बल ही जीवन है,दुर्बलता मौत है और सब बलों का मूल स्थान आत्मा-परमात्मा है। इसलिए सुबह नींद में से उठके किसका ध्यान करोगे ?

आत्मा-परमात्मा का !!

सुबह (Suprabhat) नींद में से उठते ही थोड़ी देर चुप बैठो। फिर अंतर्यामी को कहना कि: ‘अंतर्यामी हम तुम्हारे, तुम हमारे । तुम्हारी शक्ति से रात्रि को नींद आयी। अब हमारी
सद्बुद्धि बढ़े, भक्ति बढ़े, हमारा उद्यम, साहस आदि बढ़े।

ऐसा करके अपने हाथ मुँह पर घुमाकर भगवान व धरती को प्रणाम करके धरती पर पैर रखना चाहिए अथवा सुबह नींद में से उठकर भ्रूमध्य (दोनों भौंहों के मध्य) में ॐकार का, शिवजी का या अपने सद्गुरु का ध्यान करो। इससे बहुत चमत्कार होगा।

आँखें बंद रहें, दबाव न पड़े। दबाव पड़ेगा तो आँखों में अथवा सिर में तकलीफ हो सकती है।

जैसे भोजन करने में २५-३० मिनट लगते हैं। लेकिन वह ८-१० घंटे पुष्टि देता है, ऐसे ही कुछ मिनट भृकुटी (भूमध्य) में ध्यान तुमको १०-१२ घंटे सूझबूझ, प्रसन्नता पाने में बड़ी मदद करेगा। विचारशक्ति, निर्णयशक्ति और रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाने में मदद करेगा, आनंद बना रहेगा। फिर जरा-जरा बात में राग-द्वेष नहीं सतायेगा, विरोधियों की अवहेलना, द्वेषी, ईर्ष्याखोरों की ईर्ष्या तुम पर हावी नहीं होगी। तुम्हारी सूझबूझ बढ़ जायेगी।