➠ होली की रात को बिना तेल-घी का भोजन करना चाहिए। इसके पीछे कितना सूक्ष्म रहस्य है कि चिकने-चटपटे पदार्थ खाने से कफ बढ़ता है । अतः बिना घी-तेलवाला रात्रि का भोजन होता है तो सूखे अन्न से आपके कफ का अवशोषण होगा, पाचन-तंत्र ठीक बना रहेगा ।

➠ इन दिनों में कीर्तन-यात्रा निकालना विशेष हितकारी है ।

➠ इस ऋतु में 1 से 20 दिन रोज 15-20 नीम के कोमल पत्ते २ काली मिर्च के साथ चबा लें तो वर्षभर आपकी रोगप्रतिकारक शक्ति की रक्षा होगी ।

➠ 15-20 दिन अलोना (नमक बिना का) भोजन करें तो आपका कफ संतुलित रहेगा, कमजोरी नहीं आयेगी, शरीर स्वस्थ बना रहेगा ।

➠ इस मौसम में गन्ना चूसना, करेला खाना स्वास्थ्यप्रद है ।

➠ प्राणायाम, आसन करने चाहिए इस जीवनशक्ति का विकास होता है ।

➠ कूद-फाँद करना और नया धान्य, जिसको ‘होला’ बोलते हैं, सृष्टिकर्ता को अर्पण करके सेंककर बाँटते हुए खाना-खिलाना चाहिए ।

➠ पूनम के दिन पंचगव्य का प्रसाद लेना चाहिए। इससे हड्डी तक के रोगों का शमन होता है ।

– ऋषि प्रसाद, फरवरी 2015

पलाश के फूलों से होली खेलें
पलाश के फूलों का रंग रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है । गर्मी को पचाने की, सप्तरंगों व सप्तधातुओं को संतुलित करने की क्षमता पलाश में है। पित्त और वायु मिलकर हृदयाघात (हार्ट- अटैक) का कारण बनते हैं। लेकिन जिस पर पलाश के फूलों का रंग छिड़क देते हैं उसका पित्त शांत हो जाता है तो हृदयाघात कहाँ से आयेगा ? वायुसंबंधी 80 प्रकार की बीमारियों को भगाने की शक्ति इस पलाश के रंग में है । पलाश के फूलों से जो होली खेली जाती है, उसमें अन्य रासायनिक रंगों की अपेक्षा पानी की बचत भी होती है ।

➢ ऋषि प्रसाद, मार्च 2014