◆ चटक केसरिया रंग :
(१) पलाश के फूलों को रातभर भिगोकर उबाल लें।

आयुर्वेद ने प्राकृतिक रंगों में पलाश के रंग को बहुत महत्त्वपूर्ण माना है। यह कफ, पित्त, कुष्ठ, दाह, मूत्रकृच्छ, वायु तथा रक्तदोष का नाश करता है। यह प्राकृतिक केसरिया रंग रक्तसंचार की वृद्धि करता है, मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मानसिक शक्ति, इच्छा शक्ति को बढ़ाता है।

(२) चुटकी भर चंदन चूर्ण एक लीटर पानी में मिला लें।

◆ पीला गुलाल :

(१) ४ चम्मच बेसन, २ चम्मच हल्दी चूर्ण मिलायें।
(२) अमलतास या गेंदा के फूलों के चूर्ण के साथ कोई भी आटा या मुल्तानी मिट्टी मिला लें।

◆ पीला रंग :
(१) २ चम्मच हल्दी चूर्ण लीटर पानी में उबालें।
(२) अमलतास, गेंदा फूलों को रातभर भिगोकर उबाल लें।

◆ जामुनी रंग :
चुकंदर उबालकर पीस पानी में मिला लें।

◆ काला रंग :
आंवला चूर्ण लोहे के बर्तन में रातभर भिगोयें।

◆ लाल रंग :
(१) आधे कप पानी में चम्मच हल्दी चूर्ण व चुटकीभर चूना मिलाकर १० लीटर पानी में डाल दें। २-२ चम्मच लाल चंदन चूर्ण १ लीटर पानी में उबालें।

◆ लाल गुलाल :
(१) सूखे लाल गुड़हल के फूलों का चूर्ण उपयोग करें।

◆ हरा रंग :
(१) पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियों के पेस्ट को पानी में मिला लें ।
(२) गेहूँ की हरी बालियों को पीस लें।

◆ हरा गुलाल :
(१) गुलमोहर अथवा रातरानी की पत्तियों को सुखाकर पीस लें।

◆ भूरा हरा गुलाल :
(१) मेंहदी चूर्ण में आंवला चूर्ण मिला लें।

~ऋषि प्रसाद / मार्च २०१३