– पं. मदनमोहन मालवीयजी

आप जानते हैं कि भारत के कल्याण के लिए गौ-रक्षा अनिवार्य है । संसार का जो उपकार गौमाता ने किया है, उसके महत्व को जानते हुए भी लोग गौ की उपेक्षा करते हैं और गौ-रक्षा के प्रश्न पर ध्यान नहीं देते । यह उनका भ्रम (बेहोशी) और अन्याय है ।

जो लोग गोवध करते हैं अथवा गोवध करना अपना धर्म समझते हैं उनके अज्ञान का ठिकाना नहीं ।

गौ जैसे उपकारी प्राणी का वध करना कभी भी धर्मसंगत नहीं कहा जा सकता । दुःख की बात है कि जो लोग गौमाता को पूज्य दृष्टि से देखते हैं और उनकी पूजा कर वैतरणी* पार उतरना चाहते हैं, वे भी गौ-सेवा से विमुख दिखाई देते हैं ।

सब सज्जनों से मैं अनुरोध करता हूँ कि गौ-रक्षा के प्रश्न पर विशेष ध्यान दें और प्राणपण से इस बात की चेष्टा करें कि भारत में फिर वही दिन आ जाए जब गौ सचमुच में माता समझी जाए और उसकी रक्षा के लिए हम अपने प्राणों का मोह न करें ।

मुझे पूरा विश्वास है कि यदि आप ऐसा संकल्प कर लेंगे और गौ रक्षा के अनुष्ठान में तन-मन-धन से लग जायेंगे तो वे दिन दूर नहीं हैं, जब फिर से देश में दूध की नदियाँ बहें और प्रत्येक भारतीय गौमाता को पूज्य दृष्टि से देखे । याद रहे कि इस्लाम या कुरान शरीफ में गोवध का विधान नहीं है जो हमें उसके रोकने में मजहब की अड़चन पड़े । गौमाता की सभी संतान हैं ।

हिन्दू, मुसलमान या ईसाई का सवाल गौमाता के यहाँ नहीं है। अकबर को इस बात का ज्ञान था । उसने गोवध बंद करवा दिया था । सँभलो और औरों को समझाओ कि दिव्य जीवन के लिए गौ-सेवा कितने महत्त्व की चीज है ।

विश्वास रखो कि यदि आप गौ-पालन के लिए तैयार हो गये तो परमात्मा अवश्य आपकी मदद करेगा और आप जरूर अपने काम में सफल होंगे ।

*पुराणानुसार परलोक की एक नदी, जिसे जीवात्मा को शरीर छोड़ने पर पार करना पड़ता है ।

– लोक कल्याण सेतु / अक्टूबर 2018