Holi Special Songs/ Bhajans List 2026 Mp3 Download, Lyrics
होली रंगों का त्यौहार है । रंग जरूर खेलो, मगर गुरुज्ञान का रंग खेलो । रासायनिक रंगों से तो हर साल होली खेलते हो, इस बार गुरुज्ञान के रंग से अपने हृदय को रँग लो
होली रंगों का त्यौहार है । रंग जरूर खेलो, मगर गुरुज्ञान का रंग खेलो । रासायनिक रंगों से तो हर साल होली खेलते हो, इस बार गुरुज्ञान के रंग से अपने हृदय को रँग लो
होली की रात को बिना तेल-घी का भोजन करना चाहिए । इसके पीछे कितना सूक्ष्म रहस्य है कि चिकने-चटपटे पदार्थ खाने से कफ बढ़ता है । अतः बिना घी-तेलवाला रात्रि का भोजन होता है तो
मैं सात साल के आसपास का था तब की बात है । होली के दिन माँ ने एक मोटी रोटी बनायी, जिसको रोट बोलते हैं । उस पर से बायें और ऊपर से नीचे धागा
होली के दिन किया हुआ जप लाख गुना फलदायी होता है । यह साफल्य-दिवस है, घुमक्कड़ों की नाई भटकने का दिन नहीं है । मौन रहना, उपवास पर रहना, फलाहार करना और अपना-अपना गुरु मंत्र
Happy Holi Precautions & Safety Tips for Kids, Females for Holi 2026 प्राचीन काल में पलाश के फूलों से तैयार सात्त्विक रंग अथवा गुलाल, कुमकुम, हल्दी से होली खेली जाती थी । लेकिन आज के
Pujya Sant Shri Asharam BapuJi’s Sandesh on Dussehra 2025 [Vijaya Dashami Special Message] ‘‘दशहरा (विजयादशमी) यह संदेश देता है कि जो दसों इन्द्रियों से सांसारिक विषयों में रमण करते हुए उनसे मजा लेने के पीछे
Vijayadashami 2025 Special [विजयदशमी विशेष] जो अपने आत्मा को ‘मैं और व्यापक ब्रह्म को ‘मेरा मानकर स्वयं को प्राणिमात्र के हित में लगाके अपने अंतरात्मा में विश्रांति पाता है वह राम के रास्ते है ।
Vijayadashami 2025 Puja Shubh Muhurat Timings [Bina Muhurat ke Muhurat Dussehera 2025 : विजयादशमी (Vijyadashmi) का दिन बहुत महत्त्व का है और इस दिन सूर्यास्त के पूर्व से लेकर तारे निकलने तक का समय अर्थात् संध्या
How to Celebrate Dussehra 2025 [Vijayadashami Ke Din Kya Karna Chaiye] दशहरा के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो ‘सर्वसिद्धिदायी विजय काल’ कहलाता
‘श्रीमद् भागवत’ के ग्यारहवें स्कंध के तेरहवें अध्याय के चौथे श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण उद्धवजी को बोलते हैं : आगमोऽपः प्रजा देशः कालः कर्म च जन्म च । ध्यानं मन्त्रोऽथ संस्कारो दशैते गुणहेतवः ।। ‘शास्त्र, जल, प्रजा जन, देश, समय, कर्म, जन्म, ध्यान, मंत्र और संस्कार – ये दस वस्तुएँ यदि सात्विक हों तो सत्वगुण की, राजसिक हों तो रजोगुण की और तामसिक हों तो तमोगुण की