Valentine’s Day History in Hindi, Why is Valentine’s Day celebrated?: रोम के राजा क्लाउडियस ब्रह्मचर्य की महिमा से परिचित रहे होंगे, इसलिए उन्होंने अपने सैनिकों को शादी करने के लिए मना किया था, ताकि वे शारीरिक बल और मानसिक दक्षता से युद्ध में विजय प्राप्त कर सकें । सैनिकों को शादी करने के लिए ज़बरदस्ती मना किया गया था, इसलिए संत वेलेन्टाइन (Valentines) जो स्वयं इसाई पादरी होने के कारण ब्रह्मचर्य के विरोधी नहीं हो सकते थे, ने गुप्त ढंग से उनकी शादियाँ कराईं । राजा ने उन्हे दोषी घोषित किया और उन्हें फाँसी दे दी गयी । सन् 496 से पोप गैलेसियस ने उनकी याद में वेलेन्टाइन डे मनाना शुरू किया ।

वेलेन्टाइन डे (Valentine’s Day) मनाने वाले लोग संत वेलेन्टाइन का ही अपमान करते हैं क्योंकि वे शादी के पहले ही अपने प्रेमास्पद को वेलेन्टाइन कार्ड भेजकर उनसे प्रणय-संबंध स्थापित करने का प्रयास करते हैं । यदि संत वेलेन्टाइन इससे सहमत होते तो वे शादियाँ कराते ही नहीं ।

 अतः भारत के युवान-युवतियाँ शादी से पहले प्रेमदिवस के बहाने अपने ओज-तेज-वीर्य का नाश करके सर्वनाश न करें और मानवमात्र के परम हितकारी पूज्य बापू जी के मार्गदर्शन में अपने यौवन-धन, स्वास्थ्य और बुद्धि की सुरक्षा करें ।
“मातृ-पितृ पूजन दिवस मनायें ।”

Why is valentine's day Celebrated

  • प्रेम तो निर्दोष होता है । प्रेम तो परमात्मा से, अल्लाह से मिलाता है । अल्लाह कहो, गॉड कहो, भगवान कहो, परम सत्ता का ही नाम है ‘प्रेम’ । परम सुख, परम चेतना का नाम है ‘प्रेम’ । वही राम, रहीम और गॉड का असली स्वरूप है, इसी में मानवता का मंगल है ।
  • सच्चे प्रेमस्वभाव से केवल भारतवासियों का ही नहीं, विश्वमानव का कल्याण होगा । लेकिन शादी विवाह के पहले, पढ़ाई के समय ही एक-दूसरे को फूल देकर युवक-युवतियाँ अपनी तबाही कर रहे हैं तो मुझे उनकी तबाही देखकर पीड़ा होती है । मानव-समाज को कहीं घाटा होता है तो मेरा दिल द्रवित हो जाता है । नारायण-नारायण…..
  • मेरे हृदय की व्यथा यह थी कि लोग बोलते हैं, ‘विकास का युग, विकास का युग’ लेकिन यह आज के युवक-युवतियों के लिए विनाश का युग है, ऐसा युग भूतकाल में कभी नहीं आया । न शुद्ध दूध मिलता है, न शुद्ध घी मिलता है, न शुद्ध हवाएँ मिलती हैं, न शुद्ध संस्कार मिलते हैं ।
  • थोड़ा कुछ यौवन आया नहीं कि कुसंस्कारों के द्वारा उऩकी कमर टूट जाती है । मैं किसी का विरोध नहीं करना चाहता हूँ लेकिन मानवता का विनाश देखकर मेरा हृदय व्यथित होता है । यह बाहर की आँधी आयी है। हम विरोध करने के बजाये इसका थोड़ी दिशा दे देते हैं ताकि यहाँ कि दिशा से उन लोगों का भी मंगल हो । प्रेम दिवस मनायें लेकिन ‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।’ करके ।

History of valentine's day for Students

  • 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं । यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं ।
  • इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को स्कूलों में केवल संयम अभियानों पर करोड़ों डालर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती ।
  • यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है । हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए । इस संदर्भ में विश्ववंदनीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की की है एक नयी पहल – ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’।

Spiritual Meaning of Valentine’s Day [The Truth about valentine's day]

  • सभी लोग अपने माता पिता का सत्कार करें । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । हृदय की विकारी वासनाओं को प्रेम का जामा देना, प्रेम को बदनाम करना है ।
  • प्रेम और काम में बहुत अंतर है । काम नीचे के केन्द्रों में है । वह उत्तेजना और अँधापन पैदा करता है, विकार पैदा करता है और प्रेम ऊपर के केन्द्रों में है, वह सूझबूझ पैदा करता है, नित्य नवीन रस पैदा करता है, प्राणिमात्र में अपनत्व दिखाता है ।
  • केवल हिन्दुस्तान उन्नत हो ऐसा नहीं अपितु पूरा मानव-समाज…. पूरा विश्व इस काम-वासना की अंधी आँधी से बचकर संयमी, सदाचारी, स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन की राह पर चले और विश्व का मंगल हो क्योंकि हमें विरासत में वही मिला है ।
  • माता-पिता ने हमसे अधिक वर्ष दुनिया में गुजारे हैं, उनका अनुभव हमसे अधिक है और सदगुरु ने जो महान अनुभव किया है उसकी तो हमारे छोटे अनुभव से तुलना ही नहीं हो सकती । इन तीनों के आदर से उनका अनुभव हमें सहज में ही मिलता है ।
  • अतः जो भी व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उस सज्जन को माता-पिता और सदगुरु का आदर पूजन आज्ञापालन तो करना चाहिए, चाहिए और चाहिए ही ! 14 फरवरी को ʹवेलेंटाइन डेʹ मनाकर युवक-युवतियाँ प्रेमी-प्रेमिका के संबंध में फँसते हैं । वासना के कारण उनका ओज-तेज दिन दहाड़े नीचे के केन्द्रों में आकर नष्ट होता है । उस दिन ʹमातृ-पितृ पूजनʹ काम-विकार की बुराई व दुश्चरित्रता की दलदल से ऊपर उठाकर उज्जवल भविष्य, सच्चरित्रा, सदाचारी जीवन की ओर ले जायेगा ।

10+ Facts of Valentine’s Day

  • 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं ।
  • यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं ।
  • इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है ।
  • प्रेम-दिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर विनाशकारी कामविकार का विकास हो रहा है, जो आगे चलकर चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, खोखलापन, जल्दी बुढ़ापा और मौत लाने वाला साबित होगा ।
  • प्रेम दिवस जरूर मनायें लेकिन प्रेमदिवस में संयम और सच्चा विकास लाना चाहिए । युवक युवती मिलेंगे तो विनाश-दिवस बनेगा ।
  • इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का पूजन करें और उनके सिर पर पुष्ष रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । संतान अपने माता-पिता के गले लगे ।
  • इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । बेटे-बेटियाँ माता-पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश देखें ।
  • प्रेमदिवस (वेलेन्टाइन डे) के नाम पर बच्चों, युवान-युवतियों के ओज-तेज का नाश हो, ऐसे दिवस का त्याग करके माता-पिता और संतानों प्रभु के नाते एक-दूसरे को प्रेम करके अपने दिल के परमेश्वर को छलकने दें ।

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Why is valentine's day Celebrated

  • प्रेम तो निर्दोष होता है । प्रेम तो परमात्मा से, अल्लाह से मिलाता है । अल्लाह कहो, गॉड कहो, भगवान कहो, परम सत्ता का ही नाम है ‘प्रेम’ । परम सुख, परम चेतना का नाम है ‘प्रेम’ । वही राम, रहीम और गॉड का असली स्वरूप है, इसी में मानवता का मंगल है ।
  • सच्चे प्रेमस्वभाव से केवल भारतवासियों का ही नहीं, विश्वमानव का कल्याण होगा । लेकिन शादी विवाह के पहले, पढ़ाई के समय ही एक-दूसरे को फूल देकर युवक-युवतियाँ अपनी तबाही कर रहे हैं तो मुझे उनकी तबाही देखकर पीड़ा होती है । मानव-समाज को कहीं घाटा होता है तो मेरा दिल द्रवित हो जाता है । नारायण-नारायण…..
  • मेरे हृदय की व्यथा यह थी कि लोग बोलते हैं, ‘विकास का युग, विकास का युग’ लेकिन यह आज के युवक-युवतियों के लिए विनाश का युग है, ऐसा युग भूतकाल में कभी नहीं आया । न शुद्ध दूध मिलता है, न शुद्ध घी मिलता है, न शुद्ध हवाएँ मिलती हैं, न शुद्ध संस्कार मिलते हैं ।
  • थोड़ा कुछ यौवन आया नहीं कि कुसंस्कारों के द्वारा उऩकी कमर टूट जाती है । मैं किसी का विरोध नहीं करना चाहता हूँ लेकिन मानवता का विनाश देखकर मेरा हृदय व्यथित होता है । यह बाहर की आँधी आयी है। हम विरोध करने के बजाये इसका थोड़ी दिशा दे देते हैं ताकि यहाँ कि दिशा से उन लोगों का भी मंगल हो । प्रेम दिवस मनायें लेकिन ‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।’ करके ।

History of valentine's day for Students

  • 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं । यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं ।
  • इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को स्कूलों में केवल संयम अभियानों पर करोड़ों डालर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती ।
  • यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है । हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए । इस संदर्भ में विश्ववंदनीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की की है एक नयी पहल – ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’।

Spiritual Meaning of Valentine’s Day [The Truth about valentine's day]

  • सभी लोग अपने माता पिता का सत्कार करें । इस दिन बच्चे-बच्चियाँ माता-पिता का आदर-पूजन करें और प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा । हृदय की विकारी वासनाओं को प्रेम का जामा देना, प्रेम को बदनाम करना है ।
  • प्रेम और काम में बहुत अंतर है । काम नीचे के केन्द्रों में है । वह उत्तेजना और अँधापन पैदा करता है, विकार पैदा करता है और प्रेम ऊपर के केन्द्रों में है, वह सूझबूझ पैदा करता है, नित्य नवीन रस पैदा करता है, प्राणिमात्र में अपनत्व दिखाता है ।
  • केवल हिन्दुस्तान उन्नत हो ऐसा नहीं अपितु पूरा मानव-समाज…. पूरा विश्व इस काम-वासना की अंधी आँधी से बचकर संयमी, सदाचारी, स्वस्थ, सुखी व सम्मानित जीवन की राह पर चले और विश्व का मंगल हो क्योंकि हमें विरासत में वही मिला है ।
  • माता-पिता ने हमसे अधिक वर्ष दुनिया में गुजारे हैं, उनका अनुभव हमसे अधिक है और सदगुरु ने जो महान अनुभव किया है उसकी तो हमारे छोटे अनुभव से तुलना ही नहीं हो सकती । इन तीनों के आदर से उनका अनुभव हमें सहज में ही मिलता है ।
  • अतः जो भी व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उस सज्जन को माता-पिता और सदगुरु का आदर पूजन आज्ञापालन तो करना चाहिए, चाहिए और चाहिए ही ! 14 फरवरी को ʹवेलेंटाइन डेʹ मनाकर युवक-युवतियाँ प्रेमी-प्रेमिका के संबंध में फँसते हैं । वासना के कारण उनका ओज-तेज दिन दहाड़े नीचे के केन्द्रों में आकर नष्ट होता है । उस दिन ʹमातृ-पितृ पूजनʹ काम-विकार की बुराई व दुश्चरित्रता की दलदल से ऊपर उठाकर उज्जवल भविष्य, सच्चरित्रा, सदाचारी जीवन की ओर ले जायेगा ।