guru aagya palan

पूज्य श्री अपने सद्गुरु भगवत्पाद साईं श्री लीलाशाहजी महाराज (Leela Shah ji Maharaj) की आज्ञा में रहकर खूब श्रद्धा व प्रेम से गुरुसेवा करते थे । भोजन में मात्र मूँग की दाल लेते । साढे चार फीट के छोटे-से कमरे में सोते । आश्रम के सभी सेवाकार्य आपश्री ने अपने ऊपर ले लिये ।

आत्मसाक्षात्कार :-

साधना की विभिन्न घाटियों को पार करते हुए आश्विन मास, शुक्ल पक्ष द्वितीया संवत् २०२१ (७ अक्टूबर, वर्ष – १९६४) के दिन माध्याहन ढाई बजे सद्गुरु की कृपादृष्टि और संकल्पमात्र से आपश्री को आत्मा-परमात्मा का साक्षात्कार हो गया ।

पूर्ण गुरु किरपा मिली, पूर्ण गुरु का ज्ञान ।

आसुमल से हो गये, साईं आशाराम ।।

Purn Guru Kripa Mili, Purn Guru Ka Gyan ||

Asumal Se Ho Gye, Sai Asharam ||

आज्ञा सम न साहिब सेवा… :-

भगवत्पाद साईं श्री लीलाशाहजी महाराज (Leelashah ji Maharaj) ने आप में औरों को उन्नत करने का सामर्थ्य पूर्ण रूप से विकसित देखकर आदेश दिया : ”आशाराम ! अब तुम गृहस्थी में रहकर संसार-ताप से तप्त लोगों में यह पाप, ताप, तनाव, रोग, शोक, दुःख-दर्द से छुडानेवाला आध्यात्मिक प्रसाद बाँटो और उन्हें भी अपने आत्मस्वरूप में जगाओ ।”