भारतीय गायें विदेशी तथाकथित गायों की तरह बहुत समय तक जंगलों में हिंसक पशु के रूप में घूमते रहने के बाद घरों में आकर नहीं पलीं, वे तो शुरू से ही मनुष्यों द्वारा पाली गयी हैं ।

भारतीय गायों के लक्षण हैं उनका गल-कम्बल (गले के नीचे झालर-सा भाग), पीठ का कूबड़, चौड़ा माथा, सुंदर आँखें तथा बड़े मुड़े हुए सींग । भारतीय गोवंश की कुछ प्रमुख नस्लें हैं गिर, थारपारकर, साहीवाल, लाल सिंधी आदि ।

भारतीय गायों पर करनाल की ‘नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेस (एनबीएजीआर) संस्था ने अध्ययन कर पाया कि इनमें उन्नत ‘A-2 एलील जीन’ पाया जाता है, जो इन्हें स्वास्थ्यवर्धक दूध उत्पन्न करने में मदद करता है ।

भारतीय नस्लों में इस जीन की आवृत्ति (फ्रीक्वेंसी) 100 प्रतिशत तक पायी जाती है, जबकि विदेशी नस्लों में यह 60 प्रतिशत से भी कम होती है ।

भारतीय गोवंश में गर्मी, सर्दी तथा वर्षा को सहने की क्षमता होती है । बरसात में इनकी त्वचा से तैलीय पदार्थ के निकलने से उन्हें वर्षा से होने वाला कोई संक्रमण नहीं होता ।

भारतीय गायों में ‘सूर्यकेतु नाड़ी’ होती है । गायें अपने लम्बे सींगों के द्वारा सूर्य की किरणों को इस सूर्यकेतु नाड़ी तक पहुँचाती हैं । इससे सूर्यकेतु नाड़ी स्वर्णक्षार बनाती है, जिसका बड़ा अंश दूध में और अल्पांश गोमूत्र में आता है ।

भारतीय गाय के दूध में ‘ओमेगा-6’ फैटी एसिड होता है, जिसकी कैंसर-नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका है ।

विदेशी नस्ल की गायों के दूध में इसका नामोनिशान तक नहीं है । भारतीय गाय के दूध में अनसैचुरेटेड फैट होता है, इससे धमनियों में वसा नहीं जमती और यह हृदय को भी पुष्ट करता है ।

भारतीय गाय चरते समय यदि कोई विषैला पदार्थ खा लेती है तो दूसरे प्राणियों की तरह वह विषैला तत्व दूध में मिश्रित नहीं होता भारतीय गाय संसार के एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसके मल-मूत्र का औषधि तथा यज्ञ-पूजा आदि में उपयोग होता है ।

परमाणु विकिरण से बचने में गाय का गोबर उपयोगी होता है । भारतीय गाय के गोबर-गोमूत्र में रेडियोधर्मिता को सोखने का गुण होता है । भोपाल में घातक गैस का रिसाव हुआ तो इसका असर उन घरों में कम हुआ, जो गोबर से लिपे हुए थे व जहाँ गाय के घी एवं कंडे से हवन होता था ।

भारतीय गोवंश का पंचगव्य निकट भविष्य में प्रमुख जैव-औषधि बनने की सीमा पर खड़ा है । अमेरिका ने पेटेंट देकर स्वीकार किया है कि कैंसर-नियंत्रण में गोमूत्र सहायक है ।

भारतीय गाय की पीठ पर, गलमाला पर प्रतिदिन आधा घंटा हाथ फेरने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है ।

गोबर को शरीर पर मलकर स्नान करने से बहुत-से चर्मरोग दूर हो जाते हैं गोमय-स्नान को पवित्रता और स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वोत्तम माना गया है । इस प्रकार भारतीय गाय की अनेक अद्भुत विशेषताएँ हैं । 

धनभागी हैं वे लोग, जिनको भारतीय गाय  का दूध, दूध के पदार्थ आदि मिलते हैं और जो उनकी कद्र करते हैं ।

~लोक कल्याण सेतु, अगस्त 2015