14th February 2021 Ko Matru Pitru Pujan Divas Kyu Manaye [Why to Celebrate MPPD on 14th February instead of Valentines Day]

माता – पिता ने हमसे अधिक वर्ष दुनिया में गुजारे हैं, उनका अनुभव हमसे अधिक है और सदगुरु ने जो महान अनुभव किया है उसकी तो हमारे छोटे अनुभव से तुलना ही नहीं हो सकती । इन तीनों के आदर से उनका अनुभव हमें सहज में ही मिलता है । अतः जो भी व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उस सज्जन को माता – पिता और सदगुरु का आदर पूजन आज्ञापालन तो करना चाहिए, चाहिए और चाहिए ही ! 14 फरवरी को ʹवेलेंटाइन डेʹ  मनाकर युवक – युवतियाँ प्रेमी – प्रेमिका के संबंध में फँसते हैं । वासना के कारण उनका ओज – तेज दिन दहाड़े नीचे के केन्द्रों में आकर नष्ट होता है । उस दिन ʹमातृ – पितृ पूजनʹ काम – विकार की बुराई व दुश्चरित्रता की दलदल से ऊपर उठाकर उज्ज्वल भविष्य, सच्चरित्रा, सदाचारी जीवन की ओर ले जायेगा ।

अनादिकाल से महापुरुषों ने अपने जीवन में माता – पिता और सदगुरु का आदर – सम्मान किया है । पूज्य बापूजी ने भी बाल्यकाल से ही अपने माता – पिता की सेवा की और उनसे ये आशीर्वाद प्राप्त किये :

पुत्र तुम्हारा जगत में, सदा रहेगा नाम। लोगों के तुमसे सदा, पूरण होंगे काम। ।

पूज्य श्री अपने सदगुरु भगवत्पाद साँई श्री लीलाशाहजी महाराज की आज्ञा में रहकर खूब श्रद्धा व प्रेम से गुरुसेवा करते थे। माता – पिता और सदगुरु की कैसी सेवा – पूजा करनी चाहिए इसका प्रत्यक्ष उदाहरण पूज्यश्री के जीवन में देखने को मिलता है । उनकी सेवा से संतुष्ट माता – पिता और सदगुरु ने उन्हें कोई कमी भी नहीं रखी । इसका वर्णन करते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं – “मैं अपने – आप में बहुत संतुष्ट हूँ । पिता ने संतोष के कई बार उदगार निकाले और आशीर्वाद भी देते थे । माँ भी बड़ी संतुष्ट रही और सदगुरु भी संतुष्ट रहे तभी तो महाप्रयाण मेरी गोद में किये और उऩ्हीं की कृपा मेरे द्वारा मेरे साधकों और श्रोताओं को संतुष्ट कर रही है, अब मुझे क्या चाहिए ! जो मुझे सुनते हैं, मिलते हैं, वे भी संतुष्ट होते हैं तो मुझे कमी किस बात की रही !”

कोई हिन्दू, ईसाई, मुसलमान, यहूदी नहीं चाहते कि हमारे बच्चे विकारों में खोखले हो जायें, माता – पिता व समाज की अवज्ञा करके विकारी और स्वार्थी जीवन जीकर तुच्छ हो जायें और बुढ़ापे में कराहते रहें । बच्चे माता – पिता व गुरुजन का सम्मान करें तो उनके हृदय से विशेष मंगलकारी आशीर्वाद उभरेगा, जो देश के इन भावी कर्णधारों को ʹवेलेन्टाइन डेʹ जैसे विकारों से बचाकर गणेश जी की नाईं इऩ्द्रिय – संयम व आत्मसामर्थ्य विकसित करने में मददरूप होगा । माता, पिता एवं गुरुजनों का आदर करना हमारी संस्कृति की शोभा है । माता – पिता इतना आग्रह नहीं रखते कि संतानें उनका सम्मान – पूजन करें परंतु बुद्धिमान, शिष्ट संतानें माता – पिता का आदर पूजन करके उनके शुभ संकल्पमय आशीर्वाद से लाभ उठाती हैं ।

14 विकसित और विकासशील देशों के बच्चों व युवाओं में किये गये सर्वेक्षण में यह स्पष्ट हुआ है कि भारतीय बच्चे, युवक सबसे अधिक सुखी और स्नेही पाये गये । लंदन व न्यूयार्क में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका एक बड़ा कारण है-भारतीय लोगों का पारिवारिक स्नेह एवं निष्ठा ! भारतीय युवाओं ने कहा कि ʹउनके जीवन में प्रसन्नता लाने तथा समस्याओं को सुलझाने में उनके माता – पिता का सर्वाधिक योगदान है ।ʹ भारत में माता – पिता हर प्रकार से अपने बच्चों का पोषण करते हैं और माता – पिताओं का पोषण संतजनों से होता है। माता – पिता, बच्चे – युवक सभी को पोषित करने वाला पूज्य बापूजी द्वारा प्रेरित ʹमातृ – पितृ पूजन दिवसʹ इस निष्कर्ष की पुष्टि करता है ।

महान बनना सभी चाहते हैं, तरीके भी आसान हैं । बस, आपको चलना है । महापुरुषों के जीवन – चरित्र को आदर्श बनाकर आप सही कदम बढ़ायें, जरूर बढ़ायें । आपसे कइयों को उम्मीद है । हम भी आपके उज्ज्वल भविष्य की अपेक्षा करते हैं ।

– मातृ पितृ पूजन 2012 साहित्य से…