apna pura jeevan samarpit kar dia

– Asharam Bapu Aur Motera Village

आप अपने पूज्य सद्गुरुदेव की आज्ञा शिरोधार्य करके अपनी उच्च समाधि-अवस्था का सुख छोडकर अशांति की भीषण आग से तप्त लोगों में शांति का संचार करने हेतु समाज के बीच आ गये।

सन् १९७२ में आपश्री अहमदाबाद में साबरमती के पावन तट पर स्थित मोटेरा (Motera) गाँव पधारे । तब यहाँ दिन में भी भयानक मारपीट, लूटपाट, डकैती व असामाजिक कार्य होते थे । वही मोटेरा (Motera) गाँव आज करोड़ों श्रद्धालुओं का पावन तीर्थधाम, शांतिधाम बन चुका है । आज विश्वभर में करीब ४२५ से भी अधिक आश्रम स्थापित हो चुके हैं । आज करोड़ों सौभाग्यशाली लोग पूज्यश्री से वैदिक मंत्र की दीक्षा ले चुके हैं । ध्यानयोग शिविरों में आकर उन्हें आपश्री की अहैतुकी करुणा-कृपा से चित्शक्ति-उत्थान के दिव्य अनुभव होते हैं, जिससे चिंता-तनाव, हताशा-निराशा आदि पलायन कर जाते हैं और जीवन की उलझी गुत्थियाँ सुलझने लगती हैं ।

निष्काम कर्मयोग हेतु आश्रम द्वारा स्थापित १४०० से भी अधिक सेवा समितियाँ आश्रम की सेवाओं को समाज के कोने-कोने तक पहुँचाने में जुटी रहती हैं । भारत की राष्ट्रीय एकता-अखंडता व शांति के प्रबल समर्थक पूज्य बापूजी ने राष्ट्र के कल्याणार्थ अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है ।