इन दिनों में बीते वर्ष की विदाई पर पाश्चात्य अंधानुकरण से नशाखोरी, आत्महत्या आदि की वृद्धि होती जा रही है । तुलसी उत्तम अवसादरोधक एवं उत्साह, स्फूर्ति, सात्विकतावर्धक होने से इन दिनों में यह पर्व मनाना वरदान तुल्य साबित होगा ।

➨Tulsi Pujan Diwas Kyu Manaya Jata Hai ?

८०-९० वर्ष पहले तक लगभग प्रत्येक हिन्दू घर में तुलसी का पौधा अवश्य मिलता था, जिसका रोगनाशक तेल हवा के साथ पूरे घर में फैला रहता था । घर के लोग स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाते थे, उसके पत्तों का सेवन करते थे ।

महिलाएँ संध्या-दीप जलाती थीं, तुलसी को भगवद्-स्वरूप मानकर उसकी पूजा-आराधना करती थीं । इससे अनेक रोगों से सुरक्षा रहती थी । संसार में केवल तुलसी ही ऐसा पौधा है जिसके पंचांग में समाया हुआ रोगनाशक तेल हवा के द्वारा आसपास के वायुमंडल में फैल जाता है । आधुनिकता के पीछे आँखें मूँदकर दौड़ने वालों ने तुलसी को घर से बहिष्कृत कर दिया, जिससे बीमारी, कलह, अशांति में कई गुना वृद्धि हुई है ।

करुणासिंधु पूज्य बापूजी को मानव-समाज की यह दुर्दांत पीड़ा सहन नहीं हुई और पूज्यश्री ने तुलसी की महिमा व उपयोगिता पिछले ५० वर्षों में जन-जन तक पहुँचायी । समाज को तुलसी की शास्त्र वर्णित महत्ता, अनुभूत प्रयोग और उपयोगिता बतायी । समय की माँग को देखते हुए २५ दिसम्बर को ‘तुलसी पूजन दिवस’ पर्व मनाने की शुरुआत भी की ।

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~ ऋषि प्रसाद, दिसम्बर 2020