वहीं दुनिया की जानी- मानी एडिक्शन थैरेपिस्ट मैंडी सालगिरी ने तो यहां तक कहा है कि बच्चों को स्मार्टफोन देना उन्हें एक ग्राम कोकेन देने के बराबर है ।

समाधान आप ही हैं…

मोबाइल हमारे घरों की दीवार बन रहा है । यह बच्चों को अपने ही दायरे में कैद करता जा रहा है । अगर आप चाहते है कि आपके बच्चे खुलकर खिलें तो उन्हें कोई कृत्रिम खुशी के बजाय अपना वक्त दें । मोबाइल को नियंत्रित करिए…..और बच्चों को इससे आज़ाद ।