जब तिलकजी ने बिना हिले-डुले, व्यथित हुए शांतिपूर्वक ऑपरेशन करा लिया।

श्रीमद् भगवद्गीता की महिमा अपरम्पार है । आपको गीताजी की महिमा के बारे में लोकमान्य तिलकजी (Lokmanya Tilak ji) के जीवन का एक अद्भुत प्रसंग सुनाते हैं :

एक बार उनके अँगूठे का ऑपरेशन होना था । अँगूठे के ऑपरेशन में भारी दर्द होने की वजह से डॉक्टर उन्हें दवा सुँघाकर बेहोश करने को तैयार हुए तो लोकमान्यजी ने कहा :

‘‘डॉक्टर साहब ! ये आप क्या कर रहे हो ? अँगूठे के ऑपरेशन में दर्द महसूस न हो इसलिए बेहोशी की दवा सुँघा रहे हो ? आप अपना काम शुरू कीजिए । मुझे दवा सुँघाने की कोई जरूरत नहीं है । मैं श्रीमद् भगवद्गीता का गहन अध्ययन करता हूँ । आप बेखटक ऑपरेशन कर लीजिए।

डॉक्टर को तो बहुत आश्चर्य हुआ जब तिलकजी ने बिना हिले-डुले, व्यथित हुए शांतिपूर्वक ऑपरेशन करा लिया ।
डॉक्टर के पूछने पर तिलकजी ने कहा : ‘‘गीता के ज्ञान में मैं इतना तल्लीन हो गया था कि मेरा इस दर्द की ओर ध्यान ही नहीं गया । मुझे दर्द महसूस ही नहीं हुआ । अतः प्रत्येक भारतवासी को श्रीमद् भगवद्गीता का अध्ययन करना चाहिए ।

भारतीय संस्कृति के इस दिव्य ज्ञान से अपने आपको पावन करते रहना चाहिए । उस दिन से आपने यह संकल्प लिया कि श्रीमद्भगवद्गीता के कुछ श्लोकों का पाठ करके ही सोऊँगा और इस दिव्य ज्ञान को अपने जीवन में लाऊँगा । ऐसा करने से आपको बहुत ही लाभ होने लगा ।