Kisko Banayein Apna Aadarsh — Who Should be Youth’s Legend Or Inspirational Person for Youth of India in Hindi : इस प्रसंग द्वारा बच्चों को समझा सकते हैं कि “हमें अपना आदर्श फिल्मी कलाकारों को नहीं वरन संतों-महापुरुषों को बनाना चाहिए

 बच्चों, युवाओं,  विद्यार्थियों को पूज्यश्री के बचपन का यह गुण बिल्कुल सीखने जैसा है कि पूज्यश्री ने संतों-महापुरुषों को अपना आदर्श बनाने पर संतत्व, महापुरुषत्व मिलता है न कि बनाया । 

संतों-महापुरुषों को ही अपना आदर्श ऐसे-वैसों की नकल करने से। आदर्श ऊँचा बनाने से महान बनते हैं। अपने-आपसे पूछे कि हम किसको अपना आदर्श बना रहे हैं?

बापूजी बचपन में एक बार स्वामी विवेकानंद की तस्वीर को लाकर घर में लगा रहे थे तो भाभी बोली :”यह क्या संतों की तस्वीरें लगाता रहता है ?”

“मैं भी एक दिन ऐसा ही बनूँगा, भगवान को पाऊँगा!” 

“ऊँह ऐसा बनेगा !! ( कटाक्ष करते हुए कहा)

 “जैसे अभी मैं संतों की तस्वीरें लगाता हूँ ऐसे ही मेरी तस्वीरें लाखों घरों में लगेंगी ।”

     ऊँह ! संत बनेगा ?  लाखों लोगों के घरों में तस्वीरें लगेंगी ? भगवान को पाएगा ? बैठा रह, बैठा रह ! छोटा मुँह बड़ी बात और मुँह गुब्बारे जैसा फुलाकर दोनों हाथों से गुब्बारा फोड़ देती थी ।

पर जब पूज्य सद्गुरु भगवत्पाद  स्वामी लीलाशाहजी महाराज की पास पूर्ण कृपा पाई और सात साल एकांतवास कराके गुरूजी ने आपको अहमदाबाद भेजा तो फिर वही भाभी आपके दर्शन के लिए कतार में लगी थी ।

आप बोलते : क्यों ? ऊँह…!” और मुँह गुब्बारे जैसा फुला क़े गुब्बारा फोड़ते ।
 तो भाभी कहती :” प्रभु! भूल हो गई ।  भगवान हैं  आप ! देखो यह सब याद नहीं करना, हम तो बच्चे हैं आपके ।”

अच्छे संस्कार मिल जाएं तो बच्चों में दैवी गुण आ जाते हैं और वे आगे चलकर महान बनते हैं।”