How to Celebrate Dussehra 2020 [Vijayadashami Ke Din Kya Karna Chaiye]

दशहरा के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो ‘सर्वसिद्धिदायी विजय काल’ कहलाता है ।

उस समय घूमने-फिरने मत जाना । दशहरा मैदान मत खोजना … रावण जलता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी, रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण मे होगा …. गंदा धुआं श्वास में लेना …. धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है ।

ये दशहरे के दिन शाम को घर पर ही स्नान आदि करके, दिन के कपड़े बदल के शाम को धुले हुए कपड़े पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाएँ । थोडा ” राम रामाय नम: “ मंत्र जपते… विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन गुरुदेव को प्रणाम करके ‘गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है… हम विजय के लिए ये मंत्र जपते हैं –

“ॐ अपराजितायै नमः “

ये मंत्र की १ – २ माला जप करना और इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-

“पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥”

‘पवन तनय बल पवन समाना’ की भी १ माला कर लें उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर लें । फिर देखो अगले साल के दशहरा तक गृहस्थ में जीने वाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं ।